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रबी बुआई से पहले हरियाणा में बीज-खाद का पर्याप्त स्टॉक, राणा के सख्त निर्देश

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रबी बुआई से पहले हरियाणा में बीज-खाद का पर्याप्त स्टॉक, राणा के सख्त निर्देश
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हरियाणा में आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों को गेहूं की बुआई के लिए बीज और खाद की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए राज्य के कृषि विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं कि किसानों की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक समय रहते उन तक हर हाल में पहुंचना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अक्टूबर में शुरू होने वाली गेहूं की बुआई से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हों, विभाग ने एक विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसमें आगामी रबी सीजन के लिए आवश्यक सभी इनपुट की उपलब्धता की गहन समीक्षा की गई। इस proactive कदम का उद्देश्य किसानों को एक सुचारु और सफल बुआई का अनुभव प्रदान करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और प्रदेश में कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

बीज की पर्याप्त उपलब्धता और गुणवत्ता पर जोर

कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि प्रदेश में गेहूं के कच्चे बीज (रॉ-सीड) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 40.64 लाख क्विंटल रॉ-सीड उपलब्ध है, जबकि राज्य में सामान्य तौर पर गेहूं की बुआई के लिए लगभग 17 से 18 लाख क्विंटल बीज की ही आवश्यकता पड़ती है। यह दर्शाता है कि हरियाणा के पास आवश्यकता से कहीं अधिक बीज का स्टॉक मौजूद है, जिससे किसी भी संभावित कमी की आशंका समाप्त हो जाती है। बीज की प्रोसेसिंग और सर्टिफिकेशन का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, और यह प्रक्रिया सितंबर माह तक पूरी होने की उम्मीद है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अक्टूबर में गेहूं की बुआई शुरू होने से पहले किसानों को प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध हो सके। मंत्री राणा ने अधिकारियों को केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि चना और मसूर जैसी दलहनी फसलों के प्रमाणित एवं बेहतर गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करने से न केवल उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि किसानों को दलहन की बिक्री से बेहतर आय हासिल करने में भी मदद मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

खाद का बंपर स्टॉक और वितरण व्यवस्था में सुधार

रबी फसलों की व्यापक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, हरियाणा प्रदेश में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों का भी पर्याप्त स्टॉक बताया गया है। कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल 2,34,712 मीट्रिक टन यूरिया, 55,081 मीट्रिक टन डीएपी, 35,049 मीट्रिक टन एनपीके और 59,610 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। यह स्टॉक आगामी रबी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को बुआई और फसल की शुरुआती बढ़वार के समय खाद के लिए कहीं भी भटकना न पड़े। उन्होंने स्टॉक की लगातार निगरानी करने और जरूरत के अनुसार पहले से ही व्यवस्था करने के सख्त आदेश दिए। मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि खाद वितरण को 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल से जोड़ने का लाभ न केवल किसानों को मिला है, बल्कि सरकार को भी इससे फायदा हुआ है। उनके मुताबिक, इस डिजिटल व्यवस्था से खाद की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और केंद्र सरकार की सब्सिडी में भी करीब 863 करोड़ रुपये की भारी बचत हुई है। यह व्यवस्था पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हुई है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है।

पराली प्रबंधन और कृषि मशीनीकरण पर बल

समीक्षा बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन योजना की भी गहन समीक्षा की गई, जो पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्री राणा ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए केवल जागरूकता अभियान ही काफी नहीं हैं, बल्कि उन्हें समय पर आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने सुपर सीडर, बेलिंग मशीन, हैप्पी सीडर, श्रेडर मास्टर और जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल सहित अन्य महत्वपूर्ण कृषि मशीनों की उपलब्धता और उन पर दी जाने वाली सब्सिडी की प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की। राणा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसान के मशीन खरीदने के बाद उसकी फिजिकल वेरिफिकेशन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही सब्सिडी की राशि बिना किसी विलंब के सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों और पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान मिल सके, जिससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और मिट्टी की उर्वरता बनी रहे। मंत्री ने बैठक में मौजूद कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक, अतिरिक्त निदेशक एवं हरियाणा राज्य बीज प्रमाणन एजेंसी के निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) डॉ. रामप्रताप सिंहाग, अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रदीप मील सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि रबी सीजन शुरू होने से पहले बीज, खाद और पराली प्रबंधन से जुड़ी मशीनों की उपलब्धता को लेकर पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को कोई दिक्कत न हो और वे अपनी फसलों की बुआई समय पर कर सकें।

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