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एशियन गेम्स: सुजीत कलकल ने कुश्ती में जीता गोल्ड, आखिरी पलों में पलटी बाजी

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एशियन गेम्स: सुजीत कलकल ने कुश्ती में जीता गोल्ड, आखिरी पलों में पलटी बाजी
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भारत के पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में कुश्ती के क्षेत्र में देश को गौरव दिलाने वाला एक अभूतपूर्व स्वर्ण पदक दिलाया है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को जापान के आइची नागोया में आयोजित हुए इन खेलों में, सुजीत ने पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में ताजिकिस्तान के मजबूत पहलवान अब्दुलमाजिद कुदिएव को 10-9 के रोमांचक स्कोर से हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह मुकाबला इसलिए भी यादगार बन गया क्योंकि एक समय सुजीत अपने प्रतिद्वंद्वी से 2-9 के बड़े अंतर से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने अपनी असाधारण दृढ़ इच्छाशक्ति और कौशल का प्रदर्शन करते हुए अंतिम डेढ़ मिनट में पूरे मैच का रुख पलट दिया, और निर्णायक 10 सेकंड में दो अंक अर्जित कर जीत अपने नाम की। यह जीत न केवल सुजीत के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणादायक पल है।

रोमांचक फाइनल और ऐतिहासिक वापसी

एशियन गेम्स 2026 के कुश्ती मैट पर शुक्रवार का दिन सुजीत कलकल के अविश्वसनीय प्रदर्शन का गवाह बना। पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में उनका सामना ताजिकिस्तान के अनुभवी पहलवान अब्दुलमाजिद कुदिएव से था, जो अपनी मजबूत पकड़ और तेज चालों के लिए जाने जाते हैं। मुकाबले की शुरुआत में दोनों पहलवानों ने सतर्कता बरती, लेकिन पहले राउंड के अंत तक कुदिएव ने 4-2 की बढ़त बना ली थी। दूसरे राउंड में ताजिकिस्तान के पहलवान ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया, और जल्द ही स्कोर 9-2 तक पहुंच गया। इस समय, भारतीय खेमे में चिंता की लहर दौड़ गई थी, क्योंकि सुजीत के लिए मुकाबला लगभग हाथ से निकलता हुआ प्रतीत हो रहा था। मैच के इस नाजुक मोड़ पर, कई दर्शक भी सुजीत की हार को निश्चित मान चुके थे, लेकिन सुजीत के मन में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने अपनी रणनीति पर फिर से काम किया और अंतिम दो मिनट में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी।

चार टेकडाउन ने पलटा पासा

जब स्कोर 2-9 था और मैच का समय तेजी से घट रहा था, तब सुजीत कलकल ने अपनी हार को स्वीकार करने की बजाय, एक असाधारण वापसी का संकल्प लिया। उन्होंने अंतिम दो मिनटों में एक के बाद एक लगातार चार सफल टेकडाउन किए। कुश्ती के नियमों के अनुसार, प्रत्येक टेकडाउन के लिए दो अंक मिलते हैं, और इस प्रकार, सुजीत ने इन चार टेकडाउन से कुल आठ महत्वपूर्ण अंक अर्जित किए। इन अंकों ने उन्हें 2-9 के स्कोर से 10-9 की बढ़त के करीब पहुंचा दिया। उनकी यह वापसी इतनी तेज और प्रभावी थी कि अब्दुलमाजिद कुदिएव को संभलने का मौका ही नहीं मिला। अंतिम 10 सेकंड में, जब स्कोर लगभग बराबर था और तनाव चरम पर था, सुजीत ने अपनी अंतिम चाल चली और निर्णायक दो अंक हासिल किए, जिससे स्कोर 10-9 हो गया और रेफरी की अंतिम सीटी के साथ ही उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। यह किसी भी कुश्ती मुकाबले में देखी गई सबसे रोमांचक वापसी में से एक थी।

भारत के लिए गौरव का क्षण

सुजीत कलकल की यह जीत सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत के लिए एक बड़े गर्व का क्षण है। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में स्वर्ण पदक जीतना किसी भी एथलीट के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होता है। सुजीत ने न केवल स्वर्ण जीता, बल्कि उन्होंने जिस तरह से यह जीत हासिल की, वह लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उनका यह प्रदर्शन यह सिखाता है कि खेल में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए, चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों। इस जीत के साथ, सुजीत कलकल का नाम भारत के उन महान पहलवानों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है। यह पदक भारतीय कुश्ती के बढ़ते कद और उसकी युवा प्रतिभाओं की क्षमता को भी दर्शाता है। खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ ने सुजीत को उनकी इस शानदार जीत के लिए बधाई दी है।

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दृढ़ इच्छाशक्ति और भविष्य की उम्मीदें

सुजीत कलकल ने इस मुकाबले में सिर्फ शारीरिक ताकत का ही प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी मानसिक दृढ़ता और अदम्य इच्छाशक्ति का भी परिचय दिया। 2-9 से पीछे होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और हर पल अपनी जीत पर विश्वास बनाए रखा। यह मानसिक मजबूती ही उन्हें ऐसे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है। इस स्वर्ण पदक के साथ, सुजीत अब विश्व कुश्ती मंच पर एक प्रमुख नाम बन गए हैं। उनकी यह जीत निश्चित रूप से उन्हें भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जैसे कि विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए आत्मविश्वास प्रदान करेगी। भारत को उनसे आने वाले समय में और भी कई पदकों की उम्मीद है, और उनका प्रदर्शन युवा पहलवानों के लिए मार्गदर्शक होगा कि कैसे दबाव में भी शांत रहकर और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करके जीत हासिल की जा सकती है। यह जीत भारतीय कुश्ती के स्वर्णिम भविष्य की एक चमकदार तस्वीर प्रस्तुत करती है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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