चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की बढ़ती मांग: क्यों मिल रहे अरबों डॉलर के ऑर्डर?
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दुनिया की वायु सेनाएं भले ही पांचवीं और छठी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों की दौड़ में लगी हों, लेकिन इसके समानांतर एक और महत्वपूर्ण प्रवृत्ति सामने आ रही है। कई देश लगातार चौथी और 4.5वीं पीढ़ी के विमानों के लिए बड़े ऑर्डर दे रहे हैं। फ्रांस का राफेल, अमेरिका का F-15EX और स्वीडन का ग्रिपेन जैसे कई प्लेटफॉर्म अभी भी बड़े ऑर्डर आकर्षित कर रहे हैं, जिससे इन लड़ाकू विमानों के ऑर्डर बुक में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि अत्याधुनिक स्टील्थ कार्यक्रम सुर्खियों में छाए हुए हैं। ये विमान लागत-प्रभावशीलता, उच्च उपलब्धता, निरंतर अपग्रेड और भारी हथियार ले जाने की क्षमता के कारण वैश्विक रक्षा बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
प्रमुख सौदे और वैश्विक पहुंच
फ्रांस के डसॉल्ट राफेल ने 2026 की शुरुआत तक 200 से अधिक विमानों के ऑर्डर का आंकड़ा पार किया है, जिसमें इंडोनेशिया को 2022 के 42 जेट के ऑर्डर की डिलीवरी इस साल से शुरू हो गई है। यूक्रेन ने भी फ्रांसीसी रक्षा पैकेज के तहत राफेल F4 हासिल करने की योजना बताई है, हालांकि अनुबंध अभी बाकी है। अमेरिकी वायु सेना ने F-15EX ईगल II बेड़े का विस्तार कर सितंबर में 22 अतिरिक्त जेट के लिए 2.38 अरब डॉलर का अनुबंध किया। सऊदी अरब और कतर भी आधुनिक F-15 का मूल्यांकन कर रहे हैं, जबकि जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर इसके प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटर हैं। स्वीडन के ग्रिपेन E/F ने भी लैटिन अमेरिका में रुचि पैदा की है। पेरू ने 2025 में 24 जेट के लिए 3.5 अरब डॉलर के प्रस्तावित सौदे हेतु इसे चुना है, हालांकि अनुबंध लंबित है। कोलंबिया ने लगभग 1.9 अरब डॉलर में 17 विमानों तक के लिए अनुबंध किया है, जबकि ब्राजील फॉलो-ऑन खरीद पर बात कर रहा है। यूक्रेन ने भी 2025 के आशय पत्र के तहत ग्रिपेन खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। यूरोफाइटर टाइफून के जून 2026 तक 150 से अधिक विमानों के ऑर्डर लंबित थे, जिसमें तुर्की भी संभावित अधिग्रहण पर विचार कर रहा है। ये आंकड़े वैश्विक स्तर पर चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की व्यापक मांग दर्शाते हैं।
लागत-प्रभावशीलता और उच्च उपलब्धता
सवाल उठता है कि ये तथाकथित "पुराने" चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान अभी भी इतनी मांग में क्यों हैं? इसका एक प्रमुख कारण लागत है। ये विमान आमतौर पर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तुलना में खरीदने, संचालित करने और रखरखाव करने में काफी सस्ते होते हैं। वे दशकों के परिचालन अनुभव और निरंतर अपग्रेड द्वारा समर्थित उच्च उपलब्धता भी प्रदान करते हैं। आज के कई चौथी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म उन्नत रडार, आधुनिक एवियोनिक्स, परिष्कृत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी के हथियारों जैसे मीटियोर बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस हैं। यह उन्हें नए लड़ाकू विमानों के साथ क्षमता के अंतर को काफी कम कर देता है, लेकिन बहुत कम लागत पर। इनकी लंबी ऑपरेशनल लाइफ, आसान स्पेयर पार्ट्स उपलब्धता और सपोर्ट सिस्टम रखरखाव लागत व समय को कम करते हैं।
हथियार ले जाने की क्षमता और सामरिक लचीलापन
भारी बाहरी हथियार ले जाने की उनकी क्षमता एक और बड़ा फायदा है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी बाहरी रूप से हथियार ले जा सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से उनका रडार सिग्नेचर बढ़ जाता है और उनके सबसे बड़े फायदे: स्टील्थ से समझौता होता है। चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को ऐसी कोई बाधा नहीं होती है और वे हवा से जमीन पर हमले से लेकर समुद्री हमले तक के मिशनों के लिए पर्याप्त हथियार ले जा सकते हैं। वे हवाई श्रेष्ठता, जमीनी हमला, टोही और समुद्री गश्त जैसे विभिन्न मिशनों के लिए अनुकूलनीय हैं। यह बहुमुखी प्रतिभा उन्हें वायु युद्ध क्षमता बनाने या पुराने बेड़े बदलने वाले देशों के लिए आकर्षक बनाती है, जो मौजूदा और भविष्य की युद्ध स्थितियों में एक विश्वसनीय विकल्प प्रदान करती है।
तत्काल उपलब्धता का लाभ
इन विमानों की अपेक्षाकृत कम परिचालन लागत और लचीलापन भी उन्हें आकर्षक बनाता है। महत्वपूर्ण रूप से, इनमें से कई विमान तत्काल उपलब्ध हैं, जबकि नई पीढ़ी के कार्यक्रमों को विकसित होने, उत्पादन करने और बड़े पैमाने पर उपलब्ध होने में वर्षों लग सकते हैं। कई देश अपनी तत्काल रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए इन सिद्ध और विश्वसनीय प्लेटफार्मों पर भरोसा करते हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता में, त्वरित तैनाती और सिद्ध प्रदर्शन वाले विमानों की आवश्यकता सर्वोपरि है। चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान, अपने लगातार अपग्रेड और सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, इस आवश्यकता को प्रभावी ढंग से पूरा करते हैं, जिससे वे वैश्विक रक्षा बाजार में महत्वपूर्ण हैं। यह उपलब्धता छोटे और मध्यम आकार की वायु सेनाओं के लिए निर्णायक भूमिका निभाती है।
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