देश 8 मिनट पढ़ें

लखनऊ में संतों का मानवता-एकता संदेश, अनूप जलोटा के भजन से गूंजा दरबार

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
56 व्यूज़
लखनऊ में संतों का मानवता-एकता संदेश, अनूप जलोटा के भजन से गूंजा दरबार
देश

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी में बीते शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित 'आध्यात्मिक सद्भावना संगम' में विभिन्न पूज्य संतों ने दुनिया को मानवता, एकता और शांति का गहन संदेश दिया। इस भव्य आयोजन में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने अपनी मधुर भजन प्रस्तुतियों से उपस्थित हजारों श्रोताओं को भक्ति और आध्यात्मिक शांति से सराबोर कर दिया। यह कार्यक्रम न केवल एक धार्मिक समागम था, बल्कि समाज में भाईचारे, सद्भाव और परस्पर प्रेम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था, जहाँ विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ आकर इन सार्वभौमिक मूल्यों को आत्मसात करने के लिए एकत्रित हुए थे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच मानवीय मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के महत्व को रेखांकित करना था।

संतों का प्रेरक उद्बोधन

कार्यक्रम का शुभारंभ परम पूज्य स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ, जिन्होंने मानवता को सर्वोपरि धर्म बताया। उन्होंने कहा कि "आज के समय में जब दुनिया विभिन्न मतभेदों और संघर्षों से जूझ रही है, तब एकता और करुणा ही हमें सही मार्ग दिखा सकती है।" स्वामी जी ने अहिंसा, प्रेम और निस्वार्थ सेवा के सिद्धांतों पर जोर देते हुए बताया कि किस प्रकार ये मूल्य व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में शांति और समृद्धि ला सकते हैं। उनके बाद, आचार्य श्री निर्मल दास जी महाराज ने अपने संबोधन में 'वसुधैव कुटुंबकम्' के प्राचीन भारतीय दर्शन की व्याख्या की। उन्होंने समझाया कि सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं और हमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना रखनी चाहिए। आचार्य जी ने आधुनिक जीवनशैली के तनाव और आध्यात्मिक शून्यता पर भी प्रकाश डाला और समाधान के रूप में आंतरिक शांति तथा ध्यान के महत्व को बताया। कार्यक्रम में उपस्थित माता निर्मला देवी जी ने नारी शक्ति और परिवार में आध्यात्मिक मूल्यों के संचार की भूमिका पर विशेष बल दिया, जिससे एक सुदृढ़ और संस्कारवान समाज का निर्माण हो सके। सभी संतों ने एक स्वर में कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं, और सच्चा धर्म वही है जो मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे।

अनूप जलोटा की भजन संध्या

इस आध्यात्मिक संध्या का एक प्रमुख आकर्षण भजन सम्राट अनूप जलोटा की मनमोहक प्रस्तुति रही। अपनी सुमधुर और ओजस्वी आवाज में उन्होंने कई प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत किए, जिन्होंने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रोताओं ने उनके भजनों पर झूमते हुए आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। जलोटा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में 'ऐसी लागी लगन' और 'जो भजे हरि को सदा' जैसे भजनों को गाकर समां बांध दिया। उन्होंने कहा कि भजन केवल गायन नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने का एक माध्यम है, और संगीत में वह शक्ति है जो मन को शांत कर सकती है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ सकती है। उनकी प्रस्तुति के दौरान पूरा सभागार तालियों और जयकारों से गूंज उठा, जिससे कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। अनूप जलोटा ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मकता और धार्मिक सद्भाव फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि वे अपने जीवन में सही दिशा प्राप्त कर सकें।

एकता और मानवता का संदेश

इस 'आध्यात्मिक सद्भावना संगम' का केंद्रीय विषय एकता और मानवता का प्रचार था। आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रवचन देना नहीं था, बल्कि विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं और विचारों को एक मंच पर लाना था ताकि सभी लोग एक-दूसरे से सीख सकें और साझा मानवीय मूल्यों को मजबूत कर सकें। कार्यक्रम में लखनऊ और आसपास के जिलों से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिनमें विभिन्न आयु वर्ग और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल थे। यह भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि आज भी समाज में आध्यात्मिक मूल्यों और एकता के संदेशों के प्रति गहरी आस्था है। आयोजन स्थल पर एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिसमें विभिन्न धर्मों के पवित्र ग्रंथों और मानवतावादी संदेशों को दर्शाया गया था, जिससे आगंतुकों को विभिन्न संस्कृतियों और विचारों को समझने का अवसर मिला। इस प्रकार के आयोजन न केवल लोगों को एक साथ लाते हैं, बल्कि उन्हें एक साझा उद्देश्य – मानवता की सेवा – के लिए प्रेरित भी करते हैं।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

आयोजन का व्यापक प्रभाव

इस भव्य आयोजन का लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले कई लोगों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें एक नई ऊर्जा और शांति का अनुभव हुआ है। एक श्रद्धालु, सुनीता देवी ने कहा, "संतों के वचन और अनूप जलोटा के भजन सुनकर मन को असीम शांति मिली। ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए ताकि समाज में सकारात्मकता बनी रहे।" वहीं, प्रोफेसर रमेश चंद्र ने टिप्पणी की, "आज के भागदौड़ भरे जीवन में ऐसे आध्यात्मिक आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने में मदद करते हैं।" आयोजकों ने बताया कि उन्हें पूरे प्रदेश से इस आयोजन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं और वे भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करने की योजना बना रहे हैं। यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि आध्यात्मिक नेतृत्व और कला के माध्यम से समाज में एकता, सद्भाव और मानवता के संदेश को कितनी गहराई से स्थापित किया जा सकता है। यह वास्तव में एक ऐसा प्रयास था जो न केवल विचारों को प्रेरित करता है, बल्कि लोगों को एक बेहतर दुनिया के निर्माण के लिए एकजुट भी करता है।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया