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महाराष्ट्र: 3 होम्योपैथ अब लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं, विवाद गहराया

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महाराष्ट्र: 3 होम्योपैथ अब लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं, विवाद गहराया
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महाराष्ट्र में चिकित्सा क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहाँ तीन होम्योपैथिक चिकित्सकों को आधिकारिक तौर पर एलोपैथिक दवाएं लिखने की वैध अनुमति मिल गई है। इन डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के साथ पंजीकृत किया गया है, जिससे वे आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथिक) पद्धतियों का अभ्यास कर सकेंगे। यह निर्णय एक-वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लिया गया है, जिसके तहत उन्हें यह विशेष अधिकार मिला है। इस सूची में डॉ. नेहा सिद्धार्थ पवार पहली होम्योपैथ हैं, जिन्हें 4 अगस्त, 2026 को यह पंजीकरण प्राप्त हुआ। हालांकि, इस कदम का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) जैसे एलोपैथिक निकायों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है, जो इसे "मिक्सोपैथी" और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। यह मामला राज्य भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों का कारण बन गया है, जिससे चिकित्सा समुदाय में तनाव बढ़ गया है।

कौन हैं ये तीन डॉक्टर?

जिन तीन होम्योपैथिक चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति मिली है, वे इस प्रकार हैं: डॉ. नेहा सिद्धार्थ पवार, डॉ. राजश्री मेमाने और डॉ. मयूरेश कांबले। इन तीनों को आधिकारिक तौर पर एलोपैथिक महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के साथ पंजीकृत किया गया है, जिससे उन्हें आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथिक) पद्धतियों का कानूनी रूप से अभ्यास करने का अधिकार मिल गया है। डॉ. नेहा सिद्धार्थ पवार इस सूची में सबसे पहली होम्योपैथ हैं, जिन्हें 4 अगस्त, 2026 को यह पंजीकरण प्राप्त हुआ। उनके पंजीकरण के बाद ही अन्य डॉक्टरों के लिए भी यह राह आसान हुई। डॉ. राजश्री मेमाने ने मानखुर्द से ऑनलाइन पंजीकरण कराया है, जबकि डॉ. मयूरेश कांबले ने बदलापुर से अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इन डॉक्टरों का पंजीकरण महाराष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच की दीवारों को तोड़ने का प्रयास कर रहा है।

एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति क्यों मिली?

इन तीन होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल अधिनियम में 2014 के संशोधन के तहत दी गई है। इस संशोधन ने कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ होम्योपैथिक चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाओं का अभ्यास करने की संभावना प्रदान की थी। इन डॉक्टरों को यह पंजीकरण इसलिए मिला है क्योंकि उन्होंने सफलतापूर्वक एक-वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) पूरा किया है। यह कोर्स आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और फार्माकोलॉजी के सिद्धांतों की गहन जानकारी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि होम्योपैथिक चिकित्सक एलोपैथिक दवाओं के उपयोग और प्रभाव को समझ सकें। हालांकि, उनके वर्तमान पंजीकरण शर्तों के अधीन हैं और बॉम्बे हाई कोर्ट के आगामी अंतिम आदेशों पर निर्भर करेंगे, जो क्रॉस-प्रैक्टिस से संबंधित चल रहे मामले की सक्रिय रूप से सुनवाई कर रहा है। यह कानूनी प्रक्रिया इस महत्वपूर्ण निर्णय के भविष्य को निर्धारित करेगी।

विवाद और एलोपैथिक डॉक्टरों का विरोध

इस कदम ने चिकित्सा समुदाय में गहरा विवाद खड़ा कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) जैसे प्रमुख एलोपैथिक निकायों ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उनका मानना है कि यह "मिक्सोपैथी" को बढ़ावा देगा, जिससे मरीजों की सुरक्षा से समझौता हो सकता है। एलोपैथिक डॉक्टरों का तर्क है कि होम्योपैथिक चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाओं की पूरी जानकारी और प्रशिक्षण नहीं होता, जिससे गलत निदान या अनुचित उपचार का खतरा बढ़ सकता है। पहले होम्योपैथिक चिकित्सक के एलोपैथिक काउंसिल में आधिकारिक पंजीकरण के बाद महाराष्ट्र में एलोपैथिक रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा बड़े पैमाने पर राज्यव्यापी हड़तालें की गईं। यह टकराव चिकित्सा समुदाय, राज्य सरकार और वैकल्पिक चिकित्सा बोर्डों के बीच एक बड़ा प्रदर्शन बन गया है। विरोध प्रदर्शनों में डॉक्टरों ने मिक्सोपैथी के खिलाफ नारे लगाए और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने की मांग की।

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कानूनी स्थिति और भविष्य की राह

इस पूरे मामले का भविष्य अब बॉम्बे हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करता है। वर्तमान में, हाई कोर्ट क्रॉस-प्रैक्टिस के मुद्दे पर सक्रिय रूप से सुनवाई कर रहा है और उसके अंतिम आदेश ही यह तय करेंगे कि होम्योपैथिक डॉक्टर कितनी हद तक एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे। इस मामले में न्यायालय का निर्णय महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए एक मिसाल कायम करेगा और विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के बीच के संबंधों को परिभाषित करेगा। यदि हाई कोर्ट इन पंजीकरणों को बरकरार रखता है, तो यह स्वास्थ्य सेवा वितरण में नवाचार और एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। हालांकि, यदि हाई कोर्ट इसके खिलाफ फैसला सुनाता है, तो यह वर्तमान पंजीकरणों को रद्द कर सकता है और क्रॉस-प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगा सकता है। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति और चिकित्सा शिक्षा के लिए दूरगामी परिणाम लाएगी, जो महाराष्ट्र के स्वास्थ्य परिदृश्य को नया आकार देगी।

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