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सहकारिता क्षेत्र के सशक्तिकरण को प्रतिबद्ध राज्य सरकार: मुख्य सचिव

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सहकारिता क्षेत्र के सशक्तिकरण को प्रतिबद्ध राज्य सरकार: मुख्य सचिव
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राज्य सरकार ने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को और अधिक व्यवहा...

राज्य सरकार ने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को और अधिक व्यवहार्य तथा जमीनी स्तर पर सेवा-उन्मुख संस्थान बनाने के लिए उन्हें मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्य सचिव के. रामाकृष्णा राव ने हाल ही में राज्य स्तरीय सहकारिता विकास समिति की बैठक में इस बात पर जोर दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता श्री रामाकृष्णा राव ने केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार बुटानी के साथ मिलकर की। बैठक में भारत सरकार और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और राज्य भर में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में सहकारिता क्षेत्र के विस्तार और विकास की अपार संभावनाएं हैं, विशेषकर डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में, जहाँ ग्रामीण समुदायों के लिए पर्याप्त रोजगार और आय सृजन के अवसर पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने अधिकारियों से इन संस्थानों को अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ-साथ सहकारी गतिविधियों की क्षमता निर्माण और विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

सहकारिता क्षेत्र का विस्तार और आधुनिकीकरण

मुख्य सचिव के. रामाकृष्णा राव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य में एक मजबूत और जीवंत सहकारी आंदोलन है, जिसमें समावेशी आर्थिक विकास में योगदान करने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र समावेशी विकास को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को तदनुसार ऐसे प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहाँ बेहतर शासन, डिजिटल एकीकरण, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और क्षमता निर्माण के माध्यम से सहकारी समितियों को मजबूत किया जा सके। यह दृष्टिकोण सहकारिता को केवल कृषि तक सीमित न रखकर, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि हस्तशिल्प, लघु उद्योग और पर्यटन में भी इसकी भूमिका का विस्तार करेगा। कृषि सचिव सुरेंद्र मोहन ने सहकारिता क्षेत्र का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहकारी संस्थानों द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में 60,925 सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जो सहकारी आंदोलन की ताकत और व्यापक उपस्थिति को दर्शाती हैं।

PACS का डिजिटलीकरण और FPO में रूपांतरण

राज्य सरकार पारदर्शिता, दक्षता और सेवा वितरण में सुधार के लिए PACS के कंप्यूटरीकरण की केंद्र सरकार की पहल के साथ पूरी तरह से जुड़ी हुई है। यह कदम सहकारिता क्षेत्र को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने और किसानों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में विविधता लाने और उन्हें मजबूत करने के प्रयास के तहत, तेलंगाना सहकारी संघ 311 PACS को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) में विकसित कर रहा है। ये FPO किसानों को बाजारों तक बेहतर पहुंच, मूल्य संवर्धन और सामूहिक सौदेबाजी के अवसर प्राप्त करने में सक्षम बनाएंगे। FPO के माध्यम से किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। यह किसानों को सिर्फ उत्पादक से उद्यमी बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार आएगा।

नई सहकारिता नीति और भविष्य की दिशा

सरकार सहकारिता क्षेत्र के विकास और आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक राज्य सहकारिता नीति तैयार करने की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य पेशेवर प्रबंधन, वित्तीय स्थिरता, डिजिटल परिवर्तन और उभरते क्षेत्रों में सहकारी गतिविधियों के विस्तार को बढ़ावा देना है। यह नीति सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान करेगी, जिससे यह बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुकूल बन सके। इसमें नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने, युवाओं को सहकारिता से जोड़ने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्य सचिव रामाकृष्णा राव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि इन संस्थानों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यह नीतिगत ढांचा सहकारिता क्षेत्र को एक मजबूत और आत्मनिर्भर स्तंभ के रूप में स्थापित करेगा, जो राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। सरकार का मानना है कि इन पहलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा और जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त होगा।

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