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जर्जर सड़क-पुल पर अल्टीमेटम खत्म, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने किया चक्काजाम

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जर्जर सड़क-पुल पर अल्टीमेटम खत्म, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने किया चक्काजाम
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कोरबा जिले में जर्जर सड़क और क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत तथा नए निर्माण की मांग को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं और सैकड़ों ग्रामीणों ने आज सोमवार, 17 जुलाई को जोरदार चक्काजाम प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब प्रशासन को दिए गए 15 दिन के अल्टीमेटम की अवधि समाप्त हो गई, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित बघमरा गांव के पास सुबह 10 बजे से ही प्रदर्शनकारी एकत्रित होना शुरू हो गए थे, जिन्होंने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यातायात को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। यह विरोध स्थानीय लोगों की समस्याओं के प्रति सरकारी उदासीनता के खिलाफ बढ़ते आक्रोश का परिणाम है, जहां पिछले कई वर्षों से बुनियादी ढांचा बदहाल स्थिति में है।

अल्टीमेटम की अनदेखी और बढ़ता जन आक्रोश

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और स्थानीय ग्रामीणों ने पिछले दो सप्ताह पूर्व जिला प्रशासन को एक 15 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था, जिसमें मुख्य रूप से बघमरा से 5 किलोमीटर दूर स्थित हसदेव नदी पर बने पुराने और क्षतिग्रस्त पुल के पुनर्निर्माण तथा बघमरा से अमरकंटक चौक तक के 12 किलोमीटर लंबे सड़क खंड की तत्काल मरम्मत की मांग की गई थी। इस अल्टीमेटम में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि 15 दिनों के भीतर इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। अल्टीमेटम की अवधि कल रविवार को समाप्त हो गई, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या कार्ययोजना सामने नहीं आई। इसी अनदेखी के कारण आज ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क और पुल उनकी जीवनरेखा है, जिसके खराब होने से दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

बदहाल बुनियादी ढांचे से जूझता जनजीवन

बघमरा और आसपास के लगभग 20 से अधिक गांवों के लोग इस जर्जर सड़क और क्षतिग्रस्त पुल के कारण पिछले तीन वर्षों से भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। पुल की हालत इतनी खराब है कि उस पर से गुजरना हर पल खतरे से खाली नहीं होता। कई बार छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, जिनमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है और सड़क कीचड़ से भर जाती है, जिससे आवागमन लगभग ठप्प हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों को अस्पताल ले जाने और किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय व्यापारी भी व्यापार में घाटे की शिकायत कर रहे हैं, क्योंकि ग्राहकों का आना-जाना कम हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया है, जिससे उनके मन में गहरा रोष व्याप्त है।

प्रदर्शन का स्वरूप और प्रशासन की प्रतिक्रिया

आज के चक्काजाम में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष श्री संतोष देवांगन** के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाकर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की। उनकी तख्तियों पर "जर्जर सड़क नहीं चलेगी", "पुल बनाओ, जान बचाओ" और "प्रशासन होश में आओ" जैसे नारे लिखे हुए थे। इस चक्काजाम के कारण कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक श्री राजेश ठाकुर के निर्देश पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। स्थानीय एसडीएम श्री विवेक मिश्रा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जल्द ही उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और लिखित आश्वासन की मांग कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे और आगामी विधानसभा चुनावों** में इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।

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समाधान की राह और भविष्य की चुनौती

चक्काजाम प्रदर्शन दोपहर 2 बजे तक जारी रहा, जिसके बाद प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद इसे समाप्त किया गया। प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर सड़क और पुल के मरम्मत कार्य को शुरू करने का आश्वासन दिया है और एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करने की बात कही है, जो इन परियोजनाओं की निगरानी करेगी। हालांकि, ग्रामीणों और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचों की बदहाली और जन असंतोष की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है, जहां स्थानीय समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। अब देखना यह है कि प्रशासन अपने वादे पर कितना खरा उतरता है और कब तक ग्रामीणों को उनकी बुनियादी सुविधाएँ मिल पाती हैं।

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