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छत्तीसगढ़ में धान आकलन को AI-सैटेलाइट, किसानों को मिलेंगे बड़े लाभ

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छत्तीसगढ़ में धान आकलन को AI-सैटेलाइट, किसानों को मिलेंगे बड़े लाभ
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छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, अब धान की खेती का आकलन अत्यधिक सटीकता के साथ किया जाएगा। इस उद्देश्य से, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता हाल ही में संपन्न हुआ है, जिसका मुख्य लक्ष्य राज्य के लाखों धान उत्पादक किसानों को फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अन्य सरकारी योजनाओं का त्वरित और पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करना है। इस पहल से कृषि डेटा प्रबंधन में क्रांति आने की उम्मीद है, जिससे कृषि नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी हो सकेगा और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।

नई तकनीक से सटीक आकलन

छत्तीसगढ़, जिसे भारत का 'धान का कटोरा' कहा जाता है, में कृषि क्षेत्र की रीढ़ धान की खेती है। अब तक, धान के रकबे और उत्पादन का आकलन काफी हद तक पारंपरिक तरीकों पर आधारित रहा है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप और त्रुटियों की संभावना बनी रहती थी। लेकिन अब इस एमओयू के तहत, अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेजरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) तकनीकों का उपयोग करके धान की खेती का बेहद सटीक आकलन किया जाएगा। यह नई प्रणाली खेतों के वास्तविक समय के डेटा को एकत्र करेगी और उसका विश्लेषण करेगी। इससे न केवल धान के रकबे का सही पता चलेगा, बल्कि फसल की स्वास्थ्य स्थिति, संभावित उपज और यहां तक कि कीटों व बीमारियों के प्रकोप का भी अनुमान लगाया जा सकेगा।

आईआईटी कानपुर अपनी विशेषज्ञता के साथ उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण करने के लिए विशेष एल्गोरिदम विकसित करेगा, जबकि आईजीकेवी स्थानीय कृषि परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार इन मॉडलों को मान्य करने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस तकनीकी एकीकरण से यह सुनिश्चित होगा कि प्राप्त डेटा विश्वसनीय और क्रियाशील हो, जिससे कृषि विभाग और किसानों दोनों को लाभ मिल सके। यह पहल कृषि में डिजिटल क्रांति की ओर एक बड़ा कदम है, जो डेटा-संचालित निर्णय लेने को बढ़ावा देगी और कृषि उत्पादकता में वृद्धि करेगी।

किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ

इस तकनीकी उन्नयन का सीधा और सबसे बड़ा लाभ राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों को मिलेगा। सबसे पहले, फसल बीमा दावों का निपटान अधिक तेज़ी और निष्पक्षता से हो सकेगा। जब फसल को प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा या कीटों से नुकसान होता है, तो सटीक आकलन से प्रभावित किसानों को बिना किसी देरी के मुआवजा मिल पाएगा। पारंपरिक मूल्यांकन प्रक्रियाओं में अक्सर लगने वाले समय और विवादों को इस नई प्रणाली से काफी हद तक कम किया जा सकेगा, जिससे किसानों का विश्वास बढ़ेगा।

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दूसरा महत्वपूर्ण लाभ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की खरीद से संबंधित है। सटीक डेटा होने से सरकार को धान की वास्तविक उपज का अनुमान लगाने और खरीद केंद्रों पर बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में होने वाली समस्याओं में कमी आएगी और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा। इसके अतिरिक्त, यह प्रणाली किसानों को उनकी भूमि के स्वास्थ्य और फसल की स्थिति के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करेगी, जिससे वे अपने खेती के तरीकों में सुधार कर सकेंगे और अधिक उपज प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल कृषि ऋणों के वितरण और सब्सिडी योजनाओं को भी अधिक लक्षित और कुशल बनाएगी, जिससे वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक सहायता पहुंच सकेगी और कृषि क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता आएगी।

कृषि प्रशासन और नीति निर्माण में सुधार

यह एमओयू केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे कृषि प्रशासन और नीति निर्माण प्रक्रिया के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा। छत्तीसगढ़ सरकार को अब धान की खेती से संबंधित सटीक और अद्यतन डेटा एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। यह डेटा कृषि विभाग को विभिन्न योजनाओं जैसे बीज वितरण, उर्वरक सब्सिडी, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और भंडारण क्षमता के आकलन में अधिक प्रभावी ढंग से योजना बनाने में मदद करेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी विशेष क्षेत्र में फसल की पैदावार में गिरावट का अनुमान है, तो सरकार समय रहते हस्तक्षेप कर सकती है और किसानों को आवश्यक सहायता प्रदान कर सकती है।

यह प्रणाली कृषि संसाधनों के बेहतर आवंटन में भी सहायक होगी। पानी, बिजली और अन्य इनपुट का उपयोग अधिक कुशलता से किया जा सकेगा, जिससे कृषि की स्थिरता बढ़ेगी। इसके अलावा, यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करने और उनके अनुकूलन के लिए रणनीतियों को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आईआईटी कानपुर और आईजीकेवी के बीच यह सहयोग न केवल छत्तीसगढ़ में, बल्कि पूरे देश में कृषि प्रौद्योगिकी के विकास के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकता है, जिससे अन्य राज्यों को भी इसी तरह की पहल अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। यह पहल कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अंततः राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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