दिल्ली दौरे पर CM साय: जल शक्ति समिट में लेंगे हिस्सा, GDP पर बोले
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहाँ वे जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण विभागीय समिट में हिस्सा लेंगे। रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि इस समिट का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, सिंचाई के उन्नत तरीकों और पेयजल की उपलब्धता जैसे गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा करना है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे, जो देश की जल सुरक्षा नीतियों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भारत की मौजूदा आर्थिक प्रगति, विशेषकर वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की प्रभावशाली GDP वृद्धि, पर भी अपनी बात रखी, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम बताया। यह दौरा न केवल छत्तीसगढ़ के जल प्रबंधन प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है, बल्कि देश की समग्र आर्थिक दिशा पर मुख्यमंत्री के विचारों को साझा करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
जल शक्ति समिट: राष्ट्रीय जल सुरक्षा पर मंथन
दिल्ली में आयोजित होने वाली यह समिट जल शक्ति मंत्रालय के तत्वावधान में हो रही है, जिसका एजेंडा बेहद व्यापक और देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में देश भर से जल संसाधन विशेषज्ञ, नीति निर्माता और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में भूजल संवर्धन, वर्षा जल संचयन, नदियों को जोड़ने की परियोजनाएं, सिंचाई प्रणालियों का आधुनिकीकरण और हर घर नल से जल योजना की प्रगति जैसे विषय शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी जल संरक्षण को लेकर लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं, और इन कार्यों की विस्तृत जानकारी समिट में साझा की जाएगी। यह मंच राज्यों को अपनी सफलताओं और चुनौतियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे अन्य राज्य भी उनसे सीख ले सकें और अपनी नीतियों में सुधार कर सकें।
इस समिट का उद्देश्य जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित रणनीति तैयार करना है। जल एक ऐसा संसाधन है जिस पर कृषि, उद्योग और मानव जीवन की निर्भरता सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। ऐसे में, पानी की बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच, जल संरक्षण और उसका विवेकपूर्ण उपयोग देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार जल सुरक्षा को कितनी गंभीरता से ले रही है। इस तरह के आयोजनों से राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, जो बड़े पैमाने पर जल परियोजनाओं को लागू करने में सहायक होता है।
छत्तीसगढ़ की जल संरक्षण पहलें और राष्ट्रीय योगदान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार, नए तालाबों और जलाशयों के निर्माण, तथा सिंचाई दक्षता में सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार 'नरवा, गरवा, घुरवा, बारी' जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा दे रही है। 'नरवा' (नाला) कार्यक्रम के तहत नालों का जीर्णोद्धार और जल प्रवाह सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होता है और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिलता है।
समिट में छत्तीसगढ़ अपने अनुभवों और सफलताओं को प्रस्तुत करेगा, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन की रणनीतियों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। राज्य में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो कम पानी में अधिक फसल उत्पादन सुनिश्चित करती हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि राज्यों के जमीनी स्तर के अनुभव राष्ट्रीय नीतियों को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं। यह आदान-प्रदान न केवल छत्तीसगढ़ को अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने का अवसर देगा, बल्कि देश के जल सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
भारत की आर्थिक प्रगति: वैश्विक अशांति के बीच मजबूत वृद्धि
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर लगातार अशांति का वातावरण बना हुआ है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान शामिल हैं। इसके बावजूद, भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और अथक परिश्रम के कारण लगातार आर्थिक विकास कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने एक असाधारण उपलब्धि बताया। यह आंकड़ा दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर में से एक है और यह भारत की आर्थिक लचीलेपन और विकास क्षमता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने इस वृद्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और निवेश-अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों का सीधा परिणाम बताया। डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देने और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया है। 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर यह संकेत देती है कि भारत न केवल वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर रहा है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक नींव भी तैयार कर रहा है। यह वृद्धि रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आने वाले वर्षों में भी अपनी आर्थिक गति को बनाए रखेगा और विश्व पटल पर एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेगा।
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