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मयूरभंज में बाढ़ का कहर: 18 ब्लॉक जलमग्न, दो महिलाओं की मौत

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मयूरभंज में बाढ़ का कहर: 18 ब्लॉक जलमग्न, दो महिलाओं की मौत
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ओडिशा के मयूरभंज जिले में 29 अगस्त, 2026 से लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने भयावह बाढ़ का रूप ले लिया है, जिसके चलते जिले के 18 ब्लॉक और बारीपदा नगरपालिका क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण हो रही इस अनवरत वर्षा ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक दो महिलाओं की दुखद मौत हो चुकी है, जिनकी पहचान लक्ष्मी सिंह (50) और सिंगा मुर्मू (45) के रूप में हुई है, जब उनके कच्चे घरों की दीवारें बारिश के कारण ढह गईं। जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है, जिसमें 2,076 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

बाढ़ का विकराल रूप और जनजीवन पर असर

मयूरभंज जिले में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश ने एक गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। नदियों और स्थानीय नालों का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है और कई गांव बाहरी दुनिया से कट गए हैं। सड़कें और पुल पानी में डूब गए हैं, जिससे परिवहन बाधित हो गया है और दैनिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। स्कूलों और बाजारों को बंद करना पड़ा है, जबकि कृषि भूमि भी पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने हाल के वर्षों में ऐसी भीषण बाढ़ नहीं देखी है, और यह स्थिति उनके लिए एक बड़ा सदमा है। बिजली आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में बाधित है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पेयजल की समस्या भी सामने आने लगी है, क्योंकि कई हैंडपंप और कुएं बाढ़ के पानी में डूब गए हैं या दूषित हो गए हैं।

दो दर्दनाक मौतें: ढही दीवारों का कहर

इस विनाशकारी बाढ़ ने दो परिवारों से उनके सदस्यों को छीन लिया। पहली घटना बंगिरिपोसी ब्लॉक के भूलनपुर गांव में हुई, जहाँ 50 वर्षीय लक्ष्मी सिंह अपने बारिश से भीगे घर से सामान निकालने की कोशिश कर रही थीं। तभी अचानक उनके कच्चे मकान की मिट्टी की दीवार ढह गई और वह मलबे के नीचे दब गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना अत्यंत हृदय विदारक है, क्योंकि वह अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रही थीं। दूसरी दुखद घटना तिरिंग ब्लॉक के मटकमाडीही गांव में घटी। यहाँ 45 वर्षीय सिंगा मुर्मू देर रात अपने परिवार के साथ सो रही थीं, तभी उनके घर की कच्ची दीवार ढह गई। मलबे में दबने से उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई। इन घटनाओं ने कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की भेद्यता को उजागर किया है, खासकर ऐसे मौसम में। पुलिस और अग्निशमन सेवा के कर्मचारियों ने दोनों शवों को बरामद कर लिया है और इन घटनाओं की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य

जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर राहत अभियान शुरू किया है। सबसे ज्यादा प्रभावित बड़साही, बेटनोटी, सरसकणा और बारीपदा जैसे क्षेत्रों में 2 ओडीआरएएफ (ODRAF) की टीमें और 13 अग्निशमन इकाइयां तैनात की गई हैं। इन बचाव दलों ने अथक प्रयास करते हुए अब तक 2,076 से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकालकर 11 विभिन्न राहत शिविरों में पहुंचाया है। इन शिविरों में विस्थापित लोगों को पका हुआ भोजन, सूखे राशन के पैकेट और पीने का शुद्ध पानी लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने स्वास्थ्य और पशुधन सहायता भी शुरू की है, जिसमें बेघर हुए परिवारों को चिकित्सा सहायता और उनके पशुओं के लिए चारा व दवाएं प्रदान की जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महामारी फैलने की आशंका को देखते हुए, चिकित्सा टीमों को भी तैनात किया गया है जो लगातार स्वास्थ्य जांच कर रही हैं।

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आगे की चुनौतियाँ और सतर्कता

मयूरभंज जिले में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, और आने वाले दिनों में और बारिश की आशंका है, जिससे चुनौतियां बढ़ सकती हैं। प्रशासन को न केवल तात्कालिक राहत पर ध्यान केंद्रित करना होगा, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास और क्षति आकलन पर भी विचार करना होगा। बाढ़ के कारण हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कृषि, बुनियादी ढांचे और व्यक्तिगत संपत्ति को भारी क्षति पहुंची है। विशेषज्ञों ने जलजनित बीमारियों के फैलने की संभावना पर चिंता व्यक्त की है, जिसके लिए व्यापक स्वास्थ्य अभियान चलाने की आवश्यकता होगी। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करने की अपील की है। आने वाले समय में, सरकार को ऐसे आपदा-प्रवण क्षेत्रों में स्थायी समाधान खोजने की दिशा में काम करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

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