छत्तीसगढ़ 4 मिनट पढ़ें

एनआईबीएसएम में सामुदायिक कम्पोस्टिंग पर जनभागीदारी जागरूकता अभियान | Raipur News Today

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
एनआईबीएसएम में सामुदायिक कम्पोस्टिंग पर जनभागीदारी जागरूकता अभियान | Raipur News Today
छत्तीसगढ़

आज की रायपुर खबर के अनुसार... स्वच्छता ही सेवा अभियान-2026 के अंतर्गत आईसीएआरदृराष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान रायपुर द्वारा संस्थान के अनुसंधान फार्म स्थित कम्पोस्ट यूनिट में “जनभागीदारी जागरूकता अभियान - ग्राम समुदाय के लिए कम्पोस्टिंग” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थान के फार्म श्रमिकों एवं कर्मचारियों को वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक स्तर पर कम्पोस्ट निर्माण तथा वर्मी कम्पोस्टिंग के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छ गांव, खुले में कचरा डालने की प्रवृत्ति में कमी, कृषि अवशेषों के पुनर्चक्रण तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को घरों से निकलने वाले जैविक कचरे तथा खेतों से प्राप्त कृषि अवशेषों को अलग-अलग एकत्रित कर उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने तथा उन्हें उपयोगी जैविक खाद में परिवर्तित करने की जानकारी दी गई। सामुदायिक कम्पोस्ट पिट एवं वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने और उनके प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। बताया गया कि किसान एवं ग्रामीण समुदाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक सामग्री का उपयोग कर कम लागत में कम्पोस्टिंग इकाइयां स्थापित कर सकते हैं।

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. एस. के. शर्मा ने विभिन्न प्रकार की कम्पोस्ट तैयार करने की विधियों तथा जैविक अपशिष्ट के प्रभावी अपघटन के लिए आवश्यक प्रबंधन तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर छोटे कम्पोस्टिंग यूनिट स्थापित करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने टिकाऊ एवं जैविक खेती में वर्मी कम्पोस्ट के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा जैविक संसाधनों के पुनर्चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने वर्मीवॉश के निर्माण एवं कृषि में इसके उचित उपयोग के बारे में भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में “अपना कचरा, अपनी खाद - स्वच्छ गांव, उन्नत किसान” का संदेश दिया गया तथा सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से कचरे को कृषि के लिए उपयोगी संसाधन में बदलने का आह्वान किया गया।

स्रोत: जनसंपर्क विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया