छत्तीसगढ़ 8 मिनट पढ़ें

छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग रिकॉर्ड 6300 मेगावाट, एक्सचेंज से खरीद

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
2 व्यूज़
छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग रिकॉर्ड 6300 मेगावाट, एक्सचेंज से खरीद
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में बिजली की मांग ने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जो 6300 मेगावाट के अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गई है। भीषण गर्मी के प्रकोप, कृषि क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता मांग को पूरा करने में अक्षम साबित हो रही है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) को ऊंची दरों पर पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है, ताकि राज्य के उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यह अचानक बढ़ी हुई मांग छत्तीसगढ़ की ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

रिकॉर्ड तोड़ मांग और उसके कारण

छत्तीसगढ़ में इस वर्ष गर्मी का प्रकोप असामान्य रूप से अधिक रहा है, जिसके कारण बिजली की मांग में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। राज्य में बिजली की औसत दैनिक मांग सामान्यतः 4000 से 5000 मेगावाट के बीच रहती है, लेकिन हाल ही में यह आंकड़ा 6300 मेगावाट तक पहुंच गया है, जो राज्य के इतिहास में एक नया कीर्तिमान है। इस रिकॉर्ड तोड़ मांग के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण भीषण गर्मी है, जिसके चलते घरों और कार्यालयों में एयर कंडीशनर तथा कूलरों का उपयोग कई गुना बढ़ गया है। दूसरा प्रमुख कारण कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली पंपों का व्यापक उपयोग है, क्योंकि सामान्य से कम बारिश या भूजल स्तर में गिरावट के कारण किसान अधिक बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि भी बिजली की मांग में इजाफे का एक महत्वपूर्ण कारक है। इस्पात, सीमेंट और अन्य उद्योगों में उत्पादन बढ़ने से बिजली की खपत बढ़ी है। गर्मी के दिनों में शाम के समय पीक आवर्स में मांग और भी बढ़ जाती है, जिससे वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

एक्सचेंज से महंगी बिजली की खरीद

जब राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता और केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली मांग को पूरा करने में कम पड़ जाती है, तब वितरण कंपनियों को पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदने का सहारा लेना पड़ता है। छत्तीसगढ़ इस समय इसी स्थिति का सामना कर रहा है। दैनिक आधार पर 200 से 300 मेगावाट तक की अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता पड़ रही है, जिसे एक्सचेंज से खरीदा जा रहा है। एक्सचेंज में बिजली की कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर निर्धारित होती हैं, और उच्च मांग के समय ये कीमतें काफी बढ़ जाती हैं। सूत्रों के अनुसार, इस समय एक्सचेंज में बिजली की कीमत 10 से 12 रुपए प्रति यूनिट या उससे भी अधिक तक पहुंच रही है, जबकि राज्य की अपनी उत्पादित बिजली की लागत काफी कम होती है। इस महंगी खरीद से राज्य विद्युत वितरण कंपनी पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर अंततः उपभोक्ताओं या राज्य सरकार के खजाने पर पड़ सकता है। यह स्थिति राज्य के ऊर्जा बजट के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर रही है।

राज्य की उत्पादन क्षमता और भविष्य की चुनौतियाँ

छत्तीसगढ़ राज्य अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी स्वयं की बिजली उत्पादन इकाइयों पर निर्भर करता है, जिनमें प्रमुख रूप से कोरबा, मड़वा और अटल नगर (नया रायपुर) स्थित ताप विद्युत संयंत्र शामिल हैं। इन संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता लगभग 2984.7 मेगावाट है। इसके अतिरिक्त, राज्य को केंद्रीय पूल और अन्य स्रोतों से भी बिजली प्राप्त होती है। हालांकि, वर्तमान में 6300 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले यह क्षमता अपर्याप्त साबित हो रही है। भविष्य में, राज्य को बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण की गति और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण बिजली की मांग में और वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। यह आवश्यक है कि राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा में निवेश बढ़ाए, ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके और एक स्थायी ऊर्जा समाधान मिल सके। इसके साथ ही, ऊर्जा संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देना और बिजली के बुनियादी ढांचे का उन्नयन करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

उपभोक्ताओं पर संभावित असर और सरकारी प्रयास

एक्सचेंज से महंगी बिजली की लगातार खरीद का सीधा असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो बिजली दरों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, राज्य सरकार और CSPDCL फिलहाल उपभोक्ताओं पर इस बोझ को सीधे तौर पर डालने से बचने का प्रयास कर रहे हैं। ऊर्जा विभाग के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसमें तकनीकी खामियों को दूर करना, पारेषण हानियों को कम करना और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है। राज्य सरकार दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति बनाने पर भी विचार कर रही है, जिसमें नए बिजली संयंत्रों की स्थापना या मौजूदा संयंत्रों की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ स्मार्ट ग्रिड तकनीकों का उपयोग शामिल है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि राज्य के नागरिकों और उद्योगों को विश्वसनीय और सस्ती बिजली मिलती रहे, विशेषकर ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम संबंधी चरम घटनाएं अधिक आम होती जा रही हैं।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया