रामचरितमानस से मैनेजमेंट तक: डॉ. अनूप ‘अर्पण’ की पुस्तक ने खींचा सबका ध्यान
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश। भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रबंधन के सिद्धांतों को जोड़ने वाली डॉ. अनूप ‘अर्पण’ की पुस्तक ‘श्री रामचरितमानस: ए गाइड टू मैनेजमेंट एंड लीडरशिप’ इन दिनों चर्चा में है। राष्ट्रीय पुस्तक मेला 2026 के अंतर्गत प्रदर्शित इस पुस्तक में रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से प्रबंधन, नेतृत्व, संवाद और टीमवर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समझाने का प्रयास किया गया है।
मूल रूप से लखनऊ निवासी डॉ. अनूप ‘अर्पण’ की यह कृति भारतीय परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के बीच एक सेतु के रूप में प्रस्तुत की गई है। पुस्तक में बताया गया है कि नेतृत्व और प्रबंधन से जुड़े कई सिद्धांत भारतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परंपराओं से भी सीखे जा सकते हैं।
पुस्तक में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से धैर्य, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन जैसे गुणों को रेखांकित किया गया है। वहीं, माता सीता के चरित्र के जरिए गरिमा, नैतिक मूल्यों और मूल्य आधारित नेतृत्व की अवधारणा को समझाने का प्रयास किया गया है। हनुमान जी के उदाहरणों से प्रभावी संचार, समर्पण, टीमवर्क और संवाद की महत्ता को सामने रखा गया है।
यह पुस्तक विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, प्रबंधन के क्षेत्र से जुड़े लोगों और कॉर्पोरेट नेतृत्व में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक एवं साहित्यिक ज्ञान को समकालीन कार्यस्थल और नेतृत्व की चुनौतियों से जोड़ना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुस्तक को उसकी विशिष्टता के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिला है। राष्ट्रीय पुस्तक मेले में इसके प्रदर्शन से भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित प्रबंधन संबंधी साहित्य को पाठकों के सामने लाने का अवसर मिला है।
डॉ. अनूप ‘अर्पण’ इससे पहले भी कई पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं, जिनका प्रकाशन हो चुका है। उनकी यह कृति भारतीय ग्रंथों में निहित जीवन मूल्यों और नेतृत्व संबंधी विचारों को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने की दिशा में एक प्रयास है।