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सोनम वांगचुक की चेतावनी: 'अघोषित आपातकाल', प्रदर्शनकारी रिहा हों रविवार तक

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सोनम वांगचुक की चेतावनी: 'अघोषित आपातकाल', प्रदर्शनकारी रिहा हों रविवार तक
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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में देश के हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'अघोषित आपातकाल' करार दिया है। उन्होंने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए एक प्रदर्शन के दौरान हुई गिरफ्तारियों को लेकर सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। वांगचुक ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए सभी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को रविवार (11 अक्टूबर) तक रिहा किया जाए, अन्यथा वह आमरण अनशन या पैदल मार्च जैसे बड़े कदम उठाने पर विचार करेंगे। यह मामला तब सामने आया जब मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है, जबकि खुद फिलहाल लद्दाख में अपने अन्य कार्यों में व्यस्त हैं।

अघोषित आपातकाल की चेतावनी और अनशन का संकल्प

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से पहले उन्होंने एकता और शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि एक इतने बड़े लोकतंत्र में इस तरह के 'अघोषित आपातकाल' जैसे हालात बन जाएंगे। वांगचुक ने बताया कि आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए कई नेता मौजूद थे, लेकिन बाद में उन्हें उनकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली, जिससे उन्हें गहरा धक्का लगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को जल्द से जल्द रिहा कर दिया जाएगा। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो उन्हें आंदोलन का अगला रास्ता चुनने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनकी यह चेतावनी भारत में नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ सकती है। यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक ने किसी गंभीर मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की हो; वह लद्दाख के पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों के लिए लगातार संघर्षरत रहे हैं।

दिल्ली में प्रदर्शन और गिरफ्तारियों का प्रकरण

दिल्ली में यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन द्वारा आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे कई नागरिकों के मताधिकार पर संकट आ गया है। शनिवार को जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके सहित कई अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का दावा किया गया है। इन गिरफ्तारियों ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ियों और इन गिरफ्तारियों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है, लेकिन इस घटना ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिक विरोध प्रदर्शनों के अधिकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और वांगचुक की वैचारिक भूमिका

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। उन्होंने सरकार से गिरफ्तार किए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग की है। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक भले ही दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन में शारीरिक रूप से शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने आंदोलन के प्रति अपना वैचारिक समर्थन पूरी तरह से व्यक्त किया है। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से गांधीवादी अहिंसा के रास्ते पर चलने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की है। वर्तमान में, वांगचुक लद्दाख में अपने महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त हैं। वह वहां सर्दियों की तैयारियों, कृत्रिम ग्लेशियरों के निर्माण और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के खतरों को कम करने जैसे पर्यावरणीय और सामाजिक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है और सोनम वांगचुक अपनी चेतावनी पर आगे क्या फैसला लेते हैं। यह स्थिति देश में विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और सरकार की प्रतिक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण संतुलन बिंदु पर खड़ी है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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