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भारतमाला घोटाला: ED ने ₹9.83 करोड़ के मुख्य आरोपी को दबोचा

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भारतमाला घोटाला: ED ने ₹9.83 करोड़ के मुख्य आरोपी को दबोचा
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🔴 ब्रेकिंग न्यूज़।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारे के भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में एक प्रमुख आरोपी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ₹9.83 करोड़ के कथित धोखाधड़ी से संबंधित है, जिसमें भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर और मुआवजे के दावों को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। रायपुर जिले के अभनपुर निवासी जय प्रकाश गांधी को ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। यह जांच छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी से उपजी है, जिसमें राजमार्ग निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजा भुगतान में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।

घोटाले का पर्दाफाश और गिरफ्तारी

ईडी की जांच के अनुसार, जय प्रकाश गांधी पर परिवार के सदस्यों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। उन्होंने कथित तौर पर प्रस्तावित राजमार्ग के अधिसूचित संरेखण के भीतर आने वाली भूमि खरीदी और बाद में इसे कई छोटे भूखंडों में विभाजित कर दिया, जिनमें से प्रत्येक का माप 500 वर्ग मीटर से कम था। जांचकर्ताओं को संदेह है कि भूमि को जानबूझकर इस तरह से उपविभाजित किया गया था ताकि मुआवजे के मानदंडों का लाभ उठाया जा सके और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से काफी अधिक भुगतान प्राप्त किया जा सके, जो सामान्य अधिग्रहण प्रक्रियाओं के तहत संभव नहीं होता। इस हेरफेर के कारण अभियुक्तों को करोड़ों रुपये का मुआवजा प्राप्त करने में सफलता मिली, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। ईडी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है क्योंकि यह सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करता है।

धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली और वित्तीय हेरफेर

घोटाले की जड़ें भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रियाओं और मुआवजे के नियमों में निहित हैं। ईडी का आरोप है कि जय प्रकाश गांधी और उनके सहयोगियों ने उन भूमियों को निशाना बनाया जो भविष्य में राजमार्ग के लिए अधिग्रहित की जानी थीं। उन्होंने इन भूमियों को कम कीमत पर खरीदा और फिर उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया। यह रणनीति इसलिए अपनाई गई क्योंकि छोटे भूखंडों के लिए मुआवजे की दरें अक्सर बड़े भूखंडों की तुलना में अधिक होती हैं, या फिर उन्हें अलग-अलग मालिकों के रूप में प्रस्तुत करके कई दावों को सक्षम बनाया जा सकता है। इस तरह, एक ही बड़ी भूमि के लिए कई गुना अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया। यह धोखाधड़ी केवल भूमि के उपविभाजन तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें भूमि रिकॉर्ड में जानबूझकर किए गए बदलाव और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल भी शामिल हो सकता है ताकि मुआवजे के दावों को वैध दिखाया जा सके। यह एक गहरी साजिश का हिस्सा था जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत शामिल होने का संदेह है।

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मनी लॉन्ड्रिंग और आगे की जांच

ईडी के अधिकारी इस मामले में शामिल सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों की कथित भूमिका की जांच कर रहे हैं। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू पैसे के लेन-देन का पता लगाना है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कथित धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कैसे उत्पन्न किया गया, उसे कैसे छुपाया गया (लेयरिंग) और अंततः उसका उपयोग कैसे किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग जांच का उद्देश्य अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान करना और उसे जब्त करना है। ईडी इस बात पर भी गौर कर रही है कि क्या इस घोटाले में और भी लोग शामिल थे और क्या यह केवल एक आइसोलेटेड घटना थी या एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा। यह जांच वित्तीय अनियमितताओं और संपत्ति के अवैध हस्तांतरण पर केंद्रित है, जो PMLA के तहत आते हैं। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इन अवैध तरीकों से अर्जित धन का निवेश कहाँ-कहाँ किया गया है।

छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण मामला

भारतमाला मुआवजा घोटाला हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में जांच किए गए सबसे महत्वपूर्ण भूमि अधिग्रहण धोखाधड़ी मामलों में से एक के रूप में उभरा है। कई एजेंसियां अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले किए गए भूमि लेनदेन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा सकती है और विकास कार्यों को बाधित कर सकती है। इस मामले में जय प्रकाश गांधी की गिरफ्तारी जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और उम्मीद है कि इससे इस बड़े घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों और उनकी भूमिकाओं का भी खुलासा होगा। यह मामला पूरे देश में भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।

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