वास्तु में गणेश जी का महत्व: राणा सिकंदर ने बताए स्थापना और शुभता के खास नियम | Raipur News Today
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आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर। वास्तु शास्त्र में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, शुभता और विघ्नों के निवारण का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है। वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर के अनुसार, घर या कार्यस्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते समय केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि स्थान, स्वच्छता और प्रतिमा के स्वरूप का भी ध्यान रखना चाहिए।
भगवान गणेश क्यों माने जाते हैं शुभता के प्रतीक?
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। उनकी पूजा शुभ कार्यों की शुरुआत में की जाती है। वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की प्रतिमा घर या कार्यालय में सकारात्मक और शांत वातावरण का प्रतीक मानी जाती है। गणेश जी का स्वरूप बुद्धि, विवेक, धैर्य और बाधाओं को दूर करने की भावना से जुड़ा हुआ है।
राणा सिकंदर के अनुसार, किसी भी स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले उस जगह को साफ-सुथरा रखना जरूरी है। प्रतिमा को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां उसका सम्मान बना रहे और उसके आसपास अनावश्यक सामान जमा न हो।
घर में कहां रख सकते हैं गणेश जी की प्रतिमा?
घर के पूजा स्थल में भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक स्थापित किया जा सकता है। प्रवेश क्षेत्र के संबंध में भी वास्तु में अलग-अलग मान्यताएं हैं, इसलिए घर की संरचना और दिशा को देखते हुए वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित माना जाता है।
प्रतिमा के सामने नियमित रूप से दीपक जलाना, पूजा करना और स्थान की स्वच्छता बनाए रखना धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कार्यालय और व्यापारिक स्थल पर गणेश जी का महत्व
व्यवसायिक स्थानों पर भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है। गणेश जी को बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना जाता है, इसलिए कार्यालय में उनकी उपस्थिति शुभ वातावरण और सकारात्मक सोच से जोड़ी जाती है।
राणा सिकंदर बताते हैं कि वास्तु का उद्देश्य केवल किसी वस्तु को किसी दिशा में रखना नहीं है। इसके साथ स्थान की स्वच्छता, व्यवस्थित वातावरण और सकारात्मक सोच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गणेश जी की प्रतिमा चुनते समय रखें ध्यान
गणेश जी की प्रतिमा खरीदते या स्थापित करते समय उसके स्वरूप और स्थान का ध्यान रखना चाहिए। घर के लिए शांत एवं सौम्य स्वरूप वाली प्रतिमा को प्राथमिकता दी जा सकती है। प्रतिमा को ऐसी जगह नहीं रखना चाहिए जहां पैर लगने, गिरने या उसके आसपास अव्यवस्था होने की संभावना हो।
गणेश जी की सूंड की दिशा और प्रतिमा के विभिन्न स्वरूपों को लेकर वास्तु में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इसलिए किसी विशेष दिशा या स्वरूप को सभी घरों के लिए समान नियम मानने के बजाय स्थान की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
वास्तु में गणेश जी का व्यापक महत्व
राणा सिकंदर के अनुसार, भगवान गणेश केवल विघ्नहर्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक भी हैं। इसलिए उनकी प्रतिमा को घर या कार्यालय में श्रद्धा और उचित स्थान के साथ स्थापित करना वास्तु एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
वास्तु शास्त्र में किसी भी उपाय का उद्देश्य व्यक्ति के आसपास के वातावरण को अधिक व्यवस्थित, सकारात्मक और संतुलित बनाना है। भगवान गणेश की प्रतिमा इसी सकारात्मक भावना का प्रतीक बन सकती है।
वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर रायपुर के वास्तु सलाहकार हैं, जो 45 देवता वास्तु पद्धति से बिना तोड़फोड़ वास्तु समाधान देते हैं। उनके बारे में विस्तार से जानें: वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर – प्रोफ़ाइल | ऑनलाइन वास्तु परामर्श: vastuguruji.in