राज्यपाल डेका ने KTUJM में AI शोध केंद्र, कन्या छात्रावास का किया शुभारंभ
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रायपुर, 07 सितंबर, 2026: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने आज राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTUJM) का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय में अकादमिक गुणवत्ता, समग्र विकास और विद्यार्थियों के शैक्षणिक उन्नयन पर विशेष जोर दिया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक एआई एवं मीडिया शोध केंद्र और नवपरिवर्तित सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का विधिवत शुभारंभ किया, जो विश्वविद्यालय के शैक्षिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और उनके साथ बिताए अपने अनुभव तथा उनके प्रेरणादायी प्रसंगों को भी साझा किया, जिससे उपस्थित छात्रों और शिक्षकों को अमूल्य सीख मिली।
पत्रकारिता शिक्षा में AI का बढ़ता महत्व
राज्यपाल रमेन डेका द्वारा मधुकर खेर मल्टीमीडिया भवन में स्थापित एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का शुभारंभ, सूचना-संचार प्रौद्योगिकी क्रांति के इस दौर में पत्रकारिता के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केंद्र मीडिया अनुसंधान के क्षेत्र में आधुनिक प्रविधियों के उन्नयन और प्रोत्साहन के लिए समर्पित होगा। सूचना प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने राज्यपाल महोदय को इस अत्याधुनिक केंद्र की अकादमिक एवं शोध गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह केंद्र छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर समाचार संकलन, विश्लेषण और प्रस्तुतिकरण में दक्षता हासिल करने में मदद करेगा। यह पहल पत्रकारिता के छात्रों को भविष्य की मीडिया चुनौतियों का सामना करने और नवाचारों को अपनाने के लिए तैयार करेगी, जिससे वे फेक न्यूज और गलत सूचनाओं के दौर में सटीक और विश्वसनीय पत्रकारिता कर सकें।
नारी शिक्षा और सशक्तिकरण की नई दिशा
विश्वविद्यालय में नवपरिवर्तित सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का नामकरण नारी शिक्षा, उत्थान और सशक्तिकरण की अग्रणी प्रतीक सावित्रीबाई फुले की स्मृति में किया गया है। राज्यपाल डेका ने जोर देकर कहा कि इस छात्रावास में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं से छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल से आने वाली छात्राओं को मीडिया शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और वे अपने करियर में सफलता हासिल कर सकेंगी। यह छात्रावास न केवल छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें एक ऐसा वातावरण भी देगा जहाँ वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो छात्राओं को पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
विश्वविद्यालय का विजन और अकादमिक प्रगति
विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस सभागार में राज्यपाल का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने विश्वविद्यालय की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विगत अकादमिक सत्र की तुलना में इस वर्ष एडमिशन संख्या में 50 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो मात्र एक संख्या नहीं, बल्कि लोगों का विश्वविद्यालय के प्रति बढ़ता विश्वास है। कुलपति ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के मूल मंत्र “ट्रांसफॉर्मेशन विदाउट ट्रांजैक्शन” अर्थात् न्यूनतम संसाधन में अधिकतम परिवर्तन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनका विश्वविद्यालय भले ही आकार में छोटा है, परन्तु वे “लघुता में भव्यता” के सूत्र पर कार्यरत हैं। डॉ. दयाल ने विश्वविद्यालय के तीन प्रमुख संकल्प भी साझा किए: हर छात्र हुनरमंद होगा, हर छात्र संस्कारयुक्त होगा और यहाँ की हर गतिविधि में “राष्ट्र प्रथम” होगा। यह विजन छात्रों को न केवल पेशेवर रूप से सक्षम बनाएगा, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना से भी ओत-प्रोत करेगा।
राज्यपाल का छात्रों को पत्रकारिता धर्म पर मार्गदर्शन
मीडिया विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधा संवाद करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने पत्रकारिता के छात्रों की महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के छात्र होने के नाते सत्य को उद्घाटित करने की जिम्मेदारी समाज ने उनके कंधों पर सौंपी है। उन्होंने छात्रों को मीडिया शिक्षा के दौरान पत्रकारिता को प्रभावित करने वाली विभिन्न शक्तियों, जैसे टीआरपी की दौड़, विज्ञापन के दबाव सहित "स्लिप ऑफ टंग्स" इत्यादि से होने वाली छोटी-बड़ी गलतियों पर ध्यान से अध्ययन करने की सलाह दी। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भविष्य की अपनी पेशेवर जिंदगी में आने वाली चुनौतियों से बहादुरी से सामना करने का आह्वान किया। उन्होंने सोशल मीडिया द्वारा प्रसारित अगंभीर और अपुष्ट नकारात्मक खबरों से निपटने को भी उनकी जवाबदेही बताया। डेका ने इस बात पर जोर दिया कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी समाज में एक विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है, और इसकी प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी।
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