देश 8 मिनट पढ़ें

भारत NCAP 2.0: अक्टूबर 2027 से बदलेंगे गाड़ियों की सुरक्षा के नियम

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
8 व्यूज़
भारत NCAP 2.0: अक्टूबर 2027 से बदलेंगे गाड़ियों की सुरक्षा के नियम
देश

भारत में वाहन सुरक्षा मानकों को नया आयाम देने की तैयारी हो चुकी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने SIAM के 66वें वार्षिक सम्मेलन में संकेत दिया है कि देश में अक्टूबर 2027 से भारत एनकैप 2.0 को लागू किया जाएगा। यह नई प्रणाली मौजूदा सुरक्षा मूल्यांकन पद्धतियों को पूरी तरह से बदल देगी, जहां अब तक गाड़ियों की सुरक्षा केवल टक्कर के समय मिलने वाली मजबूती और क्रैश टेस्ट में मिली 5-स्टार रेटिंग तक सीमित थी। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना और वाहनों को दुर्घटना से पहले, उसके दौरान और बाद में भी यात्रियों व पैदल यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है, जिससे देश में हर साल होने वाली हजारों मौतों पर अंकुश लगाया जा सके।

सुरक्षा के नए आयाम: प्री-क्रैश, क्रैश और पोस्ट-क्रैश

भारत एनकैप 2.0 के तहत, गाड़ियों की सुरक्षा को तीन अलग-अलग और महत्वपूर्ण चरणों में आंका जाएगा, जो मौजूदा 'क्रैश टेस्ट' केंद्रित मूल्यांकन से कहीं अधिक व्यापक होगा। पहला चरण 'हादसे से पहले' की सुरक्षा पर केंद्रित है, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या कार में ऐसी आधुनिक सेंसर या अलर्ट तकनीक मौजूद है जो दुर्घटना को होने से पहले ही रोक सके। इसमें ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) जैसे एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीकों का मूल्यांकन किया जाएगा, जो संभावित खतरों से आगाह करती हैं या खुद ही कार्रवाई करती हैं।

दूसरा चरण 'हादसे के दौरान' की सुरक्षा को मापेगा, जिसमें न सिर्फ गाड़ी में बैठे यात्रियों की सुरक्षा बल्कि सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों (Pedestrians) की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस चरण में गाड़ी के बाहरी डिजाइन, एयरबैग की संख्या और गुणवत्ता जैसे पारंपरिक क्रैश टेस्ट पहलुओं के साथ-साथ पैदल यात्री सुरक्षा के लिए हुड डिजाइन का भी मूल्यांकन होगा। अंतिम और तीसरा चरण 'हादसे के बाद' की सुरक्षा पर केंद्रित है। इसमें यह देखा जाएगा कि दुर्घटना के बाद घायलों को गाड़ी से बाहर निकालना कितना आसान है और उन्हें कितनी तेजी से डॉक्टरी मदद मिल सकती है। इस पोस्ट-क्रैश रेस्क्यू प्रक्रिया को भी रेटिंग का हिस्सा बनाया जाएगा, जिसमें ऑटोमेटिक इमरजेंसी कॉल सिस्टम (eCall) जैसे कारक शामिल होंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि कारें केवल टक्कर झेलने में ही नहीं, बल्कि दुर्घटना के परिणामों को कम करने में भी सक्षम हों।

सड़क हादसों पर लगाम और सरकार का लक्ष्य

भारत में सड़क सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। देश में हर साल होने वाले लगभग 5 लाख सड़क हादसों और उनमें जाने वाली करीब 1.80 लाख जानों को देखते हुए भारत एनकैप 2.0 को लागू करने का यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इन भयावह आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी लाना है, जिसके लिए वाहनों को शुरुआती स्तर पर ही अधिक सुरक्षित बनाना आवश्यक है। वर्तमान में, कई उपभोक्ता कार खरीदते समय मुख्य रूप से माइलेज और डिजाइन पर ध्यान देते हैं, और सुरक्षा को अक्सर केवल 'क्रैश टेस्ट' में मिली रेटिंग तक सीमित मानते हैं। यह नई प्रणाली इस धारणा को चुनौती देगी और सुरक्षा को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए प्रेरित करेगी।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

नितिन गडकरी के अनुसार, आधुनिक सुरक्षा प्रौद्योगिकियों को वाहन डिजाइन और निर्माण के हर चरण में एकीकृत करना ही सड़क हादसों को कम करने का स्थायी तरीका है। भारत एनकैप 2.0 के माध्यम से, सरकार न केवल निर्माताओं को बेहतर और सुरक्षित वाहन बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षा के महत्व के बारे में शिक्षित कर रही है। नई रेटिंग प्रणाली के सभी पहलुओं को शामिल करने से ऑटोमोबाइल उद्योग सुरक्षा नवाचारों में निवेश करने के लिए प्रेरित होगा। अंततः, इसका परिणाम सड़कों पर चलने वाले अधिक सुरक्षित वाहनों और सड़क पर होने वाली मौतों व चोटों की संख्या में कमी के रूप में सामने आएगा।

ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ताओं पर असर

भारत एनकैप 2.0 का लागू होना भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों और निर्माताओं दोनों के लिए दूरगामी प्रभाव डालेगा। उपभोक्ताओं के लिए, कार खरीदने का निर्णय अब केवल माइलेज, डिजाइन और क्रैश टेस्ट रेटिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें वाहन में उपलब्ध एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), पैदल यात्री सुरक्षा फीचर्स और आपातकालीन बचाव प्रणालियों पर भी विचार करना होगा। इससे जागरूक उपभोक्ताओं की एक नई पीढ़ी तैयार होगी जो सुरक्षा को एक समग्र पैकेज के रूप में देखेगी। यह बदलाव उन्हें उन वाहनों का चयन करने के लिए प्रेरित करेगा जो दुर्घटनाओं को रोकने और उनके परिणामों को कम करने में अधिक प्रभावी हैं।

ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए, यह एक महत्वपूर्ण चुनौती और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। निर्माताओं को अपने शोध और विकास में भारी निवेश करना होगा ताकि वे नए सुरक्षा मानकों को पूरा कर सकें। उन्हें प्री-क्रैश निवारक तकनीकों जैसे सेंसर और अलर्ट सिस्टम, क्रैश के दौरान पैदल यात्री सुरक्षा के लिए बेहतर डिजाइन और पोस्ट-क्रैश बचाव प्रक्रियाओं को सुगम बनाने वाली प्रणालियों को अपने वाहनों में एकीकृत करना होगा। यह भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाएगा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। अंततः, यह भारत को दुनिया के अग्रणी सुरक्षित वाहन बाजारों में से एक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक

आपकी प्रतिक्रिया