छत्तीसगढ़ 8 मिनट पढ़ें

पहाड़ी कोरवा महिला ने दिया तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म, स्वास्थ्य विभाग की तत्परता रंग लाई

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
5 व्यूज़
पहाड़ी कोरवा महिला ने दिया तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म, स्वास्थ्य विभाग की तत्परता रंग लाई
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग के त्वरित और समन्वित प्रयासों ने एक मिसाल कायम की है। यहां की एक अति-जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती ने हाल ही में तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। यह सफल प्रसव तब संभव हो पाया जब बसंती किसी कारणवश अंबिकापुर जिला अस्पताल से बिना उपचार कराए अपने गांव लौट आई थी, जिसके बाद विभागीय अमले ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए उसे वापस चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई। मां और तीनों नवजात शिशु वर्तमान में पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल में चिकित्सकों की गहन निगरानी में हैं। यह घटना दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाती है, खासकर उन समुदायों के लिए जिन्हें अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

जोखिम भरी गर्भावस्था और गांव वापसी

पहाड़ी कोरवा समुदाय से ताल्लुक रखने वाली बसंती की गर्भावस्था शुरू से ही अति-जोखिम वाली श्रेणी में थी, जिसके कारण उसे विशेष चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता थी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसी गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें नियमित निगरानी में रखने और समय पर रेफर करने के प्रयास किए जाते हैं। इसी क्रम में बसंती को भी अंबिकापुर जिला अस्पताल भेजा गया था, जहां उसकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे भर्ती किया गया था। हालांकि, अज्ञात कारणों से या संभवतः अस्पताल के माहौल से असहज महसूस करने के कारण, बसंती बिना अपना पूरा इलाज कराए अपने गांव वापस लौट आई। यह स्थिति किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला के लिए बेहद खतरनाक हो सकती थी, खासकर दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अक्सर एक चुनौती बनी रहती है। गांव वापस आने के बाद उसकी सेहत को लेकर स्थानीय आशा कार्यकर्ता एवं मितानिनों को चिंता होने लगी थी, क्योंकि ऐसी स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशुओं दोनों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य अमले की त्वरित और समन्वित कार्रवाई

बसंती के अस्पताल से वापस गांव लौटने की सूचना मिलते ही, स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला तत्काल सक्रिय हो गया। विभाग ने इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए त्वरित कार्रवाई की योजना बनाई। स्थानीय मितानिनों ने सबसे पहले बसंती से संपर्क साधा और उसे दोबारा अस्पताल जाने के लिए प्रेरित किया। उनकी समझाइश और स्वास्थ्य विभाग की टीम के सहयोग से, 102 एंबुलेंस सेवा को तत्काल गांव भेजा गया। एंबुलेंस टीम ने बिना देरी किए बसंती को वापस जिला अस्पताल अंबिकापुर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों की टीम पहले से ही उसकी प्रतीक्षा कर रही थी और सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी से मां और बच्चों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता था, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों की सजगता, सामुदायिक कार्यकर्ताओं के प्रयास और तेजी ने ऐसी किसी भी अनहोनी को टाल दिया। यह त्वरित प्रतिक्रिया आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सफल प्रसव और स्वस्थ नवजात शिशुओं का जन्म

अस्पताल पहुंचने के बाद, चिकित्सकों की एक अनुभवी टीम ने बसंती की गहन जांच की और उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रसव की तैयारी की। चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के अथक प्रयासों और समन्वित कार्यप्रणाली के परिणामस्वरूप, बसंती ने सफलतापूर्वक तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। यह न केवल बसंती के परिवार के लिए, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। वर्तमान में, मां बसंती और उसके तीनों नवजात शिशु पूरी तरह से स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल में चिकित्सकों की गहन निगरानी में हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने इस अवसर पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अति-जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के मामले में समय पर पहचान, नियमित निगरानी और तत्काल रेफरल अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने सजग स्वास्थ्य अमले, त्वरित एंबुलेंस सेवा और मैदानी कार्यकर्ताओं के इस उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

आदिवासी अंचलों में सुरक्षित मातृत्व की सर्वोच्च प्राथमिकता

डॉ. विजय कुमार सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि दूरस्थ व आदिवासी अंचलों में प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व की सुविधा उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बसंती का मामला इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर हस्तक्षेप और स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता से जीवन बचाया जा सकता है। यह घटना छत्तीसगढ़ के उन दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की सफलता को उजागर करती है, जहां भौगोलिक चुनौतियां और जागरूकता की कमी अक्सर बड़ी बाधाएं बनती हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसी ही कई अन्य महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल सके। यह सफल प्रसव न केवल एक परिवार के लिए खुशी लेकर आया है, बल्कि इसने अन्य गर्भवती महिलाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश दिया है कि स्वास्थ्य विभाग उनकी सहायता के लिए हर पल तैयार है और उन्हें अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए आगे आना चाहिए।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक

आपकी प्रतिक्रिया