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छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट: IMD ने दी अगले 7 दिन की चेतावनी

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छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट: IMD ने दी अगले 7 दिन की चेतावनी
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छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता फिलहाल बनी हुई है, जिसके चलते मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार, 21 अगस्त, 2026 को उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब प्रदेश में अगले सात दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे कई जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बीते दिनों सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभागों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है।

आगामी दिनों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग द्वारा जारी नवीनतम जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी। शुक्रवार, 21 अगस्त, 2026 को जारी पूर्वानुमान में बताया गया कि उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर मध्यम से लेकर भारी बारिश हो सकती है। यह वर्षा अगले सात दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में अपना असर दिखाएगी, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन में बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस अवधि में स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, विशेषकर नदी-नालों के करीब रहने वाले लोगों को। हालांकि, 1 जून से अब तक राज्य में औसत बारिश सामान्य से केवल छह प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जो राज्य की स्थिति को सामान्य श्रेणी में रखता है। इसके बावजूद, कुछ विशेष क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के कारण स्थानीय स्तर पर गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।

जनजीवन पर भारी असर और बाढ़ जैसी स्थिति

लगातार हो रही बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गुरुवार को सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के अनेक स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप नदी-नालों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई, जहां बुधवार सुबह खारुन नदी में बहे 45 वर्षीय गेंदलाल का शव करीब 24 घंटे बाद गुरुवार सुबह घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर झाड़ियों में बरामद किया गया। यह घटना तब हुई जब गेंदलाल नदी किनारे गुड़ाखू करने गए थे और पैर फिसलने के कारण अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गए थे। स्थानीय पुलिस ने लोगों से नदियों से दूर रहने की अपील की है।

इसी तरह, रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक के पुटूकछार गांव में भी बढ़े जलस्तर ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यहां नदी पर बना रपटा पुल पिछले चार दिनों से पानी में डूबा हुआ है, जिसके कारण खम्हार-पुटूकछार मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। इस बाधा के चलते न केवल स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को आवश्यक सामान लाने-ले जाने और गांव से बाहर आने-जाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है ताकि उनकी दैनिक दिनचर्या सामान्य हो सके।

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वर्षा वितरण में असमानता बनी चुनौती

छत्तीसगढ़ में इस मानसून सीजन में वर्षा के आंकड़ों पर गौर करें तो, 1 जून से 20 अगस्त तक औसतन 771.8 मिमी (30.4 इंच) बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि की सामान्य बारिश 818.7 मिमी (32.2 इंच) है, इस प्रकार प्रदेश में बारिश सामान्य से केवल छह प्रतिशत कम है। यह आंकड़ा राज्य की समग्र स्थिति को सामान्य श्रेणी में दर्शाता है। हालांकि, यह औसत आंकड़ा जिलों के बीच वर्षा वितरण में एक बड़ा अंतर छिपाता है, जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदेश के 13 जिलों में बारिश सामान्य रही है, जबकि आठ जिलों में सामान्य से ज्यादा यानी अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं, सात जिले अभी भी कम बारिश की श्रेणी में हैं, जहां सामान्य से 41 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा रही है, जिससे सूखे जैसी स्थिति का खतरा मंडरा रहा है। इसके विपरीत, कुछ जिलों में सामान्य से 55 प्रतिशत तक अधिक बारिश हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर बाढ़ और जलभराव की गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। यह अत्यधिक असमान वितरण राज्य के विभिन्न हिस्सों में कृषि, जल प्रबंधन और आपदा तैयारियों के लिए अलग-अलग चुनौतियां पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसमी पैटर्न जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दर्शाता है, जिससे अत्यधिक वर्षा और सूखे की घटनाएं एक साथ देखने को मिल रही हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत हैं।

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