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IGKV पेपर लीक: सीएम साय की कड़ी चेतावनी, बख्शे नहीं जाएंगे आरोपी

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IGKV पेपर लीक: सीएम साय की कड़ी चेतावनी, बख्शे नहीं जाएंगे आरोपी
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में हुए परीक्षा पेपर लीक मामले में अपनी सरकार के सख्त रुख का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ मिसाल कायम करने वाली कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह बयान मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान आया, जहां उन्होंने राज्य में शिक्षा की शुचिता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह मामला पिछले सप्ताह तब सामने आया जब स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक हो गए, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।

घटना का विस्तृत विवरण

यह पेपर लीक कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए हुआ, जिनमें बी.एससी. कृषि और एम.एससी. बागवानी के तीसरे और पांचवें सेमेस्टर की परीक्षाएं शामिल थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन को कुछ छात्रों और आंतरिक सूत्रों से लीक की सूचना मिली, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से छह से अधिक परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया। इस घटना से लगभग दस हजार से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अब पुनर्निर्धारित परीक्षाओं का इंतजार है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र कुछ कोचिंग सेंटरों और बिचौलियों के माध्यम सेपचास हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में बेचे जा रहे थे। यह राज्य में शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है और छात्रों के बीच भारी निराशा का कारण बना है। इस घटना ने परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल की खामियों को उजागर किया है*।

मुख्यमंत्री का सख्त रुख

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया और राज्य के लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक पेपर लीक नहीं है, यह लाखों युवाओं के सपनों पर हमला है। हम इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेंगे और दोषियों को उनके किए की सजा भुगतनी होगी।" उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मामले की गहन जांच करने और सभी दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि जांच में किसी भी विश्वविद्यालय अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी समान रूप से कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह बयान राज्य सरकार की भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।

जांच की प्रगति और भावी कदम

पुलिस ने इस मामले में अब तक एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया हैप्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, करीब आठ लोगों को रायपुर और दुर्ग जिलों से गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कुछ छात्र, कोचिंग संचालक और विश्वविद्यालय के बाहरी कर्मचारी शामिल हैं। एसआईटी विभिन्न डिजिटल साक्ष्यों, जैसे व्हाट्सएप चैट और सोशल मीडिया पोस्ट, की गहराई से जांच कर रही है ताकि लीक के स्रोत और इसमें शामिल पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है और कुछ कर्मचारियों को संदेह के आधार पर निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिएपरीक्षा प्रणाली में सुधार और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है। इसमें प्रौद्योगिकी के उपयोग, जैसे डिजिटल लॉकिंग और एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्रों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है* ताकि परीक्षा प्रक्रिया को अभेद्य बनाया जा सके।

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छात्रों में आक्रोश और सरकारी प्रतिक्रिया

इस पेपर लीक मामले ने राज्य भर के छात्रों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। कई छात्र संगठनों ने रायपुर में विश्वविद्यालय परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किए हैं, जिसमें दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। छात्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं उनकी मेहनत और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं और उनके सपनों को तोड़ने का काम करती हैंमुख्यमंत्री ने छात्रों से धैर्य रखने और सरकार की कार्रवाई पर विश्वास रखने की अपील की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि पुनर्निर्धारित परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और नई सुरक्षा व्यवस्था के साथ आयोजित की जाएंगी और छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगीसरकार ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह छात्रों को नई परीक्षा तिथियों और प्रक्रियाओं के बारे में नियमित रूप से सूचित करे। इस प्रकरण से राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक नई बहस छिड़ गई है कि कैसे परीक्षा प्रणालियों को और अधिक सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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