CM यादव ने गांधी-शास्त्री को किया नमन, देश को उनके आदर्श अपनाने का आह्वान
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के पावन अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी भोपाल में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश और समाज के लिए उनके अमूल्य योगदानों को स्मरण करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं के आदर्श और सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने वे अपने समय में थे। उन्होंने प्रदेशवासियों से इन महान हस्तियों द्वारा दिखाए गए सत्य, अहिंसा, सादगी और राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया, ताकि एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण किया जा सके।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता दिलाई। उनका असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक संघर्षों ने देश को आजादी की राह दिखाई। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गांधीजी केवल राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने छुआछूत, गरीबी व सांप्रदायिक वैमनस्य जैसी बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने स्वच्छता के महत्व को भी समझा और अपने जीवन में उसे अपनाया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की कि वे गांधीजी के स्वच्छता के संदेश को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और 'स्वच्छ भारत' के सपने को साकार करने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि गांधीजी का 'सर्वधर्म समभाव' का सिद्धांत आज के दौर में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जब समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता है। उनकी ग्राम स्वराज की अवधारणा आत्मनिर्भर भारत की नींव है, जो स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि गांधीजी का जीवन अपने आप में एक संदेश है, जो हमें सादगी, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देता है।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का स्मरण
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का जीवन सादगी, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प का प्रतीक था। मुख्यमंत्री ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके कुशल नेतृत्व और 'जय जवान, जय किसान' के अमर नारे को विशेष रूप से याद किया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि शास्त्री जी ने देश को यह संदेश दिया कि हमारी सुरक्षा और खाद्य आत्मनिर्भरता, दोनों ही हमारे जवानों और किसानों के अथक परिश्रम पर निर्भर करती हैं। शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने छोटे कार्यकाल में देश को कई महत्वपूर्ण दिशाएं दीं। उन्होंने हरित क्रांति व श्वेत क्रांति की नींव रखी, जिससे भारत अनाज व दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा। मोहन यादव ने कहा कि शास्त्री जी का जीवन दर्शाता है कि कैसे एक सामान्य पृष्ठभूमि का व्यक्ति अपनी निष्ठा, कड़ी मेहनत और राष्ट्रप्रेम के बल पर देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचकर असाधारण योगदान दे सकता है। उनकी सादगी व ईमानदारी की मिसाल आज भी दी जाती है। उन्होंने देश को यह सिखाया कि विषम परिस्थितियों में भी कैसे एकजुट होकर चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से शास्त्री जी के त्याग और समर्पण की भावना से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।
प्रेरणा और आदर्शों का आह्वान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अंत में कहा कि गांधी और शास्त्री दोनों ही ऐसे महान सपूत थे, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित किया। उनके विचार और कर्म आज भी हमें सही दिशा दिखाते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता और विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे इन महान नेताओं के जीवन दर्शन को आत्मसात करें। गांधीजी के सत्य, अहिंसा व सर्वधर्म समभाव के सिद्धांत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाते हैं, जबकि शास्त्री जी का 'जय जवान, जय किसान' का नारा सैनिकों व अन्नदाताओं के प्रति सम्मान की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है, जब हम इन महान विभूतियों के आदर्शों पर चलकर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें। राज्य सरकार भी इन सिद्धांतों को अपनी नीतियों में समाहित कर सुशासन, विकास व सामाजिक समरसता को बढ़ावा दे रही है। मोहन यादव ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे गांधीजी और शास्त्री जी के सपनों के भारत को साकार करने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह श्रद्धांजलि केवल औपचारिक नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का एक दृढ़ संकल्प है।
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