विश्व रेबीज दिवस: शहर में निकली भव्य जागरूकता रैली, रेबीज मुक्त भारत का संकल्प
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शहर में विश्व रेबीज दिवस पर निकाली गई भव्य जागरूकता रैली, जन-जन तक पहुँचाया गया महत्वपूर्ण संदेश।
28 सितंबर, विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर, स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में शहर में एक विशाल जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य रेबीज रोग के प्रति आम जनता को जागरूक करना, इसके घातक प्रभावों से परिचित कराना, और रोकथाम के लिए टीकाकरण के महत्व पर प्रकाश डालना था। सुबह 9 बजे गांधी चौक से शुरू होकर, यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में समाप्त हुई। इस दौरान स्कूली छात्रों, स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों और पशु चिकित्सकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिन्होंने रेबीज से बचाव के नारे लगाए और प्लेकार्ड्स प्रदर्शित किए। इस पहल का लक्ष्य रेबीज मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में जनभागीदारी सुनिश्चित करना था, क्योंकि रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे 100% रोका जा सकता है।
रैली का उद्देश्य और प्रमुख संदेश
इस जागरूकता रैली का प्राथमिक उद्देश्य लोगों को रेबीज के बारे में सही जानकारी देना और उनमें व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना था। इस वर्ष विश्व रेबीज दिवस की थीम 'ऑल फॉर वन, वन हेल्थ फॉर ऑल' (सभी के लिए एक, सभी के लिए एक स्वास्थ्य) पर आधारित थी, जिस पर रैली में विशेष जोर दिया गया। यह थीम मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है, और यह बताती है कि रेबीज जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए इन सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। रैली के माध्यम से लोगों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि कुत्तों का नियमित टीकाकरण रेबीज की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। साथ ही, किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सलाह लेने की अनिवार्यता पर भी बल दिया गया। आयोजकों ने बताया कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर उचित कदम उठाकर इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है।
जनभागीदारी और उत्साहपूर्ण प्रदर्शन
जागरूकता रैली में शहर के विभिन्न स्कूलों के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वे हाथों में रेबीज से बचाव संबंधी संदेश वाले बैनर और पोस्टर लिए हुए थे। छात्रों ने 'रेबीज से बचाव है आसान, टीकाकरण से बचेगी जान' और 'कुत्तों को टीका लगवाएं, रेबीज को दूर भगाएं' जैसे नारे लगाए, जिससे पूरे मार्ग में जागरूकता का माहौल बन गया। रैली में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रमेश गुप्ता, पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश यादव, और जिलाधिकारी श्री आलोक वर्मा भी उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि रेबीज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, और इसे जड़ से खत्म करने के लिए सामुदायिक सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने पालतू जानवरों का टीकाकरण कराएं और आवारा पशुओं के टीकाकरण अभियानों में सहयोग करें। स्वयंसेवी संगठन 'जीवन ज्योति' के कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई और पर्चे बांटकर लोगों को जानकारी दी।
रेबीज की रोकथाम और बचाव के उपाय
रैली के समापन पर आयोजित एक संक्षिप्त कार्यक्रम में पशु चिकित्सक डॉ. अनीता सिंह ने रेबीज की रोकथाम के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को किसी जानवर, विशेषकर कुत्ते, ने काट लिया हो, तो सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना किसी देरी के तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सक से परामर्श लेना और रेबीज रोधी टीके की पूरी खुराक लेना अनिवार्य है। डॉ. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि टीके की एक भी खुराक छोड़ना जानलेवा हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या रेबीज के प्रसार का एक प्रमुख कारण है, और इनके प्रबंधन के लिए स्थानीय निकायों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। पशुपालन विभाग द्वारा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के लिए निःशुल्क टीकाकरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिसकी जानकारी भी इस दौरान दी गई।
रेबीज मुक्त समाज की दिशा में निरंतर प्रयास
जिलाधिकारी श्री आलोक वर्मा ने अपने समापन भाषण में कहा कि यह जागरूकता रैली सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह रेबीज मुक्त समाज बनाने की दिशा में एक निरंतर प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस घातक बीमारी को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन कार्यक्रमों में टीकाकरण अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन शामिल हैं। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पशु चिकित्सकों और स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की और सभी नागरिकों से अपील की कि वे रेबीज के प्रति जागरूक रहें और इसके रोकथाम के उपायों को अपनाएं। यह सुनिश्चित करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि उसका समुदाय रेबीज से सुरक्षित रहे। आने वाले समय में ऐसे और भी जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित किए जाएंगे ताकि दूर-दराज के इलाकों तक भी यह महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाया जा सके। सामूहिक प्रयासों से ही हम रेबीज को पूरी तरह से समाप्त कर एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।