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सोने की कीमतों में निकट भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना कम: विशेषज्ञ

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सोने की कीमतों में निकट भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना कम: विशेषज्ञ
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वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और निकट भविष्य में इसमें तेज बढ़ोतरी की संभावना कम दिख रही है। मिराए एसेट शेयरखान के हेड करेंसीज़ एंड कमोडिटीज़, प्रवीण सिंह के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका और अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती सोने की कीमतों पर प्रमुख रूप से असर डाल रही है। हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में हुई वृद्धि ने भी मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे गैर-उपज वाली संपत्ति के रूप में सोने की अपील कम हो गई है। यह स्थिति 30 जून, 2026 को सोने के भविष्य के रुझान को लेकर अनिश्चितता पैदा करती है, जहां निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

सोने का हालिया प्रदर्शन

हाल के दिनों में सोने के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन समग्र प्रवृत्ति नकारात्मक रही है। 29 जून को, सोने का कारोबार नकारात्मक पूर्वाग्रह के साथ हुआ, जिसका मुख्य कारण अमेरिका-ईरान संघर्ष के सप्ताहांत में फिर से बढ़ने से उपजी मुद्रास्फीति की चिंताएं थीं। इस संघर्ष ने तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेल दिया, जिससे सोने पर दबाव पड़ा। लेख लिखे जाने के समय, सोमवार रात को स्पॉट गोल्ड $4024 पर कारोबार कर रहा था, जो दिन के लिए 1.5% की गिरावट दर्शाता है। यह दर्शाता है कि भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर सोने को प्रभावित कर रहा है।

इससे पहले, 26 जून को, धातु ने 1.53% की बढ़त के साथ $4089 पर कारोबार समाप्त किया था, जिसका कारण मई के अमेरिकी पीसीई मूल्य सूचकांक (महीने-दर-महीने) के आंकड़ों का उम्मीद से थोड़ा नरम आना था, जो 25 जून को जारी किए गए थे। इस डेटा ने अमेरिकी डॉलर को थोड़ा कमजोर किया, जिससे सोने को कुछ राहत मिली। हालांकि, यह साप्ताहिक आधार पर 1.4% नीचे था, जो इसकी लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट थी। यह दर्शाता है कि अल्पकालिक लाभ के बावजूद, व्यापक बाजार भावना सोने के लिए नकारात्मक बनी हुई है, और निवेशक अभी भी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतें

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का फिर से बढ़ना वैश्विक बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है। सप्ताहांत में तनाव बढ़ने के बाद, अमेरिका और ईरान ने फिलहाल हमलों को रोक दिया है और मंगलवार को कतर में एक बैठक करने वाले हैं, जिसमें इस महीने हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन पर चर्चा की जाएगी, हालांकि ईरान का कहना है कि कुछ भी तय नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट (Karoline Leavitt) ने चेतावनी दी है कि "हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा," जो क्षेत्र में तनाव के उच्च स्तर को दर्शाता है।

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इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है और जहाजों को एक विशिष्ट मार्ग का उपयोग करने पर जोर दिया है। यह तब हो रहा है जब ओमान और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) एक नए मार्ग को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जो ईरानी जलक्षेत्र को बायपास करता है। ईरान इस वैकल्पिक मार्ग को अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, और इस क्षेत्र में कोई भी अशांति वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित कर सकती है, जिससे तेल की कीमतों में वृद्धि होगी। बढ़ी हुई तेल कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ाती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ता है, जो सोने के लिए नकारात्मक है क्योंकि यह गैर-उपज वाली संपत्ति है।

निकट अवधि का दृष्टिकोण और विशेषज्ञ की राय

मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह का अनुमान है कि सोने की कीमतें निकट भविष्य में दबाव में बनी रहेंगी। उनके अनुसार, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती सोने के मूल्य को कम कर रही है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बॉन्ड जैसी ब्याज-उपज वाली संपत्तियां निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाती हैं, जिससे सोने में निवेश की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, एक मजबूत डॉलर सोने को अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए महंगा बना देता है, जिससे इसकी वैश्विक मांग प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठकों, अमेरिकी मुद्रास्फीति डेटा और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखनी चाहिए। ये कारक सोने की कीमतों की दिशा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेंगे। फिलहाल, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक फीकी पड़ती दिख रही है, क्योंकि डॉलर और बॉन्ड यील्ड निवेशकों को अधिक आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं। 30 जून, 2026 के लिए, बाजार में एक सीमित दायरे में व्यापार होने की उम्मीद है, जब तक कि कोई बड़ा आर्थिक या भू-राजनीतिक बदलाव न हो। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टिकोण में, यदि वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ती है और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं, लेकिन निकट अवधि में चुनौतियां बरकरार हैं और निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

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