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उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना: मृत्युंजय नारायण ने प्रगति पर जताई संतुष्टि

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उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना: मृत्युंजय नारायण ने प्रगति पर जताई संतुष्टि
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भारत के महा रजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने उत्तराखंड में जारी जनगणना कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने गुरुवार को राज्य के देहराखास इलाके में कुछ घरों का दौरा कर जनगणना प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया और फील्ड स्टाफ से सीधे जानकारी प्राप्त की। यह ऐतिहासिक अवसर है जब भारत में जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल फॉर्मेट में संपन्न किया जा रहा है, और इस नवीनतम पहल में लोगों का उत्साह उल्लेखनीय है। जनगणना आयुक्त ने इस डिजिटल परिवर्तन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा और त्रुटियों को आसानी से सुधारा जा सकेगा।

डिजिटल जनगणना: एक ऐतिहासिक परिवर्तन

मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि आजाद भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब जनगणना की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। इस अभिनव दृष्टिकोण का मुख्य उद्देश्य डेटा संग्रह को अधिक सटीक, कुशल और पारदर्शी बनाना है। पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं की तुलना में डिजिटल माध्यम से एकत्रित किए गए आंकड़े न केवल अधिक विश्वसनीय होंगे, बल्कि उनके विश्लेषण और उपयोग में भी तेजी आएगी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल फॉर्मेट गलतियों को कम करने और उन्हें तुरंत सुधारने में सहायक होगा, जिससे जनगणना के अंतिम परिणाम अधिक प्रामाणिक बन सकेंगे। यह तकनीक-आधारित बदलाव देश की प्रशासनिक क्षमता को भी दर्शाता है और भविष्य की नीतियों तथा योजनाओं के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

इस बृहद अभियान में फील्ड स्टाफ को तकनीकी बाधाओं और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, वे पूरी लगन और उत्साह के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, जिसकी जनगणना आयुक्त ने सराहना की। ऑफलाइन डेटा एकत्र करने का विकल्प भी उपलब्ध है, लेकिन इसे अनिवार्य रूप से डिजिटल फॉर्मेट में लाना होगा, ताकि पूरे देश का डेटा एकरूप और संगत रहे। यह सुनिश्चित करेगा कि इस ऐतिहासिक जनगणना से प्राप्त जानकारी उच्च गुणवत्ता वाली हो और देश के विकास में प्रभावी ढंग से उपयोग की जा सके।

स्वगणना का बढ़ता प्रचलन और भविष्य की भूमिका

इस जनगणना में एक और महत्वपूर्ण नवाचार 'स्वगणना' का विकल्प है, जो नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं डिजिटल माध्यम से दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है। मृत्युंजय कुमार नारायण ने इस विकल्प की जबरदस्त सफलता पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पूरे देश में स्वगणना का इस्तेमाल करने वालों की संख्या अब करोड़ों में पहुंच चुकी है, जो दर्शाता है कि लोग इस नए प्रयोग को खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं। यह नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और डेटा संग्रह की प्रक्रिया को और अधिक लोकतांत्रिक बनाता है।

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स्वगणना का बढ़ता प्रचलन प्रशासनिक बोझ कम करने के साथ-साथ नागरिकों को अपनी जानकारी की सटीकता सुनिश्चित करने का सीधा अवसर भी देता है। जनगणना आयुक्त ने उम्मीद जताई कि भविष्य में स्वगणना की भूमिका और मजबूत होगी, जो नागरिक सशक्तिकरण और डिजिटल साक्षरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दर्शाता है कि भारतीय समाज डिजिटल समाधानों को अपनाने के लिए तैयार है और इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने का इच्छुक है। स्वगणना की यह सफलता भविष्य में होने वाली जनगणनाओं के लिए एक नई दिशा निर्धारित कर रही है, जहाँ नागरिक स्वयं अपनी जानकारी प्रदान कर राष्ट्रीय डेटाबेस में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।

फील्ड निरीक्षण और जनभागीदारी का उत्साह

महा रजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने उत्तराखंड में जनगणना कार्य की प्रगति का आकलन करने के लिए स्वयं जमीनी स्तर पर दौरा किया। उन्होंने देहराखास के कुछ घरों में पहुंचकर जनगणना प्रक्रिया को करीब से देखा और फील्ड स्टाफ से सीधे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों के सामने आ रही चुनौतियों को समझा और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में जनगणना कार्य को लेकर लोग जिस तरह से उत्साह दिखा रहे हैं, वह वास्तव में उल्लेखनीय है। यह उत्साह जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनता की सक्रिय भागीदारी और सहयोग के बिना इतना बड़ा और जटिल अभियान सफलतापूर्वक पूरा नहीं किया जा सकता। नारायण ने नागरिकों से सही जानकारी प्रदान कर इस ऐतिहासिक डिजिटल जनगणना को सफल बनाने में योगदान देने की अपील की। उन्होंने आश्वस्त किया कि कानून-व्यवस्था या तकनीकी कारणों से आने वाली किसी भी दिक्कत का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक की गणना हो और देश के विकास के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हों।

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