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झारखंड अग्निशमन सेवा को मिली नई शक्ति: 58 आधुनिक वाहनों को हरी झंडी

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झारखंड अग्निशमन सेवा को मिली नई शक्ति: 58 आधुनिक वाहनों को हरी झंडी
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झारखंड की अग्निशमन एवं आपदा राहत व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करते हुए, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को राजधानी रांची के धुर्वा स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 58 अत्याधुनिक 'मिनी वाटर टेंडर विद मिस्ट टेक्नोलॉजी' वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल राज्य के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित तथा प्रभावी प्रतिक्रिया देने के सरकार के संकल्प को दर्शाती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है। इस महत्वपूर्ण कदम से राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

आधुनिक तकनीक से लैस, दुर्गम क्षेत्रों में भी पहुंच आसान

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जोर देकर कहा कि इन 58 नए मिनी फायर टेंडरों का बेड़ा राज्य की अग्निशमन क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। ये वाहन 'मिस्ट टेक्नोलॉजी' से लैस हैं, जो पारंपरिक पानी के जेट की तुलना में बहुत कम पानी का उपयोग करते हुए आग बुझाने में अधिक प्रभावी सिद्ध होती है। यह तकनीक पानी को सूक्ष्म कणों में बदलकर एक घना कोहरा बनाती है, जो आग को तेजी से ऑक्सीजन से वंचित कर देती है और गर्मी को अवशोषित करती है। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि आग से होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। इन वाहनों का कॉम्पैक्ट आकार और उन्नत गतिशीलता उन्हें रांची सहित राज्य के अन्य शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की संकरी गलियों, घनी आबादी वाले मोहल्लों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक आसानी से पहुंचने में सक्षम बनाती है, जहां बड़े दमकल वाहनों का पहुंचना अक्सर एक बड़ी चुनौती होता है। प्रत्येक वाहन में लगभग 2000 लीटर पानी की क्षमता है और यह उच्च दबाव वाले पंपों से सुसजित है, जो आग पर तुरंत काबू पाने में सहायक होंगे। इसके साथ ही, इन वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा किट और बचाव उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे ये बहुउद्देश्यीय भूमिका निभा सकेंगे।

त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर आपदा प्रबंधन

इन आधुनिक मिनी वाटर टेंडरों की तैनाती से आपातकालीन परिस्थितियों में अग्निशमन सेवा की प्रतिक्रिया क्षमता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि ये वाहन गैस सिलेंडर विस्फोट, शॉर्ट सर्किट, आवासीय भवनों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगने वाली आग जैसी विभिन्न घटनाओं में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य करने में सक्षम होंगे। इन वाहनों को रणनीतिक रूप से विभिन्न जिलों के अग्निशमन केंद्रों पर तैनात किया जाएगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में औसत प्रतिक्रिया समय में 20% तक की कमी आने की उम्मीद है। विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इन नई तकनीकों के संचालन के लिए अग्निशमन कर्मियों को दिए जा रहे विशेष प्रशिक्षण के बारे में भी जानकारी दी। इस प्रशिक्षण में मिस्ट टेक्नोलॉजी का प्रभावी उपयोग, वाहन रखरखाव और आपातकालीन बचाव प्रोटोकॉल शामिल हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक वाहन पर तैनात कर्मी पूरी तरह से प्रशिक्षित और विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हों, जिससे वे घटनास्थल पर तत्काल और सटीक कार्रवाई कर सकें। इस कदम से न केवल जान-माल का नुकसान कम होगा, बल्कि आपदा प्रबंधन की समग्र प्रणाली भी मजबूत होगी, जिससे राज्य के नागरिकों को सुरक्षा का बेहतर अहसास होगा।

मुख्यमंत्री का विजन और भविष्य की योजनाएं

कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अग्निशमन विभाग के अन्य आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का भी गहन अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से विभाग की कार्यप्रणाली और नई तकनीकों के एकीकरण पर विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दोहराया कि बदलती परिस्थितियों और बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए राज्य की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लगातार आधुनिक, तेज़ और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर और सर्वोत्तम संभव सहायता उपलब्ध हो। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को 2027 तक राज्य के सभी 24 जिलों में कम से कम एक मिनी वाटर टेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना से अवगत कराया, जिससे राज्य के दूरस्थ कोनों तक भी सुरक्षा पहुंचाई जा सके। इस पहल के लिए कुल लगभग 25 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश किया गया है, जो राज्य सरकार की सुरक्षा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिए कि वे सार्वजनिक जागरूकता अभियानों को भी तेज करें, ताकि लोग आग से बचाव के उपायों और आपातकालीन स्थितियों में क्या करें-क्या न करें, के बारे में जागरूक हो सकें। भविष्य में, सरकार का विचार आपदा राहत के लिए ड्रोन तकनीक और उन्नत संचार प्रणालियों को भी शामिल करने का है, ताकि झारखंड को आपदा-प्रतिरोधी राज्य बनाया जा सके और आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

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