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अयोध्या में सावन का तीसरा सोमवार: नागेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

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अयोध्या में सावन का तीसरा सोमवार: नागेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
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अयोध्या में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग पर शिव भक्तों का एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। 17 अगस्त, 2026 को रामनगरी के प्रमुख शिवालयों, विशेषकर प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर, में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ तड़के 3 बजे से ही जुटने लगी। हजारों भक्तों ने पवित्र सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई और फिर 'हर-हर महादेव' तथा 'बम-बम भोले' के जयकारों के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इस विशेष दिन पर भगवान शिव का पूजन कर भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि और देश की खुशहाली की कामना करने पहुंचे थे, जिससे पूरी अयोध्या शिव भक्ति के रंग में रंग गई।

नागेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

यह पैराग्राफ अयोध्या के प्रसिद्ध बाबा नागेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़ और विशेष पूजा-अर्चना पर केंद्रित था। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के पावन अवसर पर यहाँ सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगने लगीं, जो मंदिर परिसर से बाहर तक फैली हुई थीं। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से व्यवस्थित किया गया था, ताकि सभी को सुगमता से दर्शन प्राप्त हो सकें।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने की थी। सावन के महीने में यहाँ भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए। कई श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक भी करवाया। दर्शनार्थी अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते नजर आए। मंदिर का वातावरण 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के उद्घोषों से गूंज रहा था, जो आस-पास भी भक्तिमय माहौल था

सावन और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष सावन के तीसरे सोमवार का नाग पंचमी के साथ पड़ना एक दुर्लभ और शुभ संयोग था। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सावन का सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान शिव के गले में विराजमान नागों की भी विशेष आराधना की जाती है, जिससे कालसर्प दोष से मुक्ति और सर्प भय से रक्षा मिलती है

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सुबह तड़के से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। भक्तों का मानना था कि इस विशेष दिन पर सरयू स्नान से पाप धुल जाते हैं और आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है। स्नान के बाद, वे गीले वस्त्रों में ही नागेश्वरनाथ मंदिर और अन्य शिवालयों की ओर बढ़ चले, जहाँ उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान किए। शहर के अन्य मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। इस अद्भुत संयोग ने अयोध्या में भक्ति और आस्था का एक अविस्मरणीय पर्व रच दिया, जहाँ शिव महिमा का गुणगान हो रहा था और पवित्रता का संचार था

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और भीड़ प्रबंधन

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए अयोध्या प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत किया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके और भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन का अवसर मिल सके। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के नेतृत्व में पूरे शहर को 5 जोन में बांटकर सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। प्रत्येक जोन में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।

नागेश्वरनाथ मंदिर के अलावा, प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी, कनक भवन और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी भारी पुलिस बल, PAC जवानों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद भी ली जा रही थी। प्रवेश और निकास द्वारों पर विशेष ध्यान दिया गया था ताकि भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। यातायात सुचारू रखने के लिए मार्ग डायवर्ट किए गए और पार्किंग की व्यवस्था थी। प्रशासन ने भक्तों से सहयोग की अपील की थी और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया था

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