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छत्तीसगढ़ में इंद्रावती का 53 साल का रिकॉर्ड टूटा, देश में ओले-कोहरा

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छत्तीसगढ़ में इंद्रावती का 53 साल का रिकॉर्ड टूटा, देश में ओले-कोहरा
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देशभर में मौसम का मिजाज अप्रत्याशित रूप से बदल गया है, जहां एक ओर छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान अर्नब के भीषण असर से इंद्रावती नदी का जलस्तर पिछले 53 सालों का रिकॉर्ड तोड़ चुका है, वहीं राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के कारण ओले गिरे हैं और उत्तर प्रदेश में सितंबर के महीने में जनवरी जैसा घना कोहरा छाया हुआ है। इस विषम मौसमी घटनाक्रम ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार, 29 सितंबर, 2026 को जारी अद्यतन जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बस्तर में इंद्रावती नदी का जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंच गया, जो कि 9 जुलाई 1973 के 12.18 मीटर के पुराने रिकॉर्ड से 21 सेंटीमीटर अधिक है। इस गंभीर स्थिति के चलते निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है, और प्रशासन द्वारा व्यापक बचाव अभियान चलाकर हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

छत्तीसगढ़ में इंद्रावती का विकराल रूप और व्यापक बचाव कार्य

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती नदी ने अभूतपूर्व जलस्तर हासिल किया है, जो चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण हुई भारी बारिश का सीधा परिणाम है। जगदलपुर सहित आसपास के कई निचले इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। ड्रोन से ली गई तस्वीरों में इन क्षेत्रों में पानी भरा स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस असामान्य बाढ़ के मद्देनजर, प्रशासन ने सोमवार को एक बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया, जिसमें कुल 833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले भर में 65 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां वर्तमान में 8,894 लोग शरण लिए हुए हैं। कोरबा जिले के मैनगढ़ी में भी ग्रामीणों को एक बीमार व्यक्ति को उठाकर उफनती नदी पार कराते देखा गया, जो आपदा की स्थिति में स्थानीय समुदाय की एकजुटता और संघर्ष को दर्शाता है। यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ में मौसम की अभूतपूर्व चुनौती को रेखांकित करता है और राहत कार्यों की महत्ता को दर्शाता है।

उत्तर भारत में मौसम का बदला मिजाज: ओले, कोहरा और ठंड का प्रकोप

देश के उत्तरी हिस्सों में भी मौसम ने असामान्य करवट ली है। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जयपुर, बीकानेर और चूरू जैसे जिलों में भारी बारिश के साथ ओले गिरे हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान होने की आशंका है। मौसम में अचानक आए इस बदलाव से रात में ठंड बढ़ गई है, और शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम पारा 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 2-3 दिनों में पारे में 3-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेश में सितंबर के महीने में जनवरी जैसा घना कोहरा छाया हुआ है। अमेठी, रामपुर और बदायूं में मंगलवार सुबह इतनी घनी धुंध देखी गई कि 25 मीटर दूर देखना भी मुश्किल हो गया। लोगों को हल्की ठंड का एहसास हुआ। राज्य से मानसून की विदाई भी शुरू हो चुकी है, जिसमें मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ सहित पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों से यह वापस लौट चुका है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे प्रदेश में भारी बारिश रुक गई है। इस बीच, बिहार के बगहा में आंधी-पानी की वजह से एक कच्चा मकान ढह गया, जबकि उत्तरप्रदेश के बदायूं में 70 साल पुरानी एक दो मंजिला कोठी महज 3 सेकंड में जमींदोज हो गई।

दिल्ली में बढ़ी ठंड और पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन-बर्फबारी

उत्तर भारत में मौसम के बदलने से दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों में भी ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के बाद रविवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सितंबर महीने की पिछले 25 सालों में दूसरी सबसे ठंडी रात रही। इस अप्रत्याशित ठंड के बाद दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में सोमवार को जंगलिख पुल के पास बड़ा भूस्खलन हो गया, जिससे यातायात बाधित हुआ और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बर्फबारी के बीच फंसे पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जो बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया का परिणाम है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड के 5 जिलों में बारिश दर्ज की गई है। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि देश भर में मौसम की असामान्य गतिविधियां जारी हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें इन स्थितियों से निपटने के लिए लगातार सक्रिय हैं, लेकिन मौसम का यह अप्रत्याशित व्यवहार भविष्य की तैयारियों पर भी सवाल उठाता है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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