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पानीपत की डाहर शुगर मिल को राष्ट्रीय पुरस्कार, तकनीकी दक्षता में अव्वल

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पानीपत की डाहर शुगर मिल को राष्ट्रीय पुरस्कार, तकनीकी दक्षता में अव्वल
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मंगलवार का दिन हरियाणा के पानीपत जिले के लिए एक ऐतिहासिक क्षण लेकर आया, जब डाहर स्थित पानीपत सहकारी चीनी मिल को तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में देशभर की सहकारी चीनी मिलों के बीच अपनी असाधारण क्षमता और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान मिल को वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में उसके शानदार प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया गया है, जिसने न केवल मिल के अधिकारियों और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत को रेखांकित किया, बल्कि पूरे पानीपत जिले और हरियाणा राज्य के लिए गौरव का विषय भी बन गया।

यह पुरस्कार नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं यह सम्मान सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा और पानीपत के उपायुक्त एवं चीनी मिल के अध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ को प्रदान किया। मिल को यह सम्मान विशेष रूप से उसकी तकनीकी दक्षता और उपलब्ध क्षमता के सर्वोत्तम इस्तेमाल के लिए दिया गया, जो आधुनिक चीनी मिलों के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे नवाचार और कुशल प्रबंधन से सहकारी क्षेत्र की इकाइयाँ भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

ऐतिहासिक उपलब्धि और राष्ट्रीय पहचान

पानीपत सहकारी चीनी मिल की यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार भर नहीं है, बल्कि यह देश के सहकारी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (NFCSF) द्वारा वर्ष 2025-26 के दक्षता पुरस्कारों के लिए देश की विभिन्न सहकारी चीनी मिलों के कामकाज और प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन किया गया था। इस मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता, उत्पादन क्षमता का उपयोग, वित्तीय स्थिरता और पर्यावरण-मित्रता जैसे कई मापदंडों को शामिल किया गया था। इन सभी मानकों पर डाहर चीनी मिल का प्रदर्शन सबसे आगे रहा, जिसके बाद उसे सर्वसम्मति से प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया। इस पुरस्कार ने न केवल डाहर मिल को राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया है, बल्कि यह हरियाणा के सहकारी चीनी उद्योग के लिए भी एक नई प्रेरणा का स्रोत बना है। यह सम्मान मिल की प्रबंधन टीम, तकनीकी विशेषज्ञों और गन्ना उत्पादक किसानों के बीच मजबूत समन्वय का परिणाम है, जिन्होंने मिलकर चुनौतियों का सामना किया और उत्कृष्ट परिणाम दिए।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के प्रमुख आंकड़े

डाहर चीनी मिल ने पेराई सत्र 2025-26 में जो आंकड़े दर्ज किए हैं, वे उसकी असाधारण दक्षता को दर्शाते हैं। मिल ने इस दौरान करीब 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस विशाल पेराई से मिल ने 5.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया, जो उसकी उत्पादन क्षमता का प्रभावी उपयोग दर्शाता है। चीनी उत्पादन के साथ-साथ, मिल ने सह-उत्पाद के तौर पर बिजली का उत्पादन भी किया, जिसकी बिक्री से लगभग 29 करोड़ रुपये की आय हुई। यह दर्शाता है कि मिल केवल चीनी उत्पादन पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है। इस दौरान, मिल ने अपनी कुल क्षमता का लगभग 94.61 प्रतिशत उपयोग किया, जो उद्योग के मानकों के अनुसार एक बहुत ही उच्च आंकड़ा है और इसकी परिचालन दक्षता का प्रमाण है। यह उच्च क्षमता उपयोग न केवल मिल की लाभप्रदता बढ़ाता है, बल्कि गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने में भी मदद करता है।

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इसके अतिरिक्त, 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई के साथ, डाहर चीनी मिल ने प्रदेश की 11 सरकारी चीनी मिलों में सर्वाधिक पेराई का आंकड़ा दर्ज किया। यह उपलब्धि हरियाणा में चीनी उत्पादन के क्षेत्र में डाहर मिल के नेतृत्व को स्थापित करती है। सरकार की ओर से वर्ष 2022 में डाहर गांव में प्रतिदिन 50 हजार क्विंटल क्षमता की मिल स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, और यह पुरस्कार उस निवेश और दूरदर्शिता का परिणाम है। यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से एक सहकारी मिल भी निजी क्षेत्र की बड़ी मिलों को टक्कर दे सकती है।

सामूहिक प्रयास और भविष्य की दिशा

सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मिल के अधिकारियों, कर्मचारियों और सबसे महत्वपूर्ण, गन्ना उत्पादक किसानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि मिल से जुड़े हर अधिकारी, कर्मचारी और किसान की कड़ी मेहनत, लगन तथा आपसी सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण पेराई सत्र में भी मिल ने तकनीकी स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कायम रखा, जो टीम वर्क की मिसाल है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह पुरस्कार अन्य सहकारी चीनी मिलों को भी प्रेरित करेगा ताकि वे अपनी तकनीकी दक्षता और परिचालन क्षमता में सुधार कर सकें।

यह उपलब्धि न केवल पानीपत और हरियाणा के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह देश के सहकारी आंदोलन को भी मजबूत करती है। डाहर चीनी मिल का यह सफल मॉडल अन्य राज्यों की सहकारी मिलों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है, जिससे वे भी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी दक्षता बढ़ा सकें और किसानों के लिए अधिक लाभकारी बन सकें। भविष्य में, डाहर चीनी मिल से पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन विधियों को अपनाने और गन्ने के उप-उत्पादों का और अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने की उम्मीद की जा सकती है, जिससे इसकी स्थिरता और आर्थिक व्यवहार्यता और बढ़ेगी। यह पुरस्कार मिल के लिए एक नई शुरुआत है, जो उसे भविष्य में और भी बड़ी ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रेरित करेगा।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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