किसान ने 10 लाख खर्च कर खेत को बनाया शहीद स्मारक, पुलवामा शहीदों को नमन
इस खबर की वेब स्टोरी देखें
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की लोरमी तहसील के पिपरियाकला गांव में एक असाधारण पहल देखने को मिली है, जहाँ एक किसान ने अपनी 10 लाख रुपये की जमापूंजी और कर्ज़ से अपने खेत के एक हिस्से को पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों को समर्पित एक भव्य स्मारक में बदल दिया है।65 वर्षीय किसान राधेलाल बघेल ने 2019 के पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों की याद में यह स्मारक बनवाया है, जिसका उद्देश्य न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देना है, बल्कि भावी पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना को भी जगाना है। उनका यह कदम देशप्रेम और त्याग की एक अनूठी मिसाल पेश करता है, जिसे जानकर हर कोई सलाम कर रहा है।
एक किसान की अनोखी श्रद्धांजलि
किसान राधेलाल बघेल का जीवन सामान्य किसानों जैसा ही था, जो अपनी खेती-किसानी में व्यस्त रहते थे। लेकिन 14 फरवरी, 2019 को हुई एक भयावह घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। जब देश ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले में अपने 40 वीर जवानों को खो दिया, तो इस खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। टीवी पर शहीदों की खबरें देखकर राधेलाल बघेल इतने भावुक हुए कि उन्होंने तय कर लिया कि वह इन शहीदों की याद में कुछ ऐसा करेंगे, जो हमेशा के लिए अमर हो जाए। उन्होंने अपने 4 एकड़ के खेत में से 1 एकड़ जमीन को शहीद स्मारक बनाने के लिए समर्पित करने का फैसला किया। यह कोई छोटा फैसला नहीं था, खासकर एक किसान के लिए जिसकी आजीविका पूरी तरह से उसी जमीन पर निर्भर करती हो। उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी लगा दी और जरूरत पड़ने पर कर्ज भी लिया, ताकि यह स्मारक भव्य और प्रेरणादायक बन सके। इस काम में उन्हें अपने परिवार का भी पूरा सहयोग मिला, जो उनके इस नेक इरादे में उनके साथ खड़ा रहा।
स्मारक की संरचना और संदेश
राधेलाल बघेल द्वारा निर्मित यह शहीद स्मारक सिर्फ ईंट-पत्थर का ढाँचा नहीं, बल्कि देशप्रेम और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। इस स्मारक में पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों के नाम बड़े सम्मान के साथ अंकित किए गए हैं। हर नाम के साथ उनकी शहादत की गाथा जुड़ी हुई है, जो आगंतुकों को वीरगति प्राप्त करने वाले सैनिकों के त्याग की याद दिलाती है। इस स्मारक को बनाने में 10 लाख रुपये का खर्च आया है, जिसे राधेलाल ने अपनी मेहनत की कमाई और कुछ कर्ज लेकर पूरा किया। उन्होंने किसी सरकारी सहायता या बाहरी संस्था से मदद नहीं ली, क्योंकि उनका मानना है कि यह उनका व्यक्तिगत कर्तव्य और देश के प्रति प्रेम का प्रकटीकरण है। स्मारक के केंद्रीय स्थल पर एक विशाल भारतीय तिरंगा भी फहराया जाता है, जो दूर से ही देशभक्ति का संदेश देता है। यह स्मारक इस बात का प्रमाण है कि देशप्रेम किसी पद या धन का मोहताज नहीं होता, बल्कि यह हृदय की गहराई से उपजा एक सच्चा भाव है।
देशभक्ति की मिसाल और भविष्य की प्रेरणा
राधेलाल बघेल का यह कदम सिर्फ एक स्मारक का निर्माण नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए देशभक्ति की एक स्थायी पाठशाला है। इस स्मारक के माध्यम से वह युवा पीढ़ी को यह सिखाना चाहते हैं कि देश के लिए बलिदान का क्या महत्व है और हमें अपने वीर सपूतों को कभी नहीं भूलना चाहिए। हर साल 14 फरवरी को, पुलवामा हमले की बरसी पर, इस स्मारक पर विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है, जिसमें गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। इस अवसर पर शहीदों को याद किया जाता है और बच्चों को उनकी वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं। आसपास के स्कूलों के बच्चे भी अक्सर इस स्मारक का दौरा करते हैं, जहाँ उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास और बलिदानों के बारे में बताया जाता है। राधेलाल बघेल का कहना है कि पैसे से ज्यादा देशप्रेम महत्वपूर्ण है और उन्होंने जो किया है, वह उनका फर्ज है। उनकी यह पहल पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गई है, जो यह दर्शाती है कि एक साधारण व्यक्ति भी असाधारण तरीके से देश सेवा कर सकता है। उनका यह प्रयास निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों को देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।