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संसद सत्र का चौदहवाँ दिन: हंगामे के बीच विधायी कार्य और विपक्ष का विरोध

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संसद सत्र का चौदहवाँ दिन: हंगामे के बीच विधायी कार्य और विपक्ष का विरोध
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भारतीय संसद का मॉनसून सत्र अपने चौदहवें दिन, गुरुवार, 6 अगस्त, 2026 को भी भारी हंगामे और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच जारी रहा। नई दिल्ली स्थित संसद भवन में दोनों सदनों - लोकसभा और राज्यसभा - को कई बार स्थगित करना पड़ा, क्योंकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा था, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री की सदन में उपस्थिति को लेकर। इस गतिरोध के बावजूद, सरकार महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही थी, जिसमें कई संशोधन विधेयक पेश करना और चर्चा करना शामिल था, जबकि विपक्ष ने अपने विरोध को लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा बताया।

संसद में गतिरोध और विपक्ष का मुखर विरोध

संसद के मॉनसून सत्र के चौदहवें दिन की शुरुआत हंगामेदार रही, जिसके कारण राज्यसभा को सुबह 11 बजे से ही दोपहर 2:15 बजे तक और लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्ष लगातार सरकार से कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण और चर्चा की मांग कर रहा था, जिसके चलते सदन में नारेबाजी और शोरगुल का माहौल बना रहा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता, मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष देश से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठा रहा है और यह उनका अधिकार है। खड़गे ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का हवाला देते हुए कहा कि "व्यवधान लोकतंत्र का हिस्सा है" और सदस्यों को प्रासंगिक प्रश्न उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में उपस्थिति की मांग दोहराई।

इस गतिरोध को तोड़ने के प्रयास में, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार, 5 अगस्त, 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करना था। हालांकि, गुरुवार को भी सदन में विपक्ष का विरोध जारी रहा, जिससे स्पष्ट था कि समाधान अभी दूर है।

महत्वपूर्ण विधायी एजेंडा और प्रस्तावित विधेयक

संसदीय कार्यवाही में व्यवधान के बावजूद, सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाली थीं। यह विधेयक कई महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन करना चाहता है, जिनमें भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025, और वित्त अधिनियम, 2026 शामिल हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य देश की वित्तीय और कराधान नीतियों को अद्यतन करना और उन्हें वर्तमान आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप बनाना है।

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वहीं, राज्यसभा में विनियोग (सं

वहीं, राज्यसभा में विनियोग (सं. 3) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाना था। इस विधेयक को लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। यह कानून भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करता है ताकि 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान कुछ सेवाओं पर खर्च की गई अतिरिक्त राशि को पूरा किया जा सके, जो उन सेवाओं और उस वर्ष के लिए स्वीकृत राशि से अधिक थी। यह विधेयक सरकार को पिछली वित्तीय विसंगतियों को वैध बनाने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

शून्यकाल में उठाई गई प्रमुख मांगें और मुद्दे

सदन में हंगामे के बीच, शून्यकाल में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए गए। भाजपा सांसद डॉ. के. लक्ष्मण ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सरकार से संत सेवालाल महाराज की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने का अनुरोध किया। डॉ. लक्ष्मण ने बताया कि संत सेवालाल महाराज, जो बंजारा समुदाय के एक सम्मानित नेता थे, ने समाज में विभिन्न तरीकों से महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनकी जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग समुदाय की भावनाओं और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए की गई है।

इसके अतिरिक्त, एक समाजवादी पार्टी के सांसद ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि पुलिस बर्बरता पर चर्चा करने का वादा किया गया था, लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह दर्शाता है कि विपक्ष केवल सरकार की बड़ी नीतियों पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर से जुड़े सामाजिक और न्याय संबंधी मुद्दों पर भी जवाबदेही चाहता है। इन मांगों और मुद्दों ने संसद के चौदहवें दिन की कार्यवाही को और भी महत्वपूर्ण बना दिया, क्योंकि इसने न केवल विधायी कार्यों को बल्कि जनहित के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर किया।

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