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छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब का तांडव: जनजीवन अस्त-व्यस्त, नदियां उफान पर

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छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब का तांडव: जनजीवन अस्त-व्यस्त, नदियां उफान पर
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पिछले 48 घंटों से छत्तीसगढ़ राज्य चक्रवात अर्नब के भीषण प्रभाव का सामना कर रहा है, जिसके चलते पूरे प्रदेश में मूसलाधार बारिश हुई है। इस अप्रत्याशित मौसमी गतिविधि ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, खासकर दक्षिणी और मध्य छत्तीसगढ़ में। लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां, जिनमें महानदी, इंद्रावती और शिवनाथ शामिल हैं, खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों पर जलभराव और भूस्खलन के कारण आवागमन बाधित हो गया है, जिससे हजारों लोग फंसे हुए हैं और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

वर्षा और नदियों का विकराल रूप

चक्रवात अर्नब के कारण छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा दर्ज की गई है। खासकर बस्तर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, राजनांदगांव और धमतरी जिलों में औसत से 200 मिमी से अधिक बारिश हुई है। इस भयंकर बारिश के चलते राज्य की जीवनरेखा मानी जाने वाली महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, और यह धमतरी के पास रुद्री बैराज और महासमुंद के पास सोनडोंगरी बैराज में खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है। इसी प्रकार, इंद्रावती नदी जगदलपुर में और शिवनाथ नदी दुर्ग के पास अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। नदी किनारे बसे सैंकड़ों गांवों को अलर्ट पर रखा गया है, और प्रशासन ने निचले इलाकों से लोगों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई छोटे बांधों और जलाशयों के गेट खोलने पड़े हैं ताकि पानी का दबाव कम किया जा सके, जिससे नदी के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। विशेषज्ञ इसे पिछले एक दशक की सबसे भीषण मानसूनी वर्षा मान रहे हैं।

परिवहन और जनजीवन पर गहरा असर

चक्रवात अर्नब ने छत्तीसगढ़ की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर दिया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले कई प्रमुख मार्ग, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 30 (रायपुर-जगदलपुर मार्ग), राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 130 (रायपुर-अंबिकापुर मार्ग) और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 43 (जगदलपुर-विशाखापत्तनम मार्ग) शामिल हैं, भारी जलभराव और भूस्खलन के कारण बंद हो गए हैं। जगदलपुर से रायपुर जाने वाली बसें और अन्य वाहन केशकाल घाटी में फंसे हुए हैं, जहाँ भूस्खलन के कारण रास्ता अवरुद्ध हो गया है। रेलवे सेवाओं पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है, दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे ने पांच यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया है और आठ अन्य ट्रेनों के मार्ग परिवर्तित किए हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, कई स्थानों पर 48 घंटों से अधिक समय से बिजली गुल है। कई जिलों में स्कूलों और कॉलेजों में दो दिनों की छुट्टी घोषित कर दी गई है, और बाजार बंद पड़े हैं। किसानों की धान और अन्य खरीफ फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान की आशंका है।

प्रशासन की तत्परता और बचाव अभियान

राज्य सरकार ने चक्रवात अर्नब से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए आपातकालीन बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की तीन टीमें और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की पांच टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। ये टीमें फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवश्यक सामग्री वितरित करने में जुटी हैं। राजधानी रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी किया गया है, ताकि लोग आपातकालीन सहायता प्राप्त कर सकें। लगभग 50 राहत शिविर बनाए गए हैं जहाँ 2,500 से अधिक लोगों को ठहराया गया है और उन्हें भोजन व चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। चिकित्सा टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल से निपटा जा सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और नदियों तथा निचले इलाकों से दूर रहें। आगामी दिनों में भी सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता है क्योंकि मौसम विभाग ने अभी भी भारी बारिश की चेतावनी जारी रखी है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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