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बस्तर में बाढ़ का खतरा: इंद्रावती का बढ़ेगा जलस्तर, 43 गांव अलर्ट पर

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बस्तर में बाढ़ का खतरा: इंद्रावती का बढ़ेगा जलस्तर, 43 गांव अलर्ट पर
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बस्तर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और ओडिशा के कालाहांडी स्थित खाटीगुड़ा इंद्रावती बांध का एक गेट खोले जाने के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है। इसके चलते नदी किनारे बसे 43 गांवों पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से इंद्रावती नदी के आसपास के गांवों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी शुरू करा दी है। वहीं, राजस्व विभाग और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) को भी पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान बस्तर में और अधिक बारिश की संभावना जताई है, जिससे नदी-नालों का जलस्तर और बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का जोखिम बढ़ जाएगा।

इंद्रावती नदी में जलस्तर वृद्धि और खतरे का स्तर

इंद्रावती नदी में जलस्तर की बढ़ोतरी ने बस्तर प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ओडिशा के कालाहांडी जिले में स्थित खाटीगुड़ा इंद्रावती बांध का एक गेट खोले जाने के कारण अगले कुछ घंटों में नदी का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ने की संभावना है। प्रशासन द्वारा इंद्रावती नदी के लिए वार्निंग लेवल 7 मीटर और डेंजर लेवल 8.3 मीटर निर्धारित किया गया है। वर्तमान में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, और यदि यह डेंजर लेवल को पार करता है, तो इसका सीधा असर नदी से जुड़े 43 गांवों पर पड़ेगा। इन गांवों में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर तैयारी कर रहा है।

मौसम विभाग ने बस्तर में अगले 48 घंटों तक भारी बारिश जारी रहने का अनुमान लगाया है। यह पूर्वानुमान नदी के जलस्तर में और वृद्धि कर सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा और गहरा जाएगा। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्यों के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं ताकि समय रहते किसी भी चुनौती का सामना किया जा सके।

संभावित बाढ़ प्रभावित गांव और तहसीलें

प्रशासन ने इंद्रावती, नारंगी और मार्कण्डी नदियों के आसपास के कई गांवों को बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील चिन्हित किया है। एक विस्तृत बाढ़ निर्देशिका तैयार की गई है जिसमें अलग-अलग तहसीलों में संभावित प्रभावित गांवों की सूची शामिल है। यह सूची निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों को समय पर चेतावनी देने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद करेगी।

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बकावंड तहसील में इंद्रावती एवं मार्कण्डी नदी में बाढ़ की स्थिति बनने पर तारापुर, बनियागांव, बजावंड, बेलगांव, उलनार, कोहकापाल, मालगांव, टंलनार, धोबीगुड़ा, चितालूर, कुरूसपाल और कावापाल जैसे गांव प्रभावित हो सकते हैं।

जगदलपुर तहसील में इंद्रावती नदी में बाढ़ आने की स्थिति में धनपुंजी, नगरनार, भेजापदर, नदीबोड़ना, उपनपाल, आसना, छेपड़ागुड़ा, कालीपुर, घाटपदमुर, कुम्हरावंड, बालीकोन्टा, तुरेनार, कलचा और स्वयं जगदलपुर शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का असर पड़ सकता है।

लोहण्डीगुड़ा तहसील में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने पर मारडूम, टाकरागुड़ा, बड़ांजी, कुम्हलीज बेनीधाराऊर, चित्रकोट, चंदेला और ककनार प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं।

इसी तरह, बस्तर तहसील में इंद्रावती नदी में बाढ़ की स्थिति बनने पर बड़ेचकवा, पटेलपारा, पल्लारी, खोटलापाल और बड़ेअलिनार में असर पड़ सकता है। दरभा तहसील के छिंदगुर और कोलेंग गांव इंद्रावती नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि बास्तानार तहसील में बड़े काकलूर (कुहचेवाक) भी संभावित प्रभावित गांवों में से एक है।

नारंगी नदी भी चिंता का कारण और प्रशासन की तैयारी

इंद्रावती नदी के साथ-साथ, नारंगी नदी के जलस्तर पर भी जिला प्रशासन की कड़ी नजर है। नारंगी नदी में बाढ़ आने की स्थिति में बस्तर तहसील के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें पालाबहार, बड़ेआमाबाल, कोहकासिवनी, मुण्डागांव, भैसगांव, मधोता, बाकेल, राजपुर, रोतमा, चितलवार, खोटलापारा, बड़ेचकवा, सिवनी, नारायणपाल, घोटिया और बोदरा प्रमुख हैं। इन सभी क्षेत्रों में संभावित खतरे को देखते हुए विशेष निगरानी रखी जा रही है और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

प्रशासन ने लगातार बारिश और बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को सतर्क रहने की सूचना देने के लिए कोटवारों के माध्यम से मुनादी तेज कर दी है। ग्रामीणों को नदी के बढ़ते जलस्तर से सावधान किया जा रहा है और सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। राजस्व विभाग और SDRF को भी स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 48 घंटे बस्तर जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इस दौरान लगातार बारिश के साथ यदि इंद्रावती और अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा अधिक गंभीर हो सकता है। प्रशासन ने सभी संभावित प्रभावित गांवों को चिन्हित कर वहां निगरानी बढ़ा दी है और आपातकालीन आश्रय स्थलों की पहचान भी की जा रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा सके।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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