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मुख्यमंत्री साय ने एमएसपी वृद्धि को बताया किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम

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मुख्यमंत्री साय ने एमएसपी वृद्धि को बताया किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में केंद्र सरकार द्...

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई वृद्धि को किसानों के हित में एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री साय ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया। यह कदम किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करेगा और राज्य में किसानों के बीच एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है, विशेषकर धान और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादकों के लिए।

किसानों के लिए केंद्र का ऐतिहासिक निर्णय।

केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के एमएसपी में की गई यह बढ़ोतरी किसानों को उनकी लागत का कम से कम 1.5 गुना मूल्य सुनिश्चित करने के सरकार के संकल्प को दर्शाती है। इस बार धान (सामान्य) के एमएसपी में ₹117 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिससे यह ₹2300 प्रति क्विंटल हो गया है। इसी प्रकार, धान (ग्रेड-ए) का एमएसपी ₹2320 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल जैसी अन्य प्रमुख खरीफ फसलों के एमएसपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। उदाहरण के लिए, मक्के के एमएसपी में ₹135 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है, जबकि अरहर और उड़द के एमएसपी में भी संतोषजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह कदम किसानों को बेहतर मूल्य के साथ कृषि उत्पादन में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय का बयान और छत्तीसगढ़ पर प्रभाव।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने बयान में कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला किसानों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में किसान धान और अन्य खरीफ फसलों की खेती करते हैं। एमएसपी में वृद्धि से इन किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में पर्याप्त सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार किसानों के कल्याण के लिए काम कर रही है। एमएसपी में यह बढ़ोतरी उसी दिशा में एक और मजबूत कदम है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार भी किसानों की भलाई के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। केंद्र के इस निर्णय से राज्य सरकार के प्रयासों को और बल मिलेगा और छत्तीसगढ़ के किसान अधिक सशक्त और समृद्ध बनेंगे। यह वृद्धि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ उन्हें आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रेरित करेगी, जिससे समग्र कृषि उत्पादकता बढ़ेगी।

एमएसपी: किसानों की समृद्धि का आधार।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदती है, ताकि उन्हें बाजार की अस्थिरता से बचाया जा सके और उनकी लागत से अधिक का लाभ सुनिश्चित हो सके। एमएसपी प्रणाली भारत में कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रही है, जो किसानों को एक निश्चित आय की गारंटी देती है। पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र सरकार ने डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप एमएसपी को उत्पादन लागत के 1.5 गुना करने के सिद्धांत को लागू किया है। यह नीति किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने और उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कराने में सहायक रही है। एमएसपी में लगातार वृद्धि दर्शाती है कि सरकार कृषि को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानती है और इसे मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह किसानों को निश्चितता प्रदान करता है कि उनकी उपज को न्यूनतम मूल्य मिलेगा, भले ही बाजार में कीमतें गिरें।

कृषि क्षेत्र में सतत विकास और भविष्य की राह।

केंद्र सरकार केवल एमएसपी बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधारों के लिए भी प्रतिबद्ध है। इनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं शामिल हैं, जो किसानों को विभिन्न स्तरों पर सहायता प्रदान करती हैं। एमएसपी में वृद्धि के साथ-साथ, सरकार कृषि ऋण उपलब्धता, बाजार तक पहुंच, और भंडारण सुविधाओं में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। डिजिटल तकनीकों और कृषि-स्टार्टअप को बढ़ावा देकर, सरकार कृषि को अधिक कुशल और लाभदायक बनाने का लक्ष्य रख रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से भारतीय कृषि क्षेत्र एक नए युग में प्रवेश करेगा, जहां किसान आत्मनिर्भर होंगे और देश की खाद्य सुरक्षा में अभूतपूर्व योगदान देंगे।

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