छत्तीसगढ़ 8 मिनट पढ़ें

धमतरी में मानसून से जलजनित बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग सतर्क

13 व्यूज़
धमतरी में मानसून से जलजनित बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग सतर्क
छत्तीसगढ़

धमतरी जिले में मानसून की सक्रियता के साथ ही जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संभावित खतरे को देखते हुए जिलेभर में अलर्ट जारी कर दिया है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे डायरिया, उल्टी, हैजा, पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों से बचाव के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरतें। यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बारिश के मौसम में दूषित पानी और भोजन के कारण इन बीमारियों के फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है, साथ ही दवाओं और ओआरएस घोल का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने को कहा है।

जलजनित बीमारियों का बढ़ता प्रकोप

मानसून का मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां लेकर आता है, जिनमें जलजनित बीमारियां प्रमुख हैं। बारिश के कारण जगह-जगह पानी का जमाव होता है, जिससे मच्छरों के पनपने और दूषित पेयजल की समस्या बढ़ जाती है। धमतरी जैसे जिलों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता की कमी या पेयजल स्रोतों के दूषित होने से ये बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। डायरिया और उल्टी जैसी बीमारियां तो सामान्य हैं, लेकिन हैजा, पीलिया और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियां जानलेवा भी हो सकती हैं। मलेरिया और डेंगू का खतरा भी बढ़ जाता है क्योंकि मच्छर जनित बीमारियों के लिए भी यह मौसम अनुकूल होता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को इन बीमारियों का अधिक खतरा होता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उचित कदम न उठाए जाएं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि मानसून के दौरान ऐसे मामलों में 20-30 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां और एडवाइजरी

धमतरी स्वास्थ्य विभाग ने मानसून के मद्देनजर व्यापक तैयारियां की हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों में रेपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है, जो किसी भी प्रकोप की स्थिति में तत्काल कार्रवाई कर सकेगी। जीवनरक्षक दवाओं, ओआरएस घोल, क्लोरीन की गोलियों और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों को घर-घर जाकर स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने और बीमारियों के लक्षणों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। विभाग ने आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें निम्नलिखित मुख्य सावधानियां शामिल हैं:

* उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

* खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।

* खुले में रखे या बासी खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें।

* फल और सब्जियों को उपयोग करने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।

* अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छरों का प्रजनन न हो।

* रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।

* शौचालय का उपयोग करें और खुले में शौच न करें।

यदि किसी को डायरिया, उल्टी, बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखें, तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें।स्वयं दवा लेने से बचें।*

सामुदायिक भागीदारी और रोकथाम के उपाय

जलजनित बीमारियों की रोकथाम में सामुदायिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से ही इस चुनौती का सामना नहीं किया जा सकता। स्थानीय नगर निकायों और पंचायतों को पेयजल स्रोतों की नियमित जांच और सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए। पानी की टंकियों की सफाई और क्लोरीन का सही मात्रा में उपयोग करना आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर में और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी लेनी होगी। बच्चों को हाथ धोने और साफ-सफाई के महत्व के बारे में सिखाना चाहिए। स्कूलों में भी स्वच्छता और स्वास्थ्य शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। बाहर के ठेले वाले खाद्य पदार्थों और कटे हुए फलों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि वे अक्सर दूषित होते हैं। जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इन बीमारियों के प्रति सचेत करना और बचाव के तरीके बताना बेहद जरूरी है। स्वच्छता और सतर्कता ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

आपातकालीन प्रबंधन और भविष्य की रणनीति

स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर किसी भी बड़े प्रकोप की स्थिति से निपटने के लिए एक समन्वित रणनीति तैयार की है। इसमें अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ की तैनाती, एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आवश्यकता पड़ने पर अस्थाई चिकित्सा शिविरों का आयोजन शामिल है। विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और किसी भी असामान्य वृद्धि की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित हो सकती है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर व्यक्ति तक स्वच्छ पानी और बुनियादी स्वच्छता की सुविधाएं पहुंचें। दीर्घकालिक रणनीति के तहत, पेयजल आपूर्ति प्रणालियों को और अधिक सुरक्षित बनाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर करने पर भी विचार किया जा रहा है। इन बीमारियों से बचाव के लिए सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी ही सबसे बड़ा हथियार है।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक