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दक्षिण कोरिया में भीषण गर्मी का प्रकोप: रिकॉर्ड टूटे, **16** की मौत

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दक्षिण कोरिया में भीषण गर्मी का प्रकोप: रिकॉर्ड टूटे, **16** की मौत
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दक्षिण कोरिया इस सप्ताह एक अभूतपूर्व और घातक गर्मी की लहर की चपेट में है, जिसने देश के इतिहास में सबसे गर्म तापमान के पिछले रिकॉर्ड को तीन बार तोड़ दिया है। इस अत्यधिक मौसमी घटना के कारण अब तक कम से कम 16 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जिससे पूरे देश में चिंता और आपातकालीन प्रतिक्रियाएँ बढ़ गई हैं। यह भीषण गर्मी दक्षिण कोरिया के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है, जिससे सामान्य जनजीवन बाधित हो गया है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं। विशेषज्ञ इस असाधारण गर्मी के लिए जलवायु परिवर्तन और प्रशांत महासागर में ला नीना के प्रभाव के संयोजन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जो इस क्षेत्र में उच्च दबाव प्रणाली को मजबूत कर रहा है।

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का कहर

दक्षिण कोरिया में इस सप्ताह दर्ज किए गए तापमान ने दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे सरकार को देशव्यापी गर्मी की चेतावनी जारी करनी पड़ी है। राजधानी सियोल सहित प्रमुख शहरों में, पारा लगातार 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच मँडरा रहा है, जबकि आंतरिक और दक्षिणी प्रांतों जैसे डेगू और बुसान में यह और भी अधिक दर्ज किया गया है। यह असामान्य रूप से उच्च तापमान के साथ-साथ उच्च आर्द्रता ने "महसूस किए गए तापमान" को और भी असहनीय बना दिया है। मौसम विज्ञान एजेंसियों ने बताया कि मंगलवार, गुरुवार और फिर शनिवार को देश के विभिन्न हिस्सों में नए तापमान रिकॉर्ड स्थापित किए गए, जो इस गर्मी की लहर की गंभीरता को दर्शाता है। कई क्षेत्रों में रात का तापमान भी 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा, जिससे लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिली और 'उष्णकटिबंधीय रातें' दर्ज की गईं। यह स्थिति विशेष रूप से बुजुर्गों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए खतरनाक साबित हो रही है।

जनजीवन और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव

इस भीषण गर्मी का दक्षिण कोरिया के जनजीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गहरा और विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। अब तक हुई 16 मौतों में से अधिकांश बुजुर्ग लोग हैं, जो गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, और वे लोग हैं जो खुले में काम करते हैं, जैसे किसान या निर्माण श्रमिक। अस्पतालों में हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय (सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक) बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि फसलें सूख रही हैं और पशुधन गर्मी से मर रहे हैं। कई स्कूल और कॉलेज भी गर्मी के कारण अपनी कक्षाओं के समय में बदलाव कर रहे हैं या ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित कर रहे हैं ताकि छात्रों को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके।

सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक उपाय

दक्षिण कोरियाई सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई आपातकालीन उपाय किए हैं। राष्ट्रपति ने तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया है और सभी संबंधित मंत्रालयों को नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। पूरे देश में हजारों 'कूलिंग सेंटर' स्थापित किए गए हैं, जहाँ लोग वातानुकूलित वातावरण में गर्मी से राहत पा सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर पानी के फव्वारे और अस्थायी पानी की आपूर्ति के बिंदु बढ़ाए गए हैं। सरकार ने किसानों और निर्माण श्रमिकों के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें उन्हें नियमित अंतराल पर ब्रेक लेने और हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी गई है। ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली की खपत पर बारीकी से नजर रखी है ताकि बिजली कटौती से बचा जा सके, क्योंकि एयर कंडीशनिंग का उपयोग बढ़ गया है। दीर्घकालिक उपायों के तहत, सरकार भविष्य में ऐसी चरम मौसमी घटनाओं का सामना करने के लिए शहरी हरियाली बढ़ाने, गर्मी प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण और जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों को मजबूत करने पर विचार कर रही है।

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भविष्य की चुनौतियाँ और वैश्विक संदर्भ

दक्षिण कोरिया में यह भीषण गर्मी की लहर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की एक स्पष्ट चेतावनी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो ऐसी चरम मौसमी घटनाएँ भविष्य में और अधिक सामान्य और तीव्र हो सकती हैं। यह केवल दक्षिण कोरिया की समस्या नहीं है; हाल के वर्षों में दुनिया के अन्य हिस्सों, जैसे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहरें देखी गई हैं। यह वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और शमन के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना इस चुनौती का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण होगा ताकि भविष्य में ऐसी मानवीय त्रासदियों को रोका जा सके और एक स्थायी वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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