गरियाबंद में आदिवासी एकता का शक्ति प्रदर्शन, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों पर गरजे संजय सिंह व अमित बघेल
गरियाबंद। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर गरियाबंद में रविवार को आदिवासी समाज ने जल-जंगल-जमीन, संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली विधायक मुकेश सहरावत, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल, विधायक जनक राम ध्रुव, जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम से पहले शहर में बाइक रैली निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और ग्रामीण शामिल हुए। रैली के दौरान आतिशबाजी और नारों के बीच अतिथियों का स्वागत किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी विरासत, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने क्या कहा
सभा को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि देश में लगभग साढ़े 10 करोड़ आदिवासी हैं और आजादी के बाद से यह समाज अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को भारत रत्न देने की मांग करते हुए कहा कि अब तक 53 लोगों को यह सम्मान मिल चुका है, लेकिन किसी प्रमुख आदिवासी योद्धा को यह सम्मान नहीं मिला।
संजय सिंह ने न्यायपालिका में आदिवासी प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आदिवासी समाज की भागीदारी बेहद कम रही है। उन्होंने शिक्षा को अधिकारों की लड़ाई का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति, पेपर लीक, रोजगार और प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने पेसा कानून और ग्रामसभा की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन से जुड़े निर्णयों में ग्रामसभा की सहमति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने समाज से अपने वोट की ताकत पहचानने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने क्या कहा
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने कहा कि संविधान लागू हुए 76 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आदिवासी समाज आज भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि “जल, जंगल और जमीन बचेगी, तभी आदिवासी समाज बचेगा।”
बघेल ने समाज से संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया और कहा कि वोट की कीमत किसी लालच से नहीं आंकी जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से चुनाव के समय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नेताओं से जवाब मांगने की अपील की।
उन्होंने आगामी 2028 विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि आदिवासी समाज केवल वोट बैंक नहीं रहेगा, बल्कि सत्ता और नीति निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। बघेल ने हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाते हुए पर्यावरण और आदिवासी हितों की रक्षा की आवश्यकता बताई।
विधायक जनक राम ध्रुव ने क्या कहा
विधायक जनक राम ध्रुव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकार जल, जंगल और जमीन से जुड़े हैं और उनकी रक्षा के लिए समाज की एकजुटता आवश्यक है। लोकेश्वरी नेताम ने शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को समाज की प्राथमिकता बताया।
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