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अघोषित बिजली कटौती पर कलेक्टर सख्त: अधिकारियों को तत्काल कॉल उठाने के निर्देश

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अघोषित बिजली कटौती पर कलेक्टर सख्त: अधिकारियों को तत्काल कॉल उठाने के निर्देश
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जिले में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से परेशान आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से, कलेक्टर ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में, कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिजली संबंधी शिकायतों पर प्राप्त होने वाले फोन कॉल का तत्काल जवाब दिया जाए और समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। यह निर्णय जिले भर से मिल रही व्यापक शिकायतों और बिजली विभाग के अधिकारियों की कथित लापरवाही के बाद लिया गया है, जिससे गर्मी के इस मौसम में आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कलेक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि जनता की परेशानी को प्राथमिकता से दूर किया जाना चाहिए और किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर की कड़ी चेतावनी

कलेक्टर ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई शिकायतें मिल रही हैं कि बिजली कटौती के दौरान जब उपभोक्ता विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों को फोन करते हैं, तो या तो उनके फोन नहीं उठाए जाते या फिर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। इस लापरवाही के कारण जनता में भारी आक्रोश है। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी शिकायतें मिलती हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे 24x7 सक्रिय रहें और यह सुनिश्चित करें कि जनता को बिजली संबंधी समस्याओं के लिए भटकना न पड़े। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जवाबदेही तय की जाएगी और जो अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं करेंगे, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। इस कड़ी चेतावनी से ऊर्जा विभाग में हड़कंप मच गया है।

ऊर्जा विभाग पर बढ़ा दबाव और नए निर्देश

कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद ऊर्जा विभाग पर जवाबदेही का दबाव काफी बढ़ गया है। कलेक्टर ने सभी कार्यपालन यंत्रियों, सहायक यंत्रियों और कनिष्ठ यंत्रियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बिजली आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखें। उन्हें यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी अघोषित कटौती से पहले, यदि संभव हो, तो जनता को सूचित किया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एक केंद्रीकृत शिकायत प्रणाली को मजबूत करने का भी निर्देश दिया है, जहां सभी शिकायतों को विधिवत दर्ज किया जाए और उनके समाधान की समय-सीमा निर्धारित की जाए। कलेक्टर ने यह भी कहा कि विभाग को एक हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय रखना चाहिए, जिस पर जनता आसानी से संपर्क कर सके और त्वरित सहायता प्राप्त कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजली आपूर्ति एक आवश्यक सेवा है और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा से जनजीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

जनजीवन पर असर और उम्मीदें

अघोषित बिजली कटौती का जिले के जनजीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में, खासकर रात के समय होने वाली कटौती से बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई छोटे व्यवसायों और उद्योगों को भी उत्पादन में बाधा का सामना करना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है। पानी की आपूर्ति भी प्रभावित होती है, क्योंकि कई स्थानों पर पानी की पंपिंग बिजली पर निर्भर करती है। कलेक्टर के इस सख्त कदम से जनता में आशा की नई किरण जगी है। स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर के इस निर्णय का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब बिजली विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को अधिक गंभीरता से लेंगे और स्थिति में सुधार होगा। लोगों का मानना है कि ऐसे हस्तक्षेप ही अधिकारियों को जवाबदेह बनाते हैं और प्रशासन पर उनका विश्वास मजबूत करते हैं। यह कदम न केवल बिजली आपूर्ति में सुधार लाएगा, बल्कि सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ाएगा।

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भविष्य की रणनीति और निगरानी

कलेक्टर ने भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वे मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित करें और उनमें बिजली आपूर्ति की स्थिति, प्राप्त शिकायतों और उनके समाधान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके अलावा, उन्होंने एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर भी विचार करने को कहा है, जो सीधे कलेक्टर कार्यालय को बिजली संबंधी शिकायतों और उनके निवारण की जानकारी देगा। कलेक्टर ने पुनः दोहराया कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है और जनता को परेशानी होती रहती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उनके सेवा रिकॉर्ड में भी इसका उल्लेख किया जाएगा। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि अधिकारी न केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान करें, बल्कि दीर्घकालिक योजनाएं भी बनाएं ताकि जिले में बिजली आपूर्ति सुचारु और विश्वसनीय बनी रहे।

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