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शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ के 63 शिक्षक सम्मानित, 4 को स्मृति पुरस्कार

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शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ के 63 शिक्षक सम्मानित, 4 को स्मृति पुरस्कार
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शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर, 5 सितंबर को, छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित करने की घोषणा की है। इस वर्ष के सम्मान समारोह में एक विशेष पहल के तहत, चार शिक्षकों को प्रतिष्ठित 'स्मृति पुरस्कार' से भी नवाजा जाएगा, जो शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट और दीर्घकालिक प्रभाव को रेखांकित करता है। यह सम्मान समारोह रायपुर स्थित एक भव्य सभागार में आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। इस पहल का उद्देश्य उन शिक्षकों के अथक प्रयासों को स्वीकार करना है जिन्होंने छात्रों के भविष्य को संवारने और राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 'स्मृति पुरस्कार' प्राप्त करने वाले प्रमुख नामों में खैरागढ़ के राजेश, कोरबा के कामता और दुर्ग की प्रज्ञा शामिल हैं, जिनके अभिनव शिक्षण पद्धतियों और सामुदायिक जुड़ाव ने एक मिसाल कायम की है।

उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान और चयन प्रक्रिया

राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किए जा रहे 63 शिक्षकों का चयन एक कठोर और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। इन शिक्षकों में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कक्षाओं में नवाचार लाने, छात्रों की उपस्थिति दर में सुधार करने, ड्रॉपआउट दर को कम करने और शैक्षिक परिणामों को बेहतर बनाने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। चयन समिति ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के शिक्षकों के योगदान पर विशेष ध्यान दिया, खासकर उन लोगों पर जिन्होंने दुर्गम परिस्थितियों में भी शिक्षा की लौ जलाई रखी। शिक्षकों के नामांकन जिला शिक्षा अधिकारियों और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किए गए थे, जिसके बाद एक राज्य-स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने उनके कार्यों, उपलब्धियों और समुदाय पर उनके प्रभाव का गहन मूल्यांकन किया।

इन सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, एक स्मृति चिन्ह और नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान को मान्यता देता है, बल्कि अन्य शिक्षकों को भी प्रेरित करता है कि वे अपने पेशे के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चयन प्रक्रिया में शिक्षकों द्वारा अपनाई गई नई शिक्षण तकनीकों, डिजिटल उपकरणों के उपयोग, पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों में नैतिक मूल्यों के विकास जैसे पहलुओं को प्रमुखता दी गई। इस वर्ष विशेष रूप से उन शिक्षकों को प्राथमिकता दी गई जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा को सुलभ बनाने और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से छात्रों तक पहुंचने के लिए रचनात्मक समाधान विकसित किए।

विशेष 'स्मृति पुरस्कार' की महत्ता

इस वर्ष प्रस्तुत किया जा रहा 'स्मृति पुरस्कार' शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों के लिए है। यह पुरस्कार उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने पूरे करियर में शिक्षा के प्रति अद्वितीय समर्पण दिखाया है और जिनके प्रयासों का एक स्थायी और व्यापक प्रभाव पड़ा है। खैरागढ़ के राजेश को ग्रामीण शिक्षा में उनके क्रांतिकारी कार्यों के लिए चुना गया है। उन्होंने अपने विद्यालय में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित कीं और स्थानीय कला एवं संस्कृति को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया, जिससे छात्रों में सीखने के प्रति गहरी रुचि जागी। कोरबा के कामता को आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार और वंचित बच्चों को मुख्यधारा में लाने के उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण पर जोर दिया।

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दुर्ग की प्रज्ञा को डिजिटल शिक्षा और विज्ञान के नवाचारी शिक्षण में उनके अग्रणी कार्य के लिए यह पुरस्कार मिलेगा। उन्होंने छात्रों के लिए वर्चुअल लैब और इंटरैक्टिव मॉड्यूल विकसित किए, जिससे विज्ञान की अवधारणाओं को समझना आसान हो गया। चौथे 'स्मृति पुरस्कार' विजेता का नाम जल्द ही घोषित किया जाएगा, जिनके योगदान की प्रकृति भी इसी तरह की विशिष्टता वाली होगी। 'स्मृति पुरस्कार' में नियमित सम्मान से अधिक नकद राशि, एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया पदक और एक विस्तृत प्रशस्ति पत्र शामिल है, जो उनके अनुकरणीय सेवा को रेखांकित करता है। यह पुरस्कार राज्य सरकार की ओर से उन 'गुरुओं' के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है जिन्होंने अपना जीवन शिक्षा के उत्थान और आने वाली पीढ़ियों के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया है।

शिक्षा में नवाचार और राज्य सरकार की पहल

छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा को राज्य के विकास का आधार मानती है और इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। शिक्षकों को सम्मानित करने की यह पहल राज्य की समग्र शिक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार शिक्षकों के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि वे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से लैस हो सकें। 'स्मृति पुरस्कार' और अन्य शिक्षक सम्मान राज्य में एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देते हैं जहाँ नवाचार, समर्पण और उत्कृष्टता को सराहा जाता है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में घोषणा की है कि सरकार डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दूरदराज के क्षेत्रों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश करेगी।

शिक्षा मंत्री ने अपने एक बयान में कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र के निर्माता होते हैं और उनके बिना किसी भी समाज की प्रगति संभव नहीं है। यह सम्मान समारोह महान शिक्षाविद और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के आदर्शों का प्रतिबिंब है, जिनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो। इन सम्मानों के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है और उन्हें समाज में सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए। यह पहल राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने और भविष्य की पीढ़ियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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