नेपाल: त्रिशूली सुरंग से 10 दिन बाद जिंदा निकले दो मजदूर
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नेपाल की त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना में एक अभूतपूर्व घटना सामने आई है, जहां बाढ़ के कारण सुरंग में फंसे दो मजदूर, प्रेम परियार और नरेश सुनार, 10 दिनों के अथक बचाव अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए हैं। यह घटना 10 अगस्त 2024 को तब घटी जब भारी मानसूनी वर्षा के कारण त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आ गई और परियोजना की एक सुरंग में काम कर रहे ये मजदूर फंस गए। उन्हें अंततः 20 अगस्त 2024 को नुवाकोट जिले में स्थित इस परियोजना से बचाया गया, जो काठमांडू से लगभग 70 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। यह बचाव अभियान एक बड़ा चमत्कार माना जा रहा है, जिसने मौत के मुंह से निकले इन मजदूरों के लिए जिंदगी की नई उम्मीद जगाई है। इस घटना ने मानवीय दृढ़ता की एक नई कहानी लिखी है।
संघर्ष और अस्तित्व की कहानी
प्रेम परियार और नरेश सुनार के लिए सुरंग के भीतर बीते 10 दिन किसी नरक से कम नहीं थे। लगभग 400 मीटर गहरी सुरंग में, जहां ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था और मलबा तथा कीचड़ भरा हुआ था, उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ी। जानकारी के अनुसार, उन्होंने पीने के लिए सुरंग में जमा हुए पानी का इस्तेमाल किया और अपने पास मौजूद कुछ सूखे स्नैक्स खाकर अपनी भूख मिटाई। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और धैर्य ने ही उन्हें इस भयावह स्थिति में जीवित रहने में मदद की। शुरुआती घंटों में बचाव दल को उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, और जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनके जीवित होने की उम्मीदें धूमिल होती गईं। हालांकि, अंदर से मिली हल्की प्रतिक्रियाओं ने बचाव दल को उनके जीवित होने का विश्वास दिलाया।
जटिल बचाव अभियान
इस जटिल बचाव अभियान में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के साथ-साथ स्थानीय स्वयंसेवकों और त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना के कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरंग के प्रवेश द्वार पर मलबा, कीचड़ और पानी का उच्च स्तर बचाव कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन रहा था। बचाव दल को सुरंग के भीतर तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरणों और तकनीकों का उपयोग करना पड़ा, जिसमें शक्तिशाली पानी निकालने वाले पंप और मलबा हटाने वाली मशीनें शामिल थीं। लगातार बारिश और खराब मौसम ने भी बचाव प्रयासों को और मुश्किल बना दिया था। विशेषज्ञों की एक टीम ने स्थिति का आकलन किया और एक विस्तृत बचाव योजना तैयार की। दिन-रात चले इस अभियान के दौरान, बचाव दल ने कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। सुरंग के भीतर हवा का संचार बनाए रखने के लिए विशेष प्रणालियां भी स्थापित की गईं। अंततः, कड़ी मशक्कत के बाद, बचाव दल उन तक पहुंचने में सफल रहा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस पूरे अभियान को अंजाम देने में 10 दिनों का समय लगा, जो इसकी जटिलता और चुनौतियों को दर्शाता है।
परियोजना और भविष्य की चिंताएं
त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना, जिसका स्वामित्व नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पास है और जिसका निर्माण जालपादेवी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा था, नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस बाढ़ की घटना ने न केवल परियोजना के काम को बाधित किया है, बल्कि इसे भारी वित्तीय नुकसान भी पहुंचाया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सुरंगों और बुनियादी ढांचे की क्षति की मरम्मत में लंबा समय और बड़ी लागत आएगी। इस घटना ने जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेपाल सरकार ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। यह जांच सुरक्षा मानकों के पालन और बाढ़ चेतावनी प्रणालियों की प्रभावशीलता पर केंद्रित होगी। सरकार ने प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। परियोजना के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, और वे मांग कर रहे हैं कि काम फिर से शुरू करने से पहले व्यापक सुरक्षा ऑडिट किया जाए।
देशभर में खुशी और राहत
प्रेम परियार और नरेश सुनार के सुरक्षित बचाव की खबर ने पूरे नेपाल में खुशी और राहत की लहर दौड़ा दी है। उनके परिजनों ने, जो पिछले दस दिनों से अनिश्चितता और चिंता में जी रहे थे, बचाव दल और सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया है। काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती होने के बाद, डॉक्टरों ने बताया कि वे कमजोर लेकिन स्थिर स्थिति में हैं और उनकी गहन चिकित्सा देखभाल की जा रही है। यह घटना मानवीय लचीलेपन और एकजुटता का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गई है, जो यह दर्शाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सोशल मीडिया पर लोगों ने बचाव दल के अथक प्रयासों की सराहना की है और मजदूरों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी इस सफल बचाव अभियान के लिए बचाव दल को बधाई दी है।
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