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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि: वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर ने बताए शुभ दिशा, भोग और पूजा के खास नियम | Raipur News Today

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि: वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर ने बताए शुभ दिशा, भोग और पूजा के खास नियम | Raipur News Today
रायपुर

आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का प्रमुख धार्मिक पर्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जन्माष्टमी पर श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा कर उत्सव मनाते हैं।

वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर के अनुसार, जन्माष्टमी की पूजा में धार्मिक विधि के साथ पूजा स्थल की दिशा और वातावरण का भी विशेष महत्व माना जाता है। घर में पूजा के दौरान स्वच्छता, सकारात्मक वातावरण और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पूजा की तैयारी

जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थल को फूलों, दीपक और भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या बाल गोपाल की मूर्ति से सजाएं। पूजा में पीले या हल्के रंग के वस्त्र और सजावटी सामग्री का प्रयोग शुभ माना जाता है।

राणा सिकंदर के अनुसार, पूजा स्थल को ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में रखना सकारात्मक माना जाता है। यदि संभव हो तो बाल गोपाल की मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें और उनके सामने दीपक जलाएं।

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मध्यरात्रि में करें श्रीकृष्ण पूजा

जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय की जाती है। सबसे पहले बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद स्वच्छ जल से अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।

भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, फूल, तुलसी दल और माखन-मिश्री अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है।

माखन-मिश्री और धनिए की पंजीरी का भोग

श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री अत्यंत प्रिय मानी जाती है। जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री के साथ फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और श्रद्धालुओं में वितरित करें।

वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर के अनुसार, पूजा के दौरान घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहिए। अनावश्यक अव्यवस्था से बचें और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें। दीपक जलाने और भगवान का स्मरण करने से घर में आध्यात्मिक वातावरण बनने में सहायता मिलती है।

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