छत्तीसगढ़ में गहरे दबाव से बदला मौसम, 3 दिन भारी बारिश की संभावना
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छत्तीसगढ़ में 24 सितंबर, 2026 को उत्तर कोस्टल आंध्र प्रदेश में बने एक गहरे दबाव के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से राज्य के कई जिलों में अगले तीन दिनों तक हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर अति भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम में आए इस बदलाव के चलते अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दक्षिणी छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट भी जारी किया है, जहां 200 मिलीमीटर से अधिक वर्षा का अनुमान है। यह गहरा दबाव, जिसे पहले मीडिया में 'चक्रवात अर्नब' के नाम से संदर्भित किया जा रहा था, वास्तव में एक डीप डिप्रेशन है, जिसकी पुष्टि मौसम वैज्ञानिकों ने की है।
गहरे दबाव का प्रभाव और आगामी 24 घंटे
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में यह गहरा दबाव उत्तर कोस्टल आंध्र प्रदेश और इससे लगे हुए क्षेत्रों पर केंद्रित है। आगामी 24 घंटों के भीतर इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की प्रबल संभावना है। रायपुर की मौसम वैज्ञानिक गायत्रीवाणी कांचीभोटला ने बताया, "पिछले दो दिनों से एक डीप डिप्रेशन बना हुआ है, जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ के मौसम में यह बदलाव देखा गया है।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि आज की स्थिति में डीप डिप्रेशन उत्तर कोस्टल आंध्र प्रदेश और उससे लगे हुए क्षेत्र में है, और इसके प्रभाव से दक्षिणी छत्तीसगढ़ के एक-दो जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। यह रेड अलर्ट उन क्षेत्रों के लिए है जहां 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने की आशंका है, जो सामान्य से काफी अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली का असर उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में भी आज और कल तक बने रहने की संभावना है।
मध्य एवं दक्षिण छत्तीसगढ़ पर विशेष असर
गहरे दबाव के कारण मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ ही कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक गायत्रीवाणी कांचीभोटला ने ओडिशा में 'अर्नब साइक्लोन' के सवाल पर स्पष्ट किया कि ऐसा कोई सिस्टम नहीं बना है, बल्कि यह केवल एक गहरा दबाव (डीप डिप्रेशन) है। उन्होंने कहा कि इस डीप डिप्रेशन का असर पूरे छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक रहने की संभावना है, जिसके बाद प्रदेश में वर्षा की गतिविधि में कमी आने की उम्मीद है। यह मौसमी गतिविधि धान की फसल के लिए कुछ हद तक लाभदायक हो सकती है, लेकिन अति भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव और कृषि को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन को संभावित बाढ़ और जलजमाव की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
राज्य में वर्षा की स्थिति और आंकड़े
1 जून से 24 सितंबर, 2026 तक की स्थिति में छत्तीसगढ़ में सामान्य से 5% कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य में सामान्य वर्षा 1119.4 मिलीमीटर होनी थी, लेकिन अब तक केवल 1063.6 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है। हालांकि, कुछ जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा भी हुई है।
1 जून से 24 सितंबर तक सामान्य वर्षा वाले जिले:।
बालोद, बलौदा बाजार, बस्तर, बीजापुर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, धमतरी, दुर्ग, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और जांजगीर।
1 जून से 24 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा वाले जिले:।
बलरामपुर, मुंगेली, नारायणपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़।
1 जून से 24 सितंबर तक सामान्य से कम वर्षा वाले जिले:।
बेमेतरा, जशपुर, कबीरधाम, कांकेर और सरगुजा।
यह आंकड़ों का विश्लेषण दर्शाता है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश का वितरण असमान रहा है, जिससे कुछ क्षेत्र अभी भी पानी की कमी का सामना कर रहे हैं जबकि कुछ में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हुई है। गहरे दबाव के कारण हो रही यह बारिश कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए राहत ला सकती है, लेकिन अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में चुनौती बढ़ा सकती है। मौसम विभाग ने किसानों और आम जनता को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।
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