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छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल: OPD ठप, 28 से इमरजेंसी भी बंद की चेतावनी

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छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल: OPD ठप, 28 से इमरजेंसी भी बंद की चेतावनी
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छत्तीसगढ़ के सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस व्यापक हड़ताल के कारण प्रदेशभर की स्वास्थ्य सेवाएं, विशेषकर ओपीडी (OPD) सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जूनियर डॉक्टर्स बॉन्ड पॉलिसी को खत्म करने, अपनी छात्रवृत्ति में वृद्धि करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसी प्रमुख मांगों पर अड़े हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 28 तारीख तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे इमरजेंसी सेवाओं को भी बंद कर देंगे।

मांगों का अंबार और प्रशासन की अनदेखी

जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल के पीछे कई गंभीर और लंबित मांगें हैं, जिन्हें प्रशासन द्वारा लगातार अनदेखा किया जा रहा है। उनकी सबसे प्रमुख मांग है कि राज्य की बॉन्ड पॉलिसी को पूरी तरह से समाप्त किया जाए। इसके अतिरिक्त, डॉक्टर्स अपनी छात्रवृत्ति में 30% की तत्काल वृद्धि, रेजिडेंट्स के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और ग्रामीण सेवा बॉन्ड की अवधि को एक साल से घटाकर छह महीने करने की मांग कर रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान सेवा देने वाले डॉक्टर्स को संविदा नियुक्ति में प्राथमिकता और वेटेज तथा एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को पर्याप्त छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराना भी उनकी मांगों में शामिल है। JDA का कहना है कि प्रशासन ने इन मांगों पर पहले भी आश्वासन ही दिए हैं, जिनका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, जिससे वे हड़ताल पर जाने को विवश हुए।

प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर

जूनियर डॉक्टर्स की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा और गंभीर असर छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। प्रदेश के सभी प्रमुख मेडिकल कॉलेज और उनसे संबद्ध अस्पतालों, जैसे कि मेकाहारा रायपुर, सिम्स बिलासपुर, डिमरापुर जगदलपुर, अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज, रायगढ़ और राजनांदगांव में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं। सुबह से ही मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, लेकिन डॉक्टरों के न होने से उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से आए मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ओपीडी सेवाओं के अलावा, कई गैर-आपातकालीन ऑपरेशन भी रद्द कर दिए गए हैं, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब केवल सीनियर डॉक्टर्स और फैकल्टी सदस्य ही उपलब्ध हैं, जो सीमित संख्या में होने के कारण सभी मरीजों को देख पाने में असमर्थ हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण सामान्य चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे मरीजों के परिजनों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि उनके मरीजों की हालत भी बिगड़ रही है।

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28 तारीख की चेतावनी और बिगड़ती स्थिति

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर एक स्पष्ट और कड़ा अल्टीमेटम दिया है। JDA के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सभी मांगें 28 तारीख तक पूरी नहीं की गईं, तो वे अपनी हड़ताल को और तेज करेंगे और इमरजेंसी सेवाओं को भी बंद कर देंगे। यह कदम राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है, क्योंकि इमरजेंसी सेवाएं किसी भी अस्पताल की रीढ़ होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की बाधा से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा होता है, तो राज्य में स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे हजारों मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

प्रशासन और सरकार पर अब जल्द से जल्द इस गतिरोध को समाप्त करने का दबाव बढ़ गया है। JDA ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं और तब तक हड़ताल जारी रखेंगे, जब तक सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती। यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि एक तरफ मरीजों की बढ़ती परेशानी है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों की जायज मांगें हैं। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करके कोई समाधान निकालना चाहिए, ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह से चरमराने से बचाया जा सके।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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