छत्तीसगढ़: 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को 6.60 करोड़, मुख्यधारा में लौटने का इनाम
छत्तीसगढ़ सरकार ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले 66 आत्मसमर्पित इनामी माओवादियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य की पुनर्वास नीति-2025 के तहत इन माओवादियों को कुल छह करोड़ 60 लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। यह कदम गुरुवार, 6 अगस्त, 2026 को उठाया गया, जिसका उद्देश्य इन व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन जीने और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग प्रदान करना है। यह पहल राज्य में शांति और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां माओवादी हिंसा एक बड़ी चुनौती रही है और जहां राज्य सरकार लगातार शांति स्थापित करने के लिए प्रयासरत है।
पुनर्वास नीति-2025: एक नया सवेरा
राज्य में लागू `माओवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025` एक दूरदर्शी प्रयास है, जो उन माओवादियों को दूसरा अवसर प्रदान करती है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे अपराध की दुनिया से बाहर आकर एक सामान्य और उत्पादक जीवन जी सकें। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोत्साहन राशि विशेष रूप से उन आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए है जिन पर पांच लाख रुपये या उससे अधिक का इनाम घोषित था। यह नीति उन लोगों को लक्षित करती है जो पूर्व में नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थे और अब बदलाव के इच्छुक हैं। नीति के तहत, यदि किसी आत्मसमर्पित माओवादी को सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं मिलती है, तो उन्हें इसके बदले एकमुश्त प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति को तुरंत आर्थिक सहायता मिले और वह अपने भविष्य की योजना बना सके। सरकार का मानना है कि यह आर्थिक प्रोत्साहन उन्हें फिर से आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने से रोकेगा और उन्हें समाज का अभिन्न अंग बनने में मदद करेगा। यह नीति राज्य की सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बल प्रयोग के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी अपनाती है।
लाभार्थियों का विवरण और आर्थिक सहायता
इस योजना के तहत, कुल 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को विभिन्न प्रोत्साहन राशियों से लाभ मिलेगा। इनमें से कुछ प्रमुख नाम और उन्हें मिलने वाली राशि का विवरण जारी किया गया है। बीजापुर जिले से, लच्छू फरसा को पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इसी तरह, मिटकी ककेम उर्फ सरिता और सीनू पदम उर्फ चिन्ना दोनों को आठ-आठ लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सुशीला हेमला उर्फ बुज्जी उर्फ विमला हेमला को पांच लाख रुपये मिलेंगे, जबकि लक्ष्मी माड़वी उर्फ खुटो को भी आठ लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इन विशिष्ट लाभार्थियों के अलावा, अन्य पात्र आत्मसमर्पित माओवादियों को भी उनकी पात्रता और पूर्व में घोषित इनाम की राशि के अनुसार आर्थिक सहायता वितरित की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र व्यक्तियों को इस नीति का लाभ मिले, जिससे वे एक नई शुरुआत कर सकें। यह आर्थिक सहायता उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने, छोटे व्यवसाय शुरू करने या कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। यह कदम उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर प्रदान करेगा और उन्हें एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
दीर्घकालिक सहयोग और शांति की दिशा में प्रयास
पुनर्वास नीति केवल एकमुश्त प्रोत्साहन राशि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए दीर्घकालिक समर्थन का भी प्रावधान करती है। एकमुश्त राशि के अतिरिक्त, आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक माओवादी को तत्काल नकद सहायता भी प्रदान की जाती है। इसके अलावा, उन्हें 36 महीने तक प्रतिमाह 10 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाएगा। यह मासिक मानदेय उन्हें एक स्थिर आय प्रदान करेगा, जब तक कि वे समाज में पूरी तरह से स्थापित नहीं हो जाते और कोई स्थायी रोजगार या व्यवसाय नहीं ढूंढ लेते। नीति में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान बड़े हथियारों या विस्फोटकों के बारे में जानकारी देने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन और इनाम राशि का है। यह प्रावधान माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने और उनके हथियारों के जखीरे को निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे राज्य में हिंसा में कमी आएगी। सरकार का यह कदम न केवल आत्मसमर्पण करने वालों को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि यह अन्य सक्रिय माओवादियों को भी हिंसा का रास्ता छोड़ने और शांतिपूर्ण जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। राज्य सरकार का यह मानना है कि समावेशी विकास और आर्थिक अवसर प्रदान करके ही नक्सलवाद की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। यह नीति छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने और राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई किरण पहुंचाने की दिशा में एक सशक्त पहल है, जिससे स्थानीय समुदायों का विश्वास सरकार में और मजबूत होगा।