चिकित्सा चूक और अवसाद से लड़कर शुभी बनीं भारत की नंबर 1
उत्तर प्रदेश की 16 वर्षीया शतरंज सनसनी शुभी गुप्ता ने हाल ही में शतरंज की दुनिया में एक अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है, जहां उन्होंने FIDE की गर्ल्स रेटिंग सूची में विश्व की नंबर 4 और भारत की नंबर 1 खिलाड़ी का खिताब जीता है। यह उल्लेखनीय सफलता ऐसे समय में आई है जब उन्होंने पिछले साल मार्च में उज़्बेकिस्तान में एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान हुई एक गंभीर चिकित्सा चूक और उसके बाद के अवसाद से संघर्ष किया था। गलत आईड्रॉप के कारण उनकी दृष्टि बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे उनका पहला व्यक्तिगत अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट बर्बाद हो गया था। इसके बावजूद, शुभी ने अपनी दृढ़ता और अथक प्रयासों से इस बाधा को पार किया और आज वह लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
उज़्बेकिस्तान में आईड्रॉप की भयानक चूक
यह घटना पिछले साल मार्च में घटी थी, जब शुभी गुप्ता अपने पहले व्यक्तिगत अंतरराष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट के लिए उज़्बेकिस्तान पहुंची थीं। उनके पिता प्रदीप ने बताया कि इससे पहले वह श्रीलंका और जॉर्जिया जैसे देशों की यात्रा कर चुकी थीं, लेकिन वे आधिकारिक आयोजनों के लिए थीं। उज़्बेकिस्तान उनका पहला स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था, जिसके लिए उनके परिवार ने काफी आर्थिक बोझ उठाया था। टूर्नामेंट शुरू होते ही, शुभी को बोर्ड पर धुंधला दिखाई देने लगा। इसका कारण एक अनजाने में हुई गलती थी: मेडिकल स्टोर ने उन्हें 0.1% के बजाय 1% घोल वाला आईड्रॉप दे दिया था, जो सामान्य से 100 गुना अधिक शक्तिशाली था। इस शक्तिशाली आईड्रॉप ने उनकी आँखों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे उनकी दृष्टि सात से आठ दिनों तक धुंधली रही। नतीजतन, वह ठीक से देख नहीं पाईं और उनका पूरा टूर्नामेंट बर्बाद हो गया। यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक भयानक अनुभव था, खासकर जब यह उनका पहला बड़ा व्यक्तिगत अंतरराष्ट्रीय मंच हो। इस घटना ने शुभी को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया था, और वह अवसाद से जूझने लगी थीं।
स्कूल के शौक से लॉकडाउन की तैयारी तक
शुभी गुप्ता की शतरंज यात्रा की शुरुआत आठ साल की उम्र में एक साधारण स्कूल गतिविधि के रूप में हुई थी। उनके स्कूल के शतरंज क्लब में यह एक शौक की कक्षा थी। जल्द ही, उन्होंने एक अंतर-विद्यालय प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया, जिसने उनकी रुचि को और बढ़ा दिया। इस उपलब्धि के बाद, उनके पिता ने उन्हें एक सप्ताहांत अकादमी में दाखिला दिलवाया, जहाँ उन्होंने शतरंज को गंभीरता से लेना शुरू किया। 2019 में, गंभीर रूप से खेलना शुरू करने के मुश्किल से छह महीने बाद, उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित अंडर-9 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लिया। इस आयोजन में उन्होंने प्रभावशाली 10वां स्थान हासिल किया और अपनी प्रारंभिक FIDE रेटिंग 1070 प्राप्त की। फिर 2020 में महामारी ने दस्तक दी। जहाँ अधिकांश बच्चों के लिए लॉकडाउन का मतलब स्क्रीन की लत थी, वहीं गाजियाबाद की इस विलक्षण बच्ची के लिए शतरंज ही एकांत में उसका एकमात्र साथी बन गया। 2020 में, जब उनकी रेटिंग 1095 पर अटकी हुई थी, उनके परिवार ने दिल्ली स्थित कोच प्रसेनजीत दत्ता से संपर्क किया। दत्ता ने उन दिनों को याद करते हुए बताया, “वह हर समय शतरंज में पूरी तरह डूबी रहती थी। मैं उसे जो भी अध्ययन सामग्री देता था, वह तुरंत उस पर काम करती थी। शुरू में उसकी बुनियादी बातें कमजोर थीं, इसलिए हमने उन पर अविश्वसनीय रूप से कड़ी मेहनत की।"
बाधाओं को पार कर विश्व पटल पर पहचान
पिछले साल उज़्बेकिस्तान में आईड्रॉप की घटना और उसके बाद के अवसाद से उबरना शुभी के लिए आसान नहीं था। यह उनकी मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है कि उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने कोच और परिवार के समर्थन से अपनी प्रशिक्षण जारी रखा और अपनी गलतियों से सीखा। सिर्फ पिछले महीने, शुभी गुप्ता जर्मनी गईं, जहाँ उन्होंने दो मजबूत IM (इंटरनेशनल मास्टर) टूर्नामेंट में भाग लिया। इन टूर्नामेंटों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें शानदार 184 रेटिंग अंक दिलाए, जिससे उनकी FIDE रेटिंग में महत्वपूर्ण उछाल आया। इस उपलब्धि के साथ, वह 37 स्थान ऊपर चढ़कर FIDE की गर्ल्स रेटिंग सूची में विश्व की नंबर 4 खिलाड़ी बन गईं। यह सूची 20 वर्ष और उससे कम उम्र की महिला खिलाड़ियों के लिए है। इसी के साथ, उन्होंने भारत में नंबर 1 का स्थान भी हासिल किया। उनकी यह तेजी से बढ़ती सफलता उनकी अविश्वसनीय प्रतिभा, कड़ी मेहनत और चुनौतियों का सामना करने की उनकी अटूट भावना को दर्शाती है। शुभी गुप्ता की कहानी उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो मानते हैं कि दृढ़ संकल्प और परिवार का समर्थन किसी भी बाधा को पार करने में मदद कर सकता है।
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