चाइबासा में विश्व दृष्टि दिवस पर निकाली गई भव्य जागरूकता रैली
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चाइबासा, 12 अक्टूबर – विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर गुरुवार को चाइबासा शहर में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक भव्य जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस रैली में सैकड़ों छात्रों, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। रैली का मुख्य लक्ष्य आम जनता को नेत्र देखभाल के महत्व, रोके जा सकने वाले अंधत्व के कारणों और नियमित नेत्र जांच की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करना था। यह आयोजन शहर की प्रमुख सड़कों से होकर गुजरा, जहाँ प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियाँ और बैनर लेकर नेत्र स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण संदेशों का प्रसार किया।
नेत्र स्वास्थ्य: एक वैश्विक चुनौती और जागरूकता की आवश्यकता
विश्व दृष्टि दिवस हर साल अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अंधत्व और दृष्टि हानि पर ध्यान केंद्रित करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 2.2 बिलियन लोग दृष्टि दोष से पीड़ित हैं, जिनमें से कम से कम 1 बिलियन मामलों में दृष्टि हानि को रोका जा सकता था या उसका इलाज किया जा सकता था। भारत में भी नेत्र स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती है, जहाँ लाखों लोग मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी और अपवर्तक त्रुटियों जैसी समस्याओं के कारण दृष्टिहीनता का शिकार हैं। इनमें से अधिकांश मामले समय पर जांच और उचित उपचार से रोके जा सकते हैं। इस वर्ष विश्व दृष्टि दिवस की थीम "अपनी आँखों से प्यार करें" थी, जो लोगों को अपनी आँखों की देखभाल को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती है।
पश्चिमी सिंहभूम जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ और भी विकट हैं। यहाँ अज्ञानता, संसाधनों की कमी और जागरूकता का अभाव लोगों को समय पर उपचार कराने से रोकता है। यही कारण है कि चाइबासा में आयोजित इस जागरूकता रैली का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसका उद्देश्य न केवल जानकारी प्रदान करना था, बल्कि लोगों को यह भी समझाना था कि आँखों की देखभाल सिर्फ बुढ़ापे की समस्या नहीं है, बल्कि यह हर उम्र के व्यक्तियों के लिए आवश्यक है, खासकर बच्चों और युवाओं के लिए। आँखों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित जांच, पौष्टिक आहार और उचित सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हैं।
जागरूकता रैली का स्वरूप और संदेश
गुरुवार को सुबह 9 बजे सदर अस्पताल परिसर से शुरू हुई यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों जैसे बाजार टांड़, पोस्ट ऑफिस चौक, अस्पताल रोड और मुख्य मार्ग से होकर गुजरी। रैली में शामिल सैकड़ों छात्रों ने हाथों में आकर्षक बैनर और जागरूकता पोस्टर ले रखे थे, जिन पर "नेत्रदान महादान", "आँखों की नियमित जाँच कराएँ", "अंधत्व को रोकें" और "अपनी आँखों का ध्यान रखें" जैसे नारे लिखे थे। इन नारों के माध्यम से प्रतिभागियों ने आम जनता को नेत्र स्वास्थ्य के महत्व से अवगत कराया। रैली में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, डॉक्टर, नर्सें और अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे, जिन्होंने रास्ते भर लोगों को नेत्र देखभाल के बारे में जागरूक किया।
रैली का माहौल बेहद उत्साहपूर्ण था और सड़कों पर चल रहे लोगों ने भी इसमें गहरी रुचि दिखाई। प्रतिभागियों ने जोर-जोर से नारे लगाए, जिससे शहर का वातावरण नेत्र स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश से गूंज उठा। इस आयोजन का उद्देश्य सिर्फ भीड़ जुटाना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि नेत्र संबंधी बीमारियों के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सके और लोगों को सही जानकारी मिल सके। विशेष रूप से, बच्चों की आँखों की देखभाल पर जोर दिया गया, क्योंकि बचपन में होने वाली दृष्टि संबंधी समस्याओं का समय पर इलाज न होने पर वे स्थायी अंधत्व का कारण बन सकती हैं। स्वच्छता, पौष्टिक आहार, धूप का चश्मा पहनना और मोबाइल तथा कंप्यूटर का सीमित उपयोग जैसे संदेशों को प्रमुखता से प्रसारित किया गया।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की योजनाएँ
इस अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया, "लगभग 80% दृष्टि हानि के मामलों को रोका जा सकता है या उनका इलाज किया जा सकता है। जागरूकता की कमी और समय पर उपचार न मिलना ही अंधत्व का सबसे बड़ा कारण है। हमारी प्राथमिकता लोगों को नियमित नेत्र जांच के लिए प्रेरित करना है, खासकर उन लोगों को जो ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहते हैं। यह रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।" उन्होंने आगे कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग भविष्य में भी निःशुल्क नेत्र जांच शिविरों का आयोजन करता रहेगा और स्कूलों में दृष्टि जांच कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि सरकार की राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम (NPBCVI) जैसी योजनाएँ लोगों को गुणवत्तापूर्ण नेत्र देखभाल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएँ और अपनी आँखों को स्वस्थ रखने के लिए हर संभव प्रयास करें। स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएँ और सामुदायिक नेता भी इस नेक कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें ताकि चाइबासा और आसपास के क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति अनावश्यक रूप से अपनी दृष्टि न खोए। यह सामूहिक प्रयास ही स्वस्थ और दृष्टिमान समाज की स्थापना में सहायक होगा।
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