चंपावत में युवाओं की खेती बनी मिसाल, डीएम ने किया खेत का दौरा, बहुआयामी खेती की सराहना
उत्तराखंड के चंपावत जिले में युवाओं द्वारा अपनाई गई आधुनिक और बहुआयामी खेती आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है। पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों और विविध कृषि गतिविधियों को जोड़कर इन युवाओं ने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है। हाल ही में जिला अधिकारी (डीएम) ने ऐसे ही एक प्रगतिशील किसान के खेत का दौरा कर उनकी मेहनत और नवाचार की सराहना की।
चंपावत के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से खेती मुख्य आजीविका का साधन रही है, लेकिन युवाओं का इस क्षेत्र से मोहभंग होता जा रहा था। रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा था। ऐसे में कुछ युवाओं ने खेती को आधुनिक रूप देकर इसे लाभकारी व्यवसाय में बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन, फल बागवानी, डेयरी और मधुमक्खी पालन को जोड़कर एक समग्र कृषि मॉडल तैयार किया।
डीएम के दौरे के दौरान यह देखने को मिला कि खेत में एक ही स्थान पर कई प्रकार की कृषि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। यहां मौसमी सब्जियों की खेती के साथ-साथ फलदार पौधों की भी अच्छी व्यवस्था है। इसके अलावा डेयरी यूनिट में गायों का पालन किया जा रहा है, जिससे दूध उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। वहीं, मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन भी किया जा रहा है, जो बाजार में अच्छी कीमत पर बिक रहा है।
जिला अधिकारी ने इस बहुआयामी खेती मॉडल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में...
जिला अधिकारी ने इस बहुआयामी खेती मॉडल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल न केवल किसानों की आय को बढ़ाती है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करती है। उन्होंने अन्य किसानों और युवाओं से भी इस मॉडल को अपनाने की अपील की।
इस खेती मॉडल की खास बात यह है कि इसमें संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। एक गतिविधि से उत्पन्न अपशिष्ट को दूसरी गतिविधि में उपयोग किया जा रहा है, जिससे लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ता है। उदाहरण के लिए, डेयरी से निकलने वाला गोबर खेतों में जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो रही है।
इसके अलावा, युवाओं ने आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग शुरू किया है। ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और उन्नत बीजों का प्रयोग कर खेती को अधिक उत्पादक बनाया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वे अपने उत्पादों की सीधी बिक्री भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है और बिचौलियों की भूमिका कम हो गई है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस तरह की पहल से गांवों में नई ऊर्जा आई है। पहले जहां खेती को घाटे का सौदा माना जाता था, अब वही खेती लाभकारी व्यवसाय बनती जा रही है। इससे न केवल आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि युवाओं का खेती के प्रति नजरिया भी बदला है।
डीएम ने अपने दौरे के दौरान संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि ऐसे नवाच...
डीएम ने अपने दौरे के दौरान संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि ऐसे नवाचार करने वाले किसानों को हर संभव सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ इन किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपने कार्य को और विस्तार दे सकें। साथ ही, अन्य किसानों को प्रशिक्षण देकर इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।
चंपावत में विकसित यह बहुआयामी खेती मॉडल आज पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण बन गया है। यह दिखाता है कि यदि सही दिशा, मेहनत और नवाचार को अपनाया जाए
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