छत्तीसगढ़ 7 मिनट पढ़ें

सरगुजा में मलेरिया पीएफ का कहर: मुसरडांड में 34 मरीज, सघन जांच शुरू

13 व्यूज़
सरगुजा में मलेरिया पीएफ का कहर: मुसरडांड में 34 मरीज, सघन जांच शुरू
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मलेरिया पीएफ (प्लाज़्मोडियम फाल्सीपेरम) के बढ़ते प्रकोप ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में जिले के मुसरडांड गांव में एक सघन जांच अभियान के दौरान 34 मरीजों में इस जानलेवा बीमारी की पुष्टि हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गांव में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया है, जहां मरीजों की सघन जांच के साथ-साथ आवश्यक उपचार भी प्रदान किया जा रहा है। यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब मानसून का मौसम शुरू हो रहा है, जिससे मच्छरों के पनपने और बीमारी के फैलने का खतरा और बढ़ जाता है, खासकर आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में।

प्रकोप की गंभीरता और त्वरित प्रतिक्रिया

मलेरिया पीएफ, जिसे प्लाज़्मोडियम फाल्सीपेरम के नाम से जाना जाता है, मलेरिया का सबसे घातक प्रकार है। यह मस्तिष्क, गुर्दे और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है, जिससे समय पर उपचार न मिलने पर मृत्यु भी हो सकती है। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल और वन-आच्छादित क्षेत्रों में, जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित हो सकती है, इस प्रकार के मलेरिया का प्रकोप विशेष रूप से खतरनाक साबित हो सकता है। मुसरडांड गांव में 34 मरीजों का एक साथ मिलना एक चेतावनी का संकेत है, जो दर्शाता है कि संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने इस स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझा और जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर एक त्वरित प्रतिक्रिया दल (Rapid Response Team) का गठन किया गया। इस दल में चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और लैब तकनीशियन शामिल थे, जिन्हें तत्काल मुसरडांड गांव भेजा गया। उनका प्राथमिक उद्देश्य न केवल संक्रमितों की पहचान करना था, बल्कि पूरे गांव की आबादी की जांच कर संभावित नए मामलों का पता लगाना और संक्रमण के आगे प्रसार को रोकना भी था। यह त्वरित प्रतिक्रिया स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता और जन स्वास्थ्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुसरडांड में स्वास्थ्य शिविर और जांच अभियान

मुसरडांड गांव में स्थापित स्वास्थ्य शिविर ने स्थानीय निवासियों के लिए एक जीवनरेखा का काम किया है। इस शिविर में रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट और माइक्रोस्कोपिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे मलेरिया की उपस्थिति और उसके प्रकार की तुरंत पहचान की जा सके। चिकित्सकों की एक टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है और उन्हें मलेरिया-रोधी दवाएं जैसे आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन चिकित्सा (ACT) प्रदान की जा रही हैं, जो पीएफ मलेरिया के इलाज में प्रभावी मानी जाती हैं।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञात मरीजों का इलाज करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक घर तक पहुंच बनाना और बुखार या अन्य मलेरिया जैसे लक्षणों वाले सभी व्यक्तियों की जांच करना है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता गांव में घर-घर जाकर लोगों को जांच के लिए प्रेरित कर रहे हैं और उन्हें बीमारी के लक्षणों व बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी भी दे रहे हैं। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सरगुजा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक मुसरडांड और आसपास के अन्य गांवों से लगभग 200 से अधिक नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिसमें से 34 मामले सकारात्मक पाए गए।

जागरूकता और बचाव के उपाय

मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में केवल उपचार ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जन जागरूकता और बचाव के उपायों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य शिविर में मरीजों और उनके परिजनों को मच्छरों के काटने से बचने के तरीकों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। इसमें मच्छरदानी का उपयोग और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग शामिल है। ग्रामीणों को अपने घरों और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने, पानी जमा होने से रोकने, और पानी के बर्तनों को ढक कर रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि जमा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए आदर्श स्थान होता है। स्थानीय मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस जागरूकता अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे ग्रामीणों को मलेरिया के शुरुआती लक्षणों जैसे बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द को पहचानने और तत्काल स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक