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हर क्षेत्र में हिंदी-छत्तीसगढ़ी उपयोग पर जोर: घनश्याम

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हर क्षेत्र में हिंदी-छत्तीसगढ़ी उपयोग पर जोर: घनश्याम
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भिलाई में इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (IIIE) की भिलाई चेप्टर ने रविवार को भिलाई निवास कॉफी हाउस सभागार में हिंदी दिवस और अभियंता दिवस का संयुक्त समारोह गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित किया। इस विशेष अवसर पर औद्योगिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले इंजीनियरों को सम्मानित किया गया और साथ ही तकनीकी एवं औद्योगिक विकास में हिंदी तथा छत्तीसगढ़ी जैसी जनभाषाओं की भूमिका पर गहन चर्चा की गई। समारोह का मुख्य उद्देश्य स्थानीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित करना और इंजीनियरिंग समुदाय के योगदान को पहचानना था।

तकनीकी और औद्योगिक विकास में स्थानीय भाषाओं का महत्व

समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं वाइस चेयरमैन घनश्याम देवांगन ने हिंदी दिवस के परिप्रेक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी "तकनीकी एवं औद्योगिक विकास में हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी की भूमिका : संभावनाएं एवं चुनौतियां" विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वर्तमान परिवेश में हिंदी और छत्तीसगढ़ी सहित अन्य जनभाषाओं का उपयोग तकनीकी एवं औद्योगिक विकास को अधिक गतिशील, सार्थक और सुरक्षित बना सकता है। घनश्याम देवांगन ने इस बात पर जोर दिया कि जब स्थानीय भाषाओं में तकनीकी ज्ञान का प्रसार होता है, तो यह समाज के एक बड़े वर्ग तक पहुंच पाता है, जिससे नवाचार और सहभागिता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह संस्कृति और समझ का भी एक महत्वपूर्ण वाहक है। देवांगन ने स्पष्ट किया कि तकनीकी शब्दावली को स्थानीय भाषाओं में सरल बनाना एक आवश्यक कदम है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में इन भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया, ताकि आमजन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

उत्कृष्ट इंजीनियरिंग योगदान का सम्मान

इस संयुक्त समारोह में इंडियन इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिवंगत इंजीनियर स्वर्गीय दयानंद हरिरमानी को मरणोपरांत 'लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी, श्रीमती पोर्शा हरिरमानी, ने भावुकता के साथ ग्रहण किया। दयानंद हरिरमानी का योगदान औद्योगिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अमूल्य रहा है और उनके कार्यों ने कई इंजीनियरों को प्रेरित किया है। उनकी स्मृति में एक कार्यशाला आयोजित करने की भी घोषणा की गई, जो उनके सिद्धांतों और नवाचारों को आगे बढ़ाने में सहायक होगी। समारोह के मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा थे, जिन्होंने अपने संबोधन में भाषा और इंजीनियरिंग के समन्वय पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में एक्स चेयरमैन एच.के. देसाई और एस.के. डोगरा भी उपस्थित थे, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। अध्यक्षता चेयरमैन के. पटेल ने की, जिन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।

समय प्रबंधन की पोमोडोरो तकनीक पर चर्चा

अभियंता दिवस के संदर्भ में, चेयरमैन के. पटेल ने अपने संबोधन में समय प्रबंधन पर केंद्रित 'पोमोडोरो तकनीक' पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक किसी भी कार्य को छोटे, केंद्रित अंतरालों में विभाजित करके करने पर आधारित है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। के. पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि आज के प्रतिस्पर्धी औद्योगिक माहौल में इंजीनियरों के लिए समय का कुशल प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने समझाया कि कैसे पोमोडोरो तकनीक को व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों में लागू कर उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। इस तकनीक का उपयोग कर इंजीनियर न केवल अपने दैनिक कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकते हैं, बल्कि वे तनाव को कम करने और कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखने में भी सफल हो सकते हैं। उन्होंने उपस्थित सभी इंजीनियरों और छात्रों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

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समारोह में अन्य वक्ताओं के प्रेरणादायक विचार

इस महत्वपूर्ण समारोह में कई अन्य प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए, जिससे कार्यक्रम की विषय-वस्तु और भी समृद्ध हुई। डॉ. बी.डी. थारकन, कमलेश गुप्ता, दयामणी नायक, सौरभ सिन्हा, सुरेन्द्र गुप्ता और सेंगर जैसे वक्ताओं ने विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीकी शिक्षा में स्थानीय भाषाओं के उपयोग, इंजीनियरिंग में नवाचार, और औद्योगिक सुरक्षा जैसे विषयों पर अपने मूल्यवान दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। इन वक्ताओं ने सामूहिक रूप से इस बात पर सहमति व्यक्त की कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए तकनीकी प्रगति और भाषाई समावेशन दोनों ही आवश्यक हैं। समारोह में उपस्थित प्रतिभागियों ने इन चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया, प्रश्न पूछे और अपने अनुभव साझा किए, जिससे एक जीवंत और ज्ञानवर्धक वातावरण का निर्माण हुआ। यह संयुक्त समारोह हिंदी और इंजीनियरिंग के महत्व को उजागर करने में सफल रहा, साथ ही भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर भी व्यापक परिप्रेक्ष्य प्रदान किया।

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