रायगढ़ में चक्रधर समारोह का राज्यपाल करेंगे शुभारंभ, गणेश वंदना से आगाज
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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी रायगढ़ में आज से 38वें बहुप्रतीक्षित चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ होगा। कला, संगीत और साहित्य के इस दस दिवसीय महाकुंभ का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन करेंगे। यह समारोह रायगढ़ रियासत के महाराजा चक्रधर सिंह की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिन्होंने कला और कलाकारों को संरक्षण प्रदान किया था। पहली शाम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना से होगी, जिसके बाद देश-विदेश के प्रख्यात कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखना और उसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना है।
समारोह का भव्य शुभारंभ और अतिथिगण
आज शाम 7 बजे स्थानीय राजकीय कला केंद्र सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके साथ राज्य के सांस्कृतिक मंत्री, स्थानीय सांसद, विधायकगण और प्रशासनिक अधिकारी भी मंच साझा करेंगे। उद्घाटन सत्र में राज्यपाल कला और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समारोह के उद्देश्यों पर अपने विचार रखेंगे। महाराजा चक्रधर सिंह ने स्वयं एक कुशल तबला वादक और कथक नर्तक के रूप में अपनी पहचान बनाई थी, और यह समारोह उन्हीं की कला प्रेम और संरक्षण की विरासत को आगे बढ़ाता है। यह आयोजन हर साल हजारों कला प्रेमियों को रायगढ़ की ओर आकर्षित करता है, जिससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। आयोजकों ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसमें आधुनिक ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था का उपयोग किया गया है।
पहली शाम की सांस्कृतिक छटा
समारोह की पहली शाम सांस्कृतिक रंगों से सराबोर होगी। उद्घाटन के बाद सबसे पहले युवा कलाकारों द्वारा मनमोहक गणेश वंदना प्रस्तुत की जाएगी, जो समारोह के शुभारंभ का पारंपरिक और शुभ प्रतीक है। इसके बाद, छत्तीसगढ़ की गौरव पद्मश्री डॉ. उषा बारले अपनी प्रसिद्ध पंडवानी शैली में महाभारत की कहानियों का अद्भुत मंचन करेंगी। उनकी प्रस्तुति पंडवानी के पारंपरिक स्वरूप और आधुनिक मंचन का सुंदर मिश्रण होगी, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगी। डॉ. बारले ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश-विदेश में पहुंचाया है और उनकी उपस्थिति समारोह की गरिमा को बढ़ाएगी। पहली शाम का एक और प्रमुख आकर्षण मलेशिया से आया एक शास्त्रीय नृत्य समूह होगा, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर आधारित अपनी अनूठी प्रस्तुति देगा। यह अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुति समारोह को वैश्विक आयाम प्रदान करेगी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय और राज्य स्तरीय कलाकारों द्वारा भी विभिन्न शास्त्रीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिसमें कथक, भरतनाट्यम और हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन शामिल होंगे।
चक्रधर समारोह का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और महत्व
चक्रधर समारोह की शुरुआत वर्ष 1985 में हुई थी, जिसका उद्देश्य महाराजा चक्रधर सिंह की कला विरासत को जीवित रखना और शास्त्रीय कलाओं को जन-जन तक पहुंचाना था। महाराजा चक्रधर सिंह ने अपनी रियासत में कई कला अकादमियों की स्थापना की थी, जहां युवा कलाकारों को प्रशिक्षण दिया जाता था। यह समारोह उन्हीं मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित है। पिछले 37 वर्षों से यह समारोह लगातार आयोजित हो रहा है और इसने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इस समारोह के माध्यम से शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोक कला और साहित्य को एक साझा मंच मिलता है। यह न केवल स्थापित कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर देता है बल्कि उभरती हुई प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन प्रदान करता है। समारोह में कला कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और सेमिनार भी आयोजित किए जाते हैं, जो कला प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञानवर्धक होते हैं। चक्रधर समारोह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन गया है और यह राज्य की समृद्ध कलात्मक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आयोजन कला, संस्कृति और पर्यटन के संगम का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो रायगढ़ को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
आगामी दिनों के प्रमुख आकर्षण और सांस्कृतिक विस्तार
दस दिवसीय इस समारोह में आने वाले दिनों में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें प्रख्यात शास्त्रीय गायक, वाद्य यंत्र वादक और नर्तक शामिल होंगे। कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत की विभिन्न शैलियों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। विशेष रूप से, युवा कलाकारों के लिए एक समर्पित मंच भी तैयार किया गया है, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे। समारोह में छत्तीसगढ़ की स्थानीय लोक कलाओं जैसे करमा, ददरिया और पंथी नृत्य को भी शामिल किया गया है, जिससे राज्य की लोक संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अतिरिक्त, समारोह के दौरान कला पर आधारित चित्रकला और मूर्तिकला की प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएंगी, जहां स्थानीय और राज्य स्तरीय कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। चक्रधर समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि कला और कलाकारों के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक है। यह कला प्रेमियों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार है और अगले दस दिनों तक रायगढ़ को सांस्कृतिक उत्सव में डुबो देगा।